bihar - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Fri, 27 Sep 2024 11:54:24 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg bihar - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 लालू यादव पर नौकरी के बदले जमीन घोटाले में ईडी ने बढ़ाई मुश्किलें, चार्जशीट में गंभीर आरोप https://chaupalkhabar.com/2024/09/27/lalu-yadav-in-exchange-for-job/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/27/lalu-yadav-in-exchange-for-job/#respond Fri, 27 Sep 2024 11:54:24 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5132 प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ईडी ने इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है, जिसमें लालू यादव को इस पूरे घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। आरोप पत्र में कहा गया है कि लालू यादव, जो उस …

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ईडी ने इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है, जिसमें लालू यादव को इस पूरे घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। आरोप पत्र में कहा गया है कि लालू यादव, जो उस वक्त रेलवे मंत्री थे, ने रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले जमीन लेने की साजिश रची थी। ईडी ने दावा किया है कि लालू यादव खुद ही इस लेन-देन की निगरानी करते थे और अपने परिवार के सदस्यों के जरिए इस योजना को अंजाम देते थे। ईडी की चार्जशीट में कहा गया है कि लालू यादव ने रेलवे में नौकरी के लिए रिश्वत के तौर पर जमीनें लीं। उस वक्त लालू यादव भारत के रेल मंत्री थे और उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर लोगों से जमीन ली, जिसके बदले उन्हें रेलवे में नौकरियां दी गईं। ईडी के अनुसार, ये जमीनें कौड़ियों के भाव में खरीदी गईं, खासकर बिहार के पटना में स्थित महुआ बाग क्षेत्र की जमीनें। इन जमीनों के मालिकों को लालू यादव के करीबी और सहयोगियों ने रेलवे में नौकरी का वादा करके अपनी जमीन सस्ते में बेचने के लिए मजबूर किया।

चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि इन जमीनों को यादव परिवार से जुड़ी शेल कंपनियों के नाम पर दर्ज कराया गया। जमीन की खरीदी और बिक्री को ऐसे तरीके से अंजाम दिया गया कि लालू यादव और उनके परिवार की प्रत्यक्ष संलिप्तता पर कोई शक न हो। इन सौदों को छिपाने के लिए शेल कंपनियों का जाल बिछाया गया था, ताकि जमीन के मालिकाना हक को छुपाया जा सके। ईडी ने अपनी जांच में पाया कि इस घोटाले को और जटिल बनाने के लिए कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। चार्जशीट में एक विशेष कंपनी का जिक्र किया गया है, जिसका नाम मेसर्स एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड है। इस कंपनी के जरिए कई जमीनें राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के नाम ट्रांसफर की गईं। चार्जशीट के अनुसार, इस कंपनी का स्वामित्व एक करीबी सहयोगी अमित कत्याल ने मामूली कीमत पर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को हस्तांतरित कर दिया।

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चार्जशीट में लालू यादव के करीबी सहयोगी भोला यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। ईडी के मुताबिक, भोला यादव इस घोटाले के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने रेलवे में नौकरी के बदले जमीनों के सौदे में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। भोला यादव ने खुद इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने लालू परिवार के नजदीक स्थित भू-स्वामियों को अपनी जमीनें बेचने के लिए राजी किया। ईडी ने आरोप लगाया कि यह सारा खेल लालू यादव के परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए रचा गया था। इसके अलावा, राबड़ी देवी के निजी कर्मचारी हृदयानंद चौधरी और लल्लन चौधरी जैसे बिचौलियों के माध्यम से जमीनों का हस्तांतरण किया गया।

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ईडी ने यह भी दावा किया है कि कई जमीनों को दूर के रिश्तेदारों से उपहार के रूप में दिखाया गया था। लेकिन जब जांच के दौरान लालू यादव की बेटी मीसा भारती से सवाल किया गया, तो उन्होंने इन रिश्तेदारों को जानने से इनकार कर दिया। ईडी के मुताबिक, इस घोटाले में उपहार और शेल कंपनियों के उपयोग से संपत्तियों को छिपाने की कोशिश की गई थी। तेजस्वी यादव ने अपने बयान में स्वीकार किया कि वह एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड में शेयरधारक थे, लेकिन कंपनी ने कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं की थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह कंपनी के संचालन से संबंधित कई जानकारियों से अनजान थे। हालांकि, उन्होंने नई दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में स्थित संपत्ति में अपने निवेश को स्वीकार किया, जो ईडी के अनुसार, घोटाले से जुड़ी हुई थी।

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बिहार की राजनीतिक धारा, नीतीश और तेजस्वी की बैठक से अगले विधानसभा चुनावों की संभावनाएं. https://chaupalkhabar.com/2024/09/09/political-stream-of-bihar/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/09/political-stream-of-bihar/#respond Mon, 09 Sep 2024 10:14:53 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4758 बिहार की राजनीति ने हमेशा राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस राज्य में लंबे समय से प्रमुख भूमिका में रहे हैं। उन्होंने बार-बार गठबंधनों और राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में कुशलता दिखाई है। हाल ही में, नीतीश कुमार की तेजस्वी यादव के साथ …

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बिहार की राजनीति ने हमेशा राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस राज्य में लंबे समय से प्रमुख भूमिका में रहे हैं। उन्होंने बार-बार गठबंधनों और राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में कुशलता दिखाई है। हाल ही में, नीतीश कुमार की तेजस्वी यादव के साथ बैठक ने बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर नई अटकलें शुरू कर दी हैं। नीतीश कुमार ने 2023 में जाति सर्वेक्षण के आधार पर दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के लिए आरक्षण को 65 प्रतिशत कर दिया था। हालांकि, पटना उच्च न्यायालय ने इस फैसले को रद्द कर दिया, और मामला सुप्रीम कोर्ट में है। तेजस्वी यादव ने इस फैसले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने का आग्रह किया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

नीतीश की तेजस्वी के साथ हालिया बैठक का औपचारिक बहाना नए सूचना आयुक्त के चयन पर चर्चा था। लेकिन नीतीश ने भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के शहर में होने के दौरान कहा कि उन्होंने पहले गलती की थी, जो अब नहीं होगी। यह बयान नीतीश के दोहरी रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने भाजपा से संबंध सुधारने की कोशिश की है।

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भाजपा ने नीतीश को खुश रखने के लिए केंद्रीय बजट में बिहार के लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया और 2025 के राज्य चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ने की घोषणा की। इसके बावजूद, नीतीश की पार्टी जेडी(यू) के भीतर भाजपा के प्रति सही संतुलन बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। जेडी(यू) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि तेजस्वी से मुलाकात को अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।

इस बीच, चिराग पासवान और उनकी पार्टी ने दलित वोटों को मजबूत करने के लिए आक्रामक रुख अपनाया है। चिराग ने सुप्रीम कोर्ट के उप-कोटा आदेश का विरोध किया और दलितों के अधिकारों के मुद्दे को उठाया। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि चिराग पासवान की महत्त्वाकांक्षाओं और नीतीश कुमार की चतुर राजनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिशें लगातार चल रही हैं।

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नए राजनीतिक समीकरणों के बीच, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की बैठक ने यह संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में आगामी समय में और भी हलचल देखने को मिल सकती है। यह स्पष्ट है कि सभी प्रमुख दल अपने-अपने चुनावी हितों को ध्यान में रखते हुए रणनीतियों में बदलाव कर रहे हैं।

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जद(यू) में अंदरूनी कलह, भाजपा के साथ गठबंधन और विचारधारा के बीच फंसी नीतीश कुमार की पार्टी. https://chaupalkhabar.com/2024/09/07/internal-strife-in-jdu-bjp/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/07/internal-strife-in-jdu-bjp/#respond Sat, 07 Sep 2024 07:27:50 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4721 जनता दल (यूनाइटेड) [जद(यू)] के भीतर इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में दो धड़ों के बीच सत्ता संघर्ष उभर कर सामने आया है। एक ओर वे नेता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन को बनाए रखने के पक्षधर हैं, जबकि दूसरी …

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जनता दल (यूनाइटेड) [जद(यू)] के भीतर इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में दो धड़ों के बीच सत्ता संघर्ष उभर कर सामने आया है। एक ओर वे नेता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन को बनाए रखने के पक्षधर हैं, जबकि दूसरी ओर वे नेता हैं जो पार्टी की मूल विचारधारा पर समझौता करने के खिलाफ हैं। यह विवाद तब खुलकर सामने आया जब जद(यू) के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। केसी त्यागी ने मोदी सरकार के कुछ फैसलों, जैसे सिविल सेवाओं में लेटरल एंट्री, समान नागरिक संहिता, और सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण पर दिए गए फैसले का खुलकर विरोध किया। इसके अलावा, इजरायल और फिलिस्तीन पर भारत की विदेश नीति को लेकर भी उन्होंने तीखे सवाल उठाए। हालांकि, त्यागी के ये बयान जद(यू) की विचारधारा के अनुरूप ही थे, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के साथ पार्टी के समीकरण को बिगड़ने से रोकने के लिए उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया।

भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर जद(यू) के भीतर विवाद और भी गहरा हो गया है, खासकर तब जब पार्टी ने संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन किया। वक्फ संपत्ति पर कानून में संशोधन को लेकर पार्टी के अंदर मतभेद उभरकर सामने आए। कुछ नेताओं ने इस विधेयक का विरोध यह कहकर किया कि यह जद(यू) की मूल विचारधारा के खिलाफ है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने संसद में विधेयक का समर्थन किया, जबकि जद(यू) के अन्य नेता, जैसे विजय कुमार चौधरी, इससे असहमत थे। चौधरी ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को दूर किए बिना इस विधेयक को पारित नहीं किया जाना चाहिए। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले विजय कुमार चौधरी के इस बयान को पार्टी की आधिकारिक स्थिति के रूप में देखा गया। दूसरी ओर, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ज़मा खान ने मुस्लिम बच्चों के लिए नए स्कूल और वक्फ भूमि पर 21 मदरसों के निर्माण की योजना की घोषणा करके ललन सिंह के बयान का असर कम करने की कोशिश की।

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जद(यू) के अंदर यह सत्ता संघर्ष इस बात का संकेत है कि पार्टी के नेता अगले साल के विधानसभा चुनाव और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के एक नेता ने बताया कि एक धड़ा भाजपा के साथ गठबंधन बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा धड़ा मानता है कि भाजपा की मजबूरी है, इसलिए जद(यू) को अपनी पहचान और विचारधारा पर कायम रहना चाहिए। इस विभाजन के बीच पार्टी के कुछ नेता अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भाजपा के साथ मधुर संबंध बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, नीतीश कुमार एक अनुभवी और चतुर राजनेता हैं। वे पहले भी पार्टी के भीतर असहमति रखने वाले नेताओं, जैसे जॉर्ज फर्नांडिस और शरद यादव, को दरकिनार कर चुके हैं। पिछले साल ललन सिंह ने नीतीश कुमार के साथ मतभेदों की अफवाहों के चलते पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, पार्टी ने इन अफवाहों का खंडन किया था। नीतीश कुमार ने अपने करीबी सहयोगी संजय झा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है, ताकि विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को मजबूत किया जा सके।

विधानसभा चुनाव से पहले जद(यू) के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। वक्फ विधेयक पर मतभेद, त्यागी का इस्तीफा, और पार्टी के भीतर के असंतोष ने जद(यू) को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है। पार्टी के अंदर की एक और घटना, जिसने असंतोष को और बढ़ा दिया, वह थी 22 अगस्त को राज्य कार्यकारिणी सदस्यों की सूची का अचानक बदलाव। पहली सूची में 251 सदस्यों के नाम थे, लेकिन कुछ ही घंटों में इसे वापस लेकर नई सूची जारी की गई, जिसमें सदस्यों की संख्या घटाकर 115 कर दी गई। इस बदलाव ने पार्टी के अंदर और भी असंतोष पैदा कर दिया, क्योंकि ललन सिंह और अशोक चौधरी के कई समर्थकों को नई सूची से हटा दिया गया था। पार्टी ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह बदलाव उन नेताओं को हटाने के लिए किया गया, जो लोकसभा चुनावों के दौरान सक्रिय नहीं थे या जिनका प्रदर्शन असंतोषजनक था। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम सत्ता संतुलन बनाने के लिए उठाया गया था। अशोक चौधरी ने जहानाबाद संसदीय सीट पर हार के लिए भूमिहारों को जिम्मेदार ठहराते हुए विवाद खड़ा कर दिया। उनका बयान जद(यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार को पसंद नहीं आया, जिन्होंने उनकी आलोचना की और कहा कि नीतीश कुमार कभी जाति आधारित राजनीति नहीं करते हैं।

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बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। वे कुर्मी-कुशवाहा और अत्यंत पिछड़ी जातियों के गठबंधन के कारण राज्य की राजनीति में एक मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर चल रहे इस सत्ता संघर्ष को देखते हुए, नीतीश कुमार को जल्द से जल्द पार्टी के भीतर की दरारों को दूर करना होगा। नीतीश कुमार के नेतृत्व पर चर्चा करते हुए, पूर्व भाजपा उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक बार कहा था, “नीतीश कुमार हमेशा अपने मौजूदा साथी को मात देने के लिए दो खिड़कियां खुली रखते हैं।” इस बात को ध्यान में रखते हुए, विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश कुमार इस समय की चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं और उन्होंने पहले भी ऐसे कई राजनीतिक संकटों का सामना किया है।

पार्टी के सांसद रामप्रीत मंडल ने कहा, “त्यागी ने अवांछित रुख अपनाया, लेकिन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की संवेदनशीलता को देखते हुए पार्टी में आखिरकार नीतीश जी के विचार ही चलेंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे नेता क्या सोचते हैं।”

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बिहार की राजनीति में नई हलचल: नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की मुलाकात से उठी अटकलें, पुराना वीडियो बना चर्चा का केंद्र. https://chaupalkhabar.com/2024/09/06/new-solution-in-bihar-politics/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/06/new-solution-in-bihar-politics/#respond Fri, 06 Sep 2024 09:38:59 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4707 बिहार की राजनीति में हाल के दिनों में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। 4 सितंबर 2024 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से यह चर्चा शुरू हो …

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बिहार की राजनीति में हाल के दिनों में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। 4 सितंबर 2024 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से यह चर्चा शुरू हो गई है कि नीतीश कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं, जिससे भाजपा और नीतीश कुमार की दोस्ती में दरार आने की संभावना जताई जा रही है।

तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच यह मुलाकात अचानक और अप्रत्याशित थी, जिससे अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। इस मुलाकात के बाद राजद समर्थक सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार महागठबंधन में लौट सकते हैं, और इस तरह से बिहार की सियासत में नया मोड़ आ सकता है। हालांकि, इस मुलाकात का वास्तविक कारण क्या था, इसे लेकर तेजस्वी यादव ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात महज एक सामाजिक बातचीत थी और इसमें कोई बड़ा राजनीतिक इशारा नहीं था।

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हालांकि, इस मुलाकात के बाद भी राजनीतिक अटकलें कम नहीं हुई हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें नीतीश कुमार और लालू यादव की मुलाकात को हाल की बताया जा रहा है। इस वीडियो को कई लोगों ने शेयर किया और इसे बिहार की सियासी स्थिति पर बड़ा असर डालने वाला बताया। लेकिन जांच में पता चला कि यह वीडियो दो साल पुराना है। यह वीडियो 5 सितंबर 2022 का है, जब नीतीश कुमार लालू यादव से मिलने राबड़ी आवास पर गए थे, और तब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी। इसलिए, इस वीडियो की ताजगी के दावे पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही बिहार की सियासत में कई बदलाव हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल नीतीश कुमार और भाजपा के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। वर्तमान में बिहार में भाजपा और जेडीयू की डबल इंजन की सरकार है, जो अपने विकास कार्यों के लिए जानी जाती है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में कहा कि भाजपा की विचारधारा पर लोगों का भरोसा पूरी तरह से है। उन्होंने यह भी कहा कि 2005 के बाद बिहार में जो विकास हुआ है, वह नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के नेतृत्व में संभव हुआ है। उनके अनुसार, भाजपा ने जो भी वादे किए हैं, उन्हें पूरा भी किया है।

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वहीं, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने राजद पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लालू प्रसाद का कुशवाहा समाज के प्रति प्रेम ढकोसला है। उन्होंने दावा किया कि राजद के लुभावने भाषणों से जनता को भ्रमित किया जाता है, और कुशवाहा समाज को परिवारवादी राजनीति से बाहर रखना चाहिए। इस तरह से, बिहार की राजनीति में चल रही हलचल और सोशल मीडिया पर फैली अटकलों के बावजूद, फिलहाल कोई ठोस प्रमाण या आधिकारिक बयान नहीं आया है जो यह साबित कर सके कि नीतीश कुमार और भाजपा के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव होने वाला है। वर्तमान में, यह कह पाना मुश्किल है कि भविष्य में बिहार की सियासत में क्या मोड़ आएगा, लेकिन फिलहाल की स्थिति में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि नीतीश कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल होंगे।

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भाजपा की आलोचना और जन सुराज की चुनौती,प्रशांत किशोर की राजनीति पर चर्चा. https://chaupalkhabar.com/2024/09/05/criticism-of-bjp-and-public-surra/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/05/criticism-of-bjp-and-public-surra/#respond Thu, 05 Sep 2024 10:42:15 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4684 प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जो अभी तक आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं हुई है, ने बिहार में प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच ‘बी टीम’ का तमगा प्राप्त किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किशोर पर हमला करते हुए उनकी पार्टी को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ‘बी टीम’ करार दिया है। यह आरोप …

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प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जो अभी तक आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं हुई है, ने बिहार में प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच ‘बी टीम’ का तमगा प्राप्त किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किशोर पर हमला करते हुए उनकी पार्टी को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ‘बी टीम’ करार दिया है। यह आरोप भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने ट्विटर अकाउंट पर किया। मालवीय ने अपने ट्वीट में लिखा, “हिंदुस्तान की राजनीति में एक और मुस्लिम परस्त पार्टी का उदय हो चुका है। इस बार बिहार में! जैसे ही कोई हिंदू नेता कैफी या जालीदार टोपी पहन लेता है, तो समझ लेना चाहिए कि उसे मुसलमानों की भलाई नहीं, सिर्फ उनका वोट चाहिए। बिहार में जन सुराज और राजद, एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। भाजपा और एनडीए ही एकमात्र राष्ट्रवादी विकल्प है।” यह बयान भाजपा की ओर से किशोर को निशाना बनाने का नवीनतम प्रयास है, जो आगामी बिहार चुनाव के मद्देनजर हो रहा है।

भाजपा को किशोर के मुसलमानों को प्राथमिकता देने के आरोप से अधिक चिंता ऊंची जातियों के उनकी ओर आकर्षित होने की संभावनाओं को लेकर है। किशोर ने बिहार में कम से कम 40 मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारने का वादा किया है। इसके अलावा, किशोर ने जुलाई में 40 महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारने की घोषणा की है, जो भाजपा और उसके सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है। भाजपा के नेतृत्व को किशोर की संगठनात्मक तैयारी और 1 करोड़ सदस्यों के साथ जन सुराज को लॉन्च करने की घोषणा ने ‘घबराहट’ में डाल दिया है। यह घटना उस समय हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के बावजूद भाजपा ने बिहार की पांच लोकसभा सीटें — पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, औरंगाबाद और सासाराम — खो दी थीं।

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किशोर की घोषणा को राजद के मुस्लिम-यादव वोट बैंक को लक्षित करने की योजना के रूप में देखा गया है। बिहार की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत है और वह सब बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय जनता दल को वोट देते हैं, केवल नीतीश कुमार की जेडी(यू) के समर्थकों के। इसके अलावा किशोर के भाषण का दूसरा हिस्सा यह रहा जिसमें उन्होंने कहा, की “भाजपा को हराने के लिए मुसलमानों को गांधी, आंबेडकर, लोहिया और जेपी (जयप्रकाश नारायण) की विचारधारा को अपनाना होगा” जिसे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को गंभीरता से लिया है। किशोर ने 2014 में नरेंद्र मोदी की जीत में योगदान दिया था, लेकिन 2015 से 2021 तक उन्होंने भाजपा के खिलाफ लड़ने वाली पार्टियों और नेताओं की जीत में योगदान किया। किशोर का कहना है कि भाजपा ने केवल 37 प्रतिशत वोटों के साथ दिल्ली में सरकार बनाई, जबकि हिंदू आबादी 80 प्रतिशत है, इसका मतलब है कि 40 प्रतिशत हिंदुओं ने भाजपा के खिलाफ और नफरत की राजनीति के खिलाफ वोट दिया।

किशोर का उद्देश्य विपक्ष की जगह लेने का है, जैसा कि राजद के तेजस्वी यादव पर उनके लगातार हमलों से स्पष्ट है। साथ ही, उनकी नजर भाजपा के ऊंची जातियों के वोट बैंक पर भी है। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने किशोर पर आरोप लगाया है कि वह भाजपा की ‘बी टीम’ हैं। “यह लोकसभा चुनावों से स्पष्ट है जब उन्होंने भाजपा और मोदी की प्रशंसा की, लेकिन उन्हें हमारे आधार का कोई वोट नहीं मिलेगा।” जन सुराज के एक पदाधिकारी द्वारा कहा गया की नीतीश कुमार एक घटती हुई ताकत हैं।और नीतीश के जाने के बाद बिहार में दो पार्टियां ही बची रहेंगी जिनमें से एक है राजद और दूसरी है भाजपा। और देखा जाए तो भाजपा अपनी विचारधारा और लोकप्रिय नेतृत्व वाले विशाल संगठन के सहारे ही वहाँ अपनी मज़बूती को बनाये हुए है। तेजस्वी के स्थान पर (जन सुराज के लिए) अधिक गुंजाइश है।”

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जुलाई में, राजद के दिग्गज नेता जगदानंद सिंह ने एक पत्र लिखकर जन सुराज को भाजपा की ‘टीम बी’ करार दिया था और राजद के सदस्यों के किशोर के प्रति निष्ठा बदलने की चिंता जताई थी। पिछले पांच महीनों में कई प्रमुख राजद नेता जैसे देवेंद्र प्रसाद यादव, रामबली चंद्रवंशी, अब्दुल मजीद और रिवाज अंसारी जन सुराज में शामिल हो चुके हैं। किशोर के साथ जुड़ने वालों में से है कर्पूरी ठाकुर की पोती डॉ. जागृति और पूर्व आईपीएस अधिकारी रही आनंद मिश्रा एव अभिनेत्री अक्षरा सिंह शामिल हैं। बीजेपी के उपाध्यक्ष ने एक मीडिया रिपोर्ट में बताया की “प्रशांत किशोर के पास पैसा और जगह है। और हर पार्टी के नेता जो नाराज़ हैं या जिन्हें टिकट नहीं मिल रहा है, वह यह सब देखकर उनके साथ आ जाएंगे। लालू के समर्थक प्रतिबद्ध हैं; यादव भाजपा को वोट नहीं देंगे। और यहां तक कि मुसलमान वोटर भी उन्हें वोट नहीं देंगे क्योंकि उन्हें मालूम है कि वह भी भाजपा को नहीं हरा सकते।”

उन्होंने कहा कि किशोर उच्च जाति के मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए वे गांधी और आंबेडकर की प्रशंसा कर रहे हैं। भाजपा के एक महासचिव ने कहा कि किशोर की यात्रा चंपारण, सारण और मिथिला जैसे भाजपा के गढ़ों में भी घूमी है। उन्होंने कहा, “वो पहले आरजेडी के गढ़ मगध और सीमांचल क्यों नहीं गए? वो जानते हैं कि ऊंची जातियों के पास राजनीति के लिए संसाधन हैं और उन्हें जीता जा सकता है।”

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भाजपा प्रदेश इकाई के एक नेता ने कहा कि किशोर बिहार में बदलाव की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अरविंद केजरीवाल की राह पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा, “किशोर बदलाव की कहानी का इस्तेमाल कर रहे हैं और कह रहे हैं कि बिहारियों ने पिछले 40 सालों में सभी पार्टियों को आजमाया है — चाहे वो आरजेडी हो, जेडी(यू) हो या भाजपा। वो बदलाव, रोजगार, युवाओं के पलायन, शिक्षा की कमी और एनडीए के 25 साल के शासन के बावजूद उद्योग की कमी के बारे में अपनी बात रख रहे हैं और यह गति पकड़ रहा है।”

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चिराग पासवान ने गृह मंत्री अमित शाह से की मुलाकात, बिहार चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन पर जताई प्रतिबद्धता. https://chaupalkhabar.com/2024/08/31/chirag-paswan-new-home-mantra/ https://chaupalkhabar.com/2024/08/31/chirag-paswan-new-home-mantra/#respond Sat, 31 Aug 2024 07:39:39 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4561 केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है, खासकर जब से चिराग पासवान की पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार से अलग रुख रखती है। जातिगत जनगणना, लैटरल एंट्री …

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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है, खासकर जब से चिराग पासवान की पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), कुछ मुद्दों पर केंद्र सरकार से अलग रुख रखती है। जातिगत जनगणना, लैटरल एंट्री आरक्षण, और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चिराग पासवान के विचारों ने कई बार सत्ताधारी दल के साथ असहमति के संकेत दिए हैं।

हालांकि, इन अटकलों के बीच चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संबंध अविभाज्य हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए चिराग पासवान ने कहा, “नरेंद्र मोदी के प्रति मेरा प्यार अटल है। जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, मैं उनसे अविभाज्य हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी पार्टी और भाजपा आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में एक साथ मिलकर चुनाव लड़ें। यह बयान उन अफवाहों को खारिज करता है जिनमें कहा जा रहा था कि चिराग पासवान और भाजपा के बीच संबंधों में खटास आ गई है।

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चिराग पासवान ने बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन पर अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा, “हमारी पार्टी का बिहार और केंद्र में भाजपा के साथ गठबंधन है, और हम इस गठबंधन धर्म का पालन करेंगे।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी झारखंड जैसे राज्यों में भी एनडीए के अन्य साथियों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है। “हम राष्ट्रीय स्तर पर और अपने गृह राज्य में गठबंधन धर्म का पालन करेंगे। हालांकि झारखंड जैसे राज्यों में हमारे पास कोई बंधन नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम वहां भाजपा के साथ गठबंधन के खिलाफ हैं। अगर भाजपा और एनडीए के अन्य साथी हमें अपने साथ चाहते हैं, तो हम तैयार हैं,” चिराग ने कहा।

अपने चाचा और लोक जनशक्ति पार्टी के अलग हुए गुट के नेता, पशुपति पारस, के बारे में चिराग पासवान ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “उन्होंने (पारस) जनता का सारा समर्थन खो दिया है। वह लोकसभा चुनाव से पहले भी सभी लोगों से मिल रहे थे, लेकिन यह कवायद कोई फायदा नहीं पहुंचा पाई।” चिराग की यह टिप्पणी पारस की राजनीतिक स्थिति और उनके पार्टी में प्रभाव को लेकर एक स्पष्ट संदेश देती है।

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चिराग पासवान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में असमंजस का माहौल है। बिहार में जातिगत जनगणना और आरक्षण जैसे मुद्दे केंद्र और राज्य सरकार के बीच मतभेद पैदा कर रहे हैं। इन मुद्दों पर चिराग पासवान का स्पष्ट रुख और भाजपा के साथ उनकी प्रतिबद्धता, बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। आगामी चुनाव में भाजपा और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के गठबंधन की संभावना इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों दल इन जटिल मुद्दों को कैसे संभालते हैं।

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नीतीश कुमार की जदयू में बड़ा फेरबदल: प्रदेश कमेटी भंग, नई कमेटियों का गठन. https://chaupalkhabar.com/2024/08/24/nitish-kumar-in-jdu-big/ https://chaupalkhabar.com/2024/08/24/nitish-kumar-in-jdu-big/#respond Sat, 24 Aug 2024 10:32:43 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4428 बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने शनिवार को एक अहम निर्णय लिया है। पार्टी ने प्रदेश कमेटी और राजनीतिक सलाहकार समिति को भंग कर दिया है। इसके साथ ही नई कमेटियों का गठन भी कर दिया गया है, …

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बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने शनिवार को एक अहम निर्णय लिया है। पार्टी ने प्रदेश कमेटी और राजनीतिक सलाहकार समिति को भंग कर दिया है। इसके साथ ही नई कमेटियों का गठन भी कर दिया गया है, जिसमें कई नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। जदयू के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर भी इस आदेश पत्र को साझा किया गया है। जारी किए गए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश जदयू की प्रदेश कमेटी और प्रदेश राजनीतिक सलाहकार समिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। इसके बाद, पार्टी ने नई कमेटी का गठन करते हुए 10 उपाध्यक्ष, 49 महासचिव और 46 सचिव नियुक्त किए हैं।

इन नए पदाधिकारियों में एमएलसी ललन कुमार सराफ को कोषाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। यह घोषणा भी जदयू के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की गई है। इस राजनीतिक फेरबदल के बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पूर्णिया दौरा भी सुर्खियों में रहा। हालांकि, यह दौरा अपेक्षाकृत छोटा था, लेकिन इस दौरान उन्होंने इलाके का हवाई निरीक्षण और समीक्षा बैठक की।

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नीतीश कुमार के इस दौरे के बाद से पूर्णिया में हवाई उड़ान सेवा जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। यह इलाका सीमांचल का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, जिससे यहां की विकास योजनाओं को और गति मिलेगी। बिहार की राजनीति में इस बदलाव को लेकर विभिन्न अटकलें लगाई जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जदयू की यह रणनीति आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह नई पहल पार्टी के संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई कमेटियों के गठन के साथ, पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि वह अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत कर रही है और इसके लिए बड़े बदलावों से भी पीछे नहीं हटेगी। इससे जदयू के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद है, जिससे पार्टी आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हो सकेगी।

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मोदी सरकार की ‘पूर्वोदय योजना’ से पांच राज्यों को मिलेगा ‘उदय’ का अवसर… https://chaupalkhabar.com/2024/07/24/modi-government-purvodaya-yo/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/24/modi-government-purvodaya-yo/#respond Wed, 24 Jul 2024 09:24:37 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4028 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बजट के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। इस बजट में बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष रूप से लाभान्वित किया गया है, जहां केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं का ऐलान किया है। इनमें से एक महत्वपूर्ण योजना ‘पूर्वोदय’ योजना है, जिसे देश के पूर्वी हिस्से के …

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बजट के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। इस बजट में बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष रूप से लाभान्वित किया गया है, जहां केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं का ऐलान किया है। इनमें से एक महत्वपूर्ण योजना ‘पूर्वोदय’ योजना है, जिसे देश के पूर्वी हिस्से के विकास के लिए तैयार किया गया है। इस योजना का लाभ बिहार, आंध्र प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे पांच राज्यों को मिलेगा। वित्त मंत्री ने इस योजना के माध्यम से इन राज्यों में चहुंमुखी विकास की संभावना जताई है। पूर्वोदय योजना का उद्देश्य देश के पूर्वी हिस्से के राज्यों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करना है। इन राज्यों में प्राकृतिक संपदाएँ प्रचुर मात्रा में हैं और इनकी सांस्कृतिक परंपराएं भी बहुत समृद्ध हैं। इस योजना के माध्यम से इन राज्यों में मानव संसाधन विकास, अवसंरचना का विस्तार और आर्थिक अवसरों का सृजन किया जाएगा। यह योजना देश के पूर्वी भाग को विकसित भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि पूर्वोदय योजना से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को विशेष लाभ होगा। इन राज्यों में व्यापक स्तर पर विकास कार्य किए जाएंगे, जिसमें बुनियादी ढांचे का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना शामिल है। बजट में बिहार के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गई हैं। बिहार में विकास परियोजनाओं के लिए 59,409 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। इसमें 26,000 करोड़ रुपये सड़क और पुल परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बिहार में बिजली संयंत्र की स्थापना के लिए 21,400 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं से राज्य में बिजली की समस्या का समाधान होगा और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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वित्त मंत्री ने बिहार में नए हवाई अड्डों, मेडिकल कॉलेजों और बाढ़ परियोजनाओं के लिए भी धनराशि आवंटित की है। इससे राज्य में बुनियादी ढांचे का विकास होगा और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी। साथ ही, नए हवाई अड्डों के निर्माण से राज्य में परिवहन सुविधाओं में सुधार होगा, जिससे व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। आंध्र प्रदेश को भी इस बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। वित्त मंत्री ने आंध्र प्रदेश की राजधानी के विकास के लिए विशेष वित्तीय सहायता के रूप में 15,000 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। इसके अलावा, पोलावरम प्रोजेक्ट के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जो राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है।

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पोलावरम प्रोजेक्ट के तहत बांध और जलाशय का निर्माण किया जाएगा, जिससे राज्य में जल संसाधनों का सही उपयोग हो सकेगा और कृषि एवं उद्योगों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं के विकास के लिए भी बजट में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। पूर्वोदय योजना का लाभ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा को भी मिलेगा। इन राज्यों में अवसंरचना विकास के साथ-साथ मानव संसाधन विकास पर भी जोर दिया जाएगा। झारखंड में खनिज संसाधनों का सही उपयोग करके राज्य के आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। पश्चिम बंगाल में उद्योगों के विकास और रोजगार सृजन पर ध्यान दिया जाएगा। ओडिशा में पर्यटन और कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए विशेष योजनाएं बनाई जाएंगी।

पूर्वोदय योजना के माध्यम से इन पांच राज्यों में चहुंमुखी विकास की उम्मीद है। यह योजना न केवल बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और आर्थिक अवसरों के सृजन पर भी जोर देगी। इससे इन राज्यों में समृद्धि और खुशहाली का मार्ग प्रशस्त होगा। इस प्रकार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की पूर्वोदय योजना देश के पूर्वी हिस्से के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। यह योजना इन पांच राज्यों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा, केंद्रीय मंत्री ने दिया लिखित जवाब…. https://chaupalkhabar.com/2024/07/22/rate-of-bihar-as-special-state/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/22/rate-of-bihar-as-special-state/#respond Mon, 22 Jul 2024 10:55:32 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4000 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लंबे समय से चली आ रही मांग एक बार फिर ठुकरा दी गई है। केंद्र सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से साफ मना कर दिया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से जानकारी दी कि अंतर-मंत्रालयी समूह …

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लंबे समय से चली आ रही मांग एक बार फिर ठुकरा दी गई है। केंद्र सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से साफ मना कर दिया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से जानकारी दी कि अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता। इस उत्तर ने राज्य सरकार और जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और बिहार के विशेष राज्य का दर्जा पाने की दिशा में एक और बाधा खड़ी कर दी है। नीतीश कुमार ने कई बार इस मुद्दे को उठाया है और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस दर्जे से बिहार को केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता और विकास के अवसर मिलेंगे, जो कि राज्य की पिछड़ी स्थिति को सुधारने में मददगार साबित होंगे। नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को विभिन्न मंचों पर उठाया है और केंद्र सरकार से बार-बार इस पर विचार करने की अपील की है। बावजूद इसके, उनकी मांग को बार-बार ठुकराया जा रहा है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की नीति के अनुसार विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए किसी भी राज्य को अतिरिक्त लाभ या सहायता देने की योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि 2012 में आईएमजी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की कोई आवश्यकता नहीं है और वर्तमान स्थिति में ऐसा कोई भी निर्णय लेना सही नहीं होगा। आईएमजी की 2012 की रिपोर्ट में बिहार की विकास आवश्यकताओं और उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का गहन विश्लेषण किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि बिहार की पिछड़ी स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करने की जरूरत है, और विशेष दर्जा देने से इस मुद्दे का समाधान नहीं होगा। रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया था कि विशेष राज्य का दर्जा देने से राज्य के विकास में एक स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि यह सिर्फ एक अस्थायी उपाय साबित हो सकता है।

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बिहार के विभिन्न हिस्सों में इस निर्णय को लेकर निराशा और आक्रोश का माहौल है। कई लोग मानते हैं कि बिहार की विशेष स्थिति को देखते हुए उसे विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष दर्जा मिलने से राज्य को आर्थिक सहायता और अन्य संसाधन प्राप्त होते, जिससे राज्य की विकास दर में तेजी आ सकती थी। राज्य सरकार और स्थानीय नेताओं ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार को बिहार की स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए और राज्य को विशेष दर्जा देने के मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर बिहार को विशेष दर्जा नहीं दिया जाता है, तो राज्य सरकार को और अधिक संघर्ष करना पड़ेगा और बिहार के विकास के लिए अन्य उपायों की तलाश करनी होगी।

 

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PM Modi ने नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का किया उद्घाटन, साथ में नीतीश कुमार भी दिखे। https://chaupalkhabar.com/2024/06/19/pm-modi-inaugurated-nalanda-university/ https://chaupalkhabar.com/2024/06/19/pm-modi-inaugurated-nalanda-university/#respond Wed, 19 Jun 2024 07:06:45 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3632 लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद, नरेंद्र मोदी आज एक बार फिर से बिहार पहुंचे हैं। वह थोड़ी देर में राजगीर स्थित नालंदा यूनिवर्सिटी के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन करेंगे और छात्रों को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेषों के बारे में भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण की पटना सर्किल हेड गौतमी …

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लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद, नरेंद्र मोदी आज एक बार फिर से बिहार पहुंचे हैं। वह थोड़ी देर में राजगीर स्थित नालंदा यूनिवर्सिटी के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन करेंगे और छात्रों को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेषों के बारे में भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण की पटना सर्किल हेड गौतमी भट्टाचार्या से जानकारी प्राप्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं दिखे, जबकि पहले जानकारी आ रही थी कि सीएम नीतीश कुमार भी उनके साथ रहेंगे।

पीएम नरेंद्र मोदी नालंदा यूनिवर्सिटी पहुंच गए हैं और वहां के पुराने धरोहरों का मुआयना कर रहे हैं। पीएम मोदी का यूनिवर्सिटी में घूमते हुए वीडियो भी सामने आया है। गया एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री डॉ प्रेम कुमार, लघु सिंचाई मंत्री संतोष सुमन, विधायक और NDA के घटक दल के पदाधिकारियों ने किया। सभी से मिलने के बाद PM मोदी हेलीकॉप्टर से नालंदा के लिए चले गए। इसके बाद गया एयरपोर्ट पर विदेश मंत्री एस जयशंकर भी पहुंचे, जहां मगध प्रमंडल के आयुक्त मयंक बरबड़े और जिला पदाधिकारी डॉक्टर त्याग राजन एस एम ने उनका स्वागत किया। इसके बाद विदेश मंत्री के साथ 16 सदस्यीय शिष्टमंडल सड़क मार्ग से नालंदा के लिए रवाना हो गया।

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नालंदा यूनिवर्सिटी पहुंचने से पहले पीएम मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट कर संदेश दिया। उन्होंने लिखा कि यह हमारे शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत खास दिन है। आज सुबह करीब 10:30 बजे राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन किया जाएगा। नालंदा का हमारे गौरवशाली अतीत से गहरा नाता है। यह विश्वविद्यालय निश्चित रूप से युवाओं की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी मदद करेगा। पीएम के आगमन के पहले सुरक्षा के दृष्टि से एसपीजी पहुंच गई है। प्रधानमंत्री का हवाई जहाज गया में लैंड करेगा, जहां से वह राजगीर पहुंचेंगे। सबसे पहले 9 बजकर 45 मिनट पर प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावेशष देखने नालंदा आएंगे। इसके बाद नालंदा यूनिवर्सिटी जाएंगे।

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नालंदा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर अभय कुमार सिंह ने बताया कि यह हमारी यूनिवर्सिटी के लिए बहुत ही यादगार क्षण होगा। यह हमारे लिए उत्सव जैसा है। PM के आगमन को लेकर राजगीर में सुरक्षा के लिहाज से हेलीकॉप्टर से रिहर्सल की गयी । इसी को ध्यान में रखते हुए SPG के अधिकारी चप्पे-चप्पे की जांच कर रहे हैं। PM के आगमन के मद्देनजर नालंदा में कई जगह रूट में बदलाव भी किया गया है। कारगिल चौक से नालंदा, सिलाव होते हुए राजगीर जाने वाले हाईवे पर सभी वाहनों का परिचालन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। राजगीर जाने वाले वाहन पावापुरी, गिरियक होते हुए राजगीर जाएंगे। नवादा से आने वाली सभी गाड़ियां गिरीयक पावापुरी होते हुए बिहारशरीफ आएंगी। गया से बिहारशरीफ की ओर आने वाली गाड़ियां सरवहदा से खुदागंज, इस्लामपुर, एकंगरसराय होते हुए बिहारशरीफ आएंगी।

छबिलापुर से आने वाली सभी गाड़ियां परवलपुर होते हुए बिहारशरीफ आएंगी। छबिलापुर से राजगीर आने वाली सभी गाड़ियां कटारीमोड़, सीआरपीएफ कैम्प, विरायतन होते हुए राजगीर जाएंगी। नवादा से राजगीर आने वाली सभी गाड़ियां झूला मोड़, अम्बेदकर चौक, पीटीजेएम कॉलेज होते हुए राजगीर बाजार आएंगी। दीपनगर बाजार से राजगीर आने वाली सभी गाड़ियां वास्तु विहार, नानंद, गिरीयक रोड होते हुए राजगीर आएंगी।

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