Congress - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Fri, 18 Oct 2024 09:26:03 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg Congress - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 बीजेपी ने की उत्तर प्रदेश में उपचुनाव की तारीख बढ़ाने की मांग, कार्तिक पूर्णिमा के स्नान पर्व को बताया कारण. https://chaupalkhabar.com/2024/10/18/bjp-ruled-uttar-pradesh/ https://chaupalkhabar.com/2024/10/18/bjp-ruled-uttar-pradesh/#respond Fri, 18 Oct 2024 09:26:03 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5260 उत्तर प्रदेश में 13 नवंबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव की तारीखों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव आयोग से विशेष मांग की है। बीजेपी ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखते हुए उपचुनाव की तारीख को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। इसके पीछे मुख्य कारण 15 नवंबर को पड़ने …

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उत्तर प्रदेश में 13 नवंबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव की तारीखों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव आयोग से विशेष मांग की है। बीजेपी ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखते हुए उपचुनाव की तारीख को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। इसके पीछे मुख्य कारण 15 नवंबर को पड़ने वाला कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर्व बताया गया है। बीजेपी के पत्र के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस पर्व पर बड़ी संख्या में लोग धार्मिक स्थलों पर स्नान और पूजा के लिए जाते हैं। पार्टी का कहना है कि मतदाता स्नान पर्व में भाग लेने के लिए 2-3 दिन पहले से ही यात्रा पर निकल जाएंगे, जिससे मतदान में बाधा उत्पन्न हो सकती है और बड़ी संख्या में मतदाता वोट नहीं दे पाएंगे।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों के उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। इसके मुताबिक, 18 नवंबर से नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी और 13 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। बीजेपी ने इसी कार्यक्रम पर आपत्ति जताते हुए मतदान की तारीख को पुनर्विचार करने की मांग की है ताकि कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भाग लेने वाले मतदाताओं को असुविधा न हो।

इन नौ विधानसभा सीटों में मैनपुरी की करहल, अलीगढ़ की खैर, बिजनौर की मीरापुर, प्रयागराज की फूलपुर, गाजियाबाद की गाजियाबाद, मिर्जापुर की मझवां, अंबेडकरनगर की कटेहरी, संभल की कुंदरकी और कानपुर की सीसामऊ सीटें शामिल हैं। ये सभी सीटें किसी न किसी कारण से खाली हुई हैं, जिन पर उपचुनाव होना है।

बीजेपी का तर्क है कि चूंकि कार्तिक पूर्णिमा का पर्व उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों में से एक है, इसलिए मतदान की तारीख में बदलाव करना आवश्यक है ताकि अधिकतम संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस मांग पर क्या निर्णय लेता है।

 

By Neelam Singh.

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हरियाणा विधानसभा चुनाव: मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी का दावा – 8 अक्टूबर को बीजेपी बनाएगी पूर्ण बहुमत की सरकार https://chaupalkhabar.com/2024/10/07/haryana-assembly-election-m/ https://chaupalkhabar.com/2024/10/07/haryana-assembly-election-m/#respond Mon, 07 Oct 2024 08:52:03 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5246 हरियाणा विधानसभा चुनावों के खत्म होने के बाद शनिवार (5 अक्टूबर) को आए एग्जिट पोल के नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। न्यूज चैनलों और सर्वे एजेंसियों के अनुमान के अनुसार, हरियाणा में कांग्रेस की वापसी की संभावना जताई जा रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए एक दशक बाद …

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हरियाणा विधानसभा चुनावों के खत्म होने के बाद शनिवार (5 अक्टूबर) को आए एग्जिट पोल के नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। न्यूज चैनलों और सर्वे एजेंसियों के अनुमान के अनुसार, हरियाणा में कांग्रेस की वापसी की संभावना जताई जा रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए एक दशक बाद मुश्किल समय आने की बात कही जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और कांग्रेस से कई बड़े नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जो राज्य की कमान संभाल सकते हैं।

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हालांकि, मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी ने इन सभी अनुमानों को खारिज करते हुए रविवार को एक बड़ा दावा किया है। सैनी ने कहा कि 8 अक्टूबर को जब चुनावी नतीजे घोषित होंगे, तो बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी नतीजों के बाद ईवीएम (EVM) में गड़बड़ी का आरोप लगाने के लिए तैयार बैठी है, लेकिन जनता इसका उचित जवाब देगी। मुख्यमंत्री सैनी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जनता को परेशान किया था और बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा था। सैनी ने कहा, “कांग्रेस के समय लोगों को गैस सिलेंडर तक के लिए चार-चार दिन इंतजार करना पड़ता था। हमारी सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया और लोगों तक राहत पहुंचाई।”

सैनी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने समाज के हर वर्ग के लिए बिना किसी भेदभाव के काम किया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हरियाणा के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई अहम योजनाएं लागू की हैं। डबल इंजन की सरकार (केंद्र और राज्य दोनों में बीजेपी की सरकार) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे राज्य में विकास की रफ्तार तेज हुई है। सैनी ने दावा किया, “हमने हर वर्ग के हित में काम किया है और लोगों के जीवन को सरल और सुगम बनाने के प्रयास किए हैं। 8 अक्टूबर को जनता इसका जवाब देगी और बीजेपी एक बार फिर से सरकार बनाएगी।”

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जहां एग्जिट पोल कांग्रेस की वापसी का संकेत दे रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री सैनी ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा कि वे रिपोर्ट्स के आधार पर कह सकते हैं कि बीजेपी ही जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा, “हमने पिछले चुनावों में भी कड़ी टक्कर दी थी और इस बार भी हम अपने कामों के बल पर जीत दर्ज करेंगे।” सैनी ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा, “जब नतीजे घोषित होंगे तो कांग्रेस नेता ईवीएम को दोष देंगे, लेकिन जनता पहले ही अपना फैसला कर चुकी है।”

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किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर साधा निशाना, मुसलमानों से वोट बैंक की राजनीति पर किया सवाल. https://chaupalkhabar.com/2024/10/07/kiren-rijiju-by-congress/ https://chaupalkhabar.com/2024/10/07/kiren-rijiju-by-congress/#respond Mon, 07 Oct 2024 07:13:30 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5240 केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी मुस्लिम वोट बैंक राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया और कांग्रेस के 60 सालों के शासन को देश की मुस्लिम आबादी की गरीबी के लिए जिम्मेदार ठहराया। आईएएनएस को दिए गए …

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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी मुस्लिम वोट बैंक राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया और कांग्रेस के 60 सालों के शासन को देश की मुस्लिम आबादी की गरीबी के लिए जिम्मेदार ठहराया। आईएएनएस को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कांग्रेस की नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा हिंदुओं को बांटने और मुसलमानों को खुश करने का काम किया है।

रिजिजू ने कांग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा मुसलमानों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के लिए चुनाव सिर्फ मुसलमानों के वोट हासिल करने का जरिया रहा है। पार्टी मानती है कि 15 प्रतिशत मुस्लिम वोट उनका आरक्षित वोट बैंक है। यह उनकी मानसिकता को दर्शाता है।”उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने कभी भी मुसलमानों के विकास की बात नहीं की, बल्कि उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। रिजिजू का मानना है कि यह राजनीति मुसलमानों के हित में नहीं है और इससे समाज के इस हिस्से का समुचित विकास नहीं हो पाया है।

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राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए रिजिजू ने कहा, “राहुल गांधी को एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों की समस्याओं की ABCD भी नहीं आती, फिर भी वे हर वक्त इन समुदायों की बात करते रहते हैं। उन्हें इस तरह से बोलना सिखाया गया है, ताकि वह वोट बैंक की राजनीति कर सकें।” रिजिजू ने कांग्रेस पर और अधिक हमलावर होते हुए कहा, “मैं मुसलमानों से सवाल पूछना चाहता हूं कि पिछले 60 सालों में आपको किसने गरीब बनाया? यह कांग्रेस ही है जिसने आपको गरीबी की ओर धकेला। कांग्रेस ने हमेशा आपको वोट बैंक के रूप में देखा, न कि एक समुदाय के रूप में जिसकी प्रगति होनी चाहिए थी।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करती है। मोदी सरकार ने मुसलमानों के लिए बैंक खाते खोले, घर बनाए और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराईं। रिजिजू का दावा है कि पीएम मोदी की नीतियों का लाभ सभी को, विशेषकर गरीब और पिछड़े तबकों को मिला है। उन्होंने कहा, “तो फिर सभी मुस्लिम वोट कांग्रेस को क्यों मिलने चाहिए?”

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कांग्रेस को चेतावनी देते हुए रिजिजू ने कहा कि इस बार भाजपा सुनिश्चित करेगी कि कांग्रेस मुसलमानों को वोट बैंक न बना सके। उन्होंने कहा, “हम इस बार साफ संदेश लेकर लोगों के पास जाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि कांग्रेस अल्पसंख्यकों का दुरुपयोग न कर सके।”

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सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच PAC के सामने पेश होंगी, हिंडनबर्ग के आरोपों पर भी हो सकते हैं सवाल https://chaupalkhabar.com/2024/10/05/sebi-chief-madhabi-puri-bu/ https://chaupalkhabar.com/2024/10/05/sebi-chief-madhabi-puri-bu/#respond Sat, 05 Oct 2024 09:57:38 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5226 सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) की प्रमुख माधबी पुरी बुच को गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं आरोपों के चलते संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने उन्हें 24 अक्टूबर को अपने समक्ष पेश होने के लिए कहा है। माधबी पुरी बुच के साथ-साथ सेबी के कुछ अन्य अधिकारियों को भी …

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सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) की प्रमुख माधबी पुरी बुच को गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं आरोपों के चलते संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने उन्हें 24 अक्टूबर को अपने समक्ष पेश होने के लिए कहा है। माधबी पुरी बुच के साथ-साथ सेबी के कुछ अन्य अधिकारियों को भी तलब किया गया है। PAC का उद्देश्य सेबी के कामकाज की समीक्षा करना है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 के अकाउंट्स का विशेष तौर पर निरीक्षण किया जाएगा।

संसद की इस समिति का नेतृत्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल कर रहे हैं। PAC सेबी के कामकाज और उसके द्वारा लिए गए फैसलों की समीक्षा कर रही है, और इसी सिलसिले में सेबी प्रमुख को तलब किया गया है। PAC हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी सवाल-जवाब कर सकती है। हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था कि माधबी पुरी बुच और उनके पति की अडानी समूह के विदेशी फंड में हिस्सेदारी है, जिससे निष्पक्ष जांच पर सवाल उठाए गए थे।

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PAC के सामने आने वाले सवालों में प्रमुख रूप से यह होगा कि सेबी ने अडानी समूह के खिलाफ लगे आरोपों की जांच किस प्रकार की। अडानी समूह के खिलाफ अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने कुछ गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें कहा गया था कि अडानी ने अपने स्टॉक्स की कीमतें बढ़ाने के लिए अनैतिक तरीके अपनाए। सेबी ने इस मामले में जांच शुरू की थी, लेकिन उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद, कांग्रेस ने भी सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच पर कई आरोप लगाए। कांग्रेस का दावा है कि माधबी पुरी बुच और उनके पति की अडानी से नजदीकियां हैं और यह सेबी की जांच को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि माधबी पुरी बुच के द्वारा प्रमोट की गई कंसल्टेंसी कंपनी, अगोरा एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड, को सेबी द्वारा लगभग 3 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो हितों के टकराव का मामला है। हालांकि, बुच ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है और इसे झूठा बताया है।

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संसद की लोक लेखा समिति द्वारा सेबी के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की जांच की जा रही है, जो अपने आप में एक अनूठी घटना है। PAC सेबी के अकाउंट्स का बारीकी से निरीक्षण कर रही है, और यह पहली बार है कि समिति ने सेबी के कामकाज पर इतनी गंभीरता से ध्यान दिया है। 29 अगस्त को हुई PAC की बैठक में सेबी के अकाउंट्स का निरीक्षण करने का फैसला लिया गया था, और इसी के बाद से सेबी प्रमुख और अधिकारियों को तलब किया गया है।

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संसदीय समितियों का गठन, राहुल गांधी रक्षा समिति के सदस्य, शशि थरूर को विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी https://chaupalkhabar.com/2024/09/28/constitution-of-parliamentary-committees/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/28/constitution-of-parliamentary-committees/#respond Sat, 28 Sep 2024 06:46:34 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5142 केंद्र सरकार ने हाल ही में 24 संसदीय समितियों का गठन किया है। ये समितियां विभिन्न विभागों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, जिससे संसद के समक्ष आने वाले विषयों पर गहन चर्चा और विचार-विमर्श हो सके। इस नई समिति संरचना में विभिन्न प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है, …

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केंद्र सरकार ने हाल ही में 24 संसदीय समितियों का गठन किया है। ये समितियां विभिन्न विभागों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, जिससे संसद के समक्ष आने वाले विषयों पर गहन चर्चा और विचार-विमर्श हो सके। इस नई समिति संरचना में विभिन्न प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें राहुल गांधी, शशि थरूर, असदुद्दीन ओवैसी, और अखिलेश यादव जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं। लोकसभा में कांग्रेस के नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को रक्षा समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। यह समिति देश की रक्षा से जुड़ी विभिन्न नीतियों और मुद्दों की समीक्षा करेगी। बीजेपी के वरिष्ठ नेता राधा मोहन सिंह को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ ही, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को विदेश मंत्रालय की संसदीय समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जबकि इस समिति का अध्यक्ष कांग्रेस सांसद शशि थरूर को नियुक्त किया गया है।

संसदीय समितियां सरकार के कामकाज की निगरानी और संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों पर सुझाव देने का कार्य करती हैं। यह समितियां संसद को सलाह और दिशा निर्देश देने के साथ-साथ विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा भी करती हैं, ताकि नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। संसदीय समितियों का गठन दो प्रकार का होता है: स्थाई समितियां और तदर्थ समितियां। स्थाई समितियों का कार्यकाल एक साल का होता है, जबकि तदर्थ समितियों का गठन विशेष मुद्दों पर विचार के लिए किया जाता है, और उनका कार्यकाल उस मुद्दे के निपटारे तक ही सीमित होता है।

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समितियों की इस नई संरचना में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन समिति का सदस्य बनाया गया है। यह समिति वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर काम करेगी। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह को शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी स्थाई समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। संचार और आईटी समिति में भी नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता अनिल बलूनी को इस समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी को कृषि मंत्रालय से संबंधित स्थाई समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

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यह भी उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को किसी भी संसदीय समिति में शामिल नहीं किया गया है। यह फैसला संसद के भीतर और बाहर विभिन्न चर्चाओं का विषय बना हुआ है, क्योंकि सोनिया गांधी लंबे समय से भारतीय राजनीति की प्रमुख हस्ती रही हैं। इन समितियों का महत्व इस बात में निहित है कि ये न केवल संसद के कार्यभार को बांटने में मदद करती हैं, बल्कि सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करके संसद को महत्वपूर्ण सुझाव देती हैं। इस प्रकार, ये समितियां संसदीय कार्यवाही के कुशल संचालन में एक अहम भूमिका निभाती हैं। इस गठन के साथ, सभी नेताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सकारात्मक योगदान देंगे और समितियों के माध्यम से देश की नीतियों में सुधार लाने में मदद करेंगे।

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राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने कांग्रेस पर साधा निशाना, राहुल गांधी पर किया पलटवार. https://chaupalkhabar.com/2024/09/24/rajya-sabha-mp-ramchandra/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/24/rajya-sabha-mp-ramchandra/#respond Tue, 24 Sep 2024 07:07:03 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5091 राज्यसभा सदस्य और भाजपा नेता रामचंद्र जांगड़ा ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर तीखा हमला किया। उन्होंने कांग्रेस को “दो जीभ वाला सांप” करार देते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता देश में और विदेश में अलग-अलग बातें करते हैं। जांगड़ा का कहना है कि राहुल गांधी जैसी “बचकानी बातें” कोई भी ज़िम्मेदार नेता नहीं …

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राज्यसभा सदस्य और भाजपा नेता रामचंद्र जांगड़ा ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर तीखा हमला किया। उन्होंने कांग्रेस को “दो जीभ वाला सांप” करार देते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता देश में और विदेश में अलग-अलग बातें करते हैं। जांगड़ा का कहना है कि राहुल गांधी जैसी “बचकानी बातें” कोई भी ज़िम्मेदार नेता नहीं कर सकता।

उन्होंने खास तौर पर राहुल गांधी के आरक्षण पर दिए गए बयानों पर सवाल उठाए। जांगड़ा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार किया था कि नरेंद्र मोदी सरकार बनने पर आरक्षण समाप्त हो जाएगा। लेकिन अब, राहुल गांधी खुद विदेश में आरक्षण समाप्त करने की बातें कर रहे हैं। इस तरह के बयानों से कांग्रेस के नेता मानसिक संतुलन खो चुके हैं, ऐसा जांगड़ा का दावा था। ये बयान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर बार-बार जनता को भ्रमित करने और देशविरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया।

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दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसके पास न तो कोई ठोस योजना है और न ही कोई विकास का रोडमैप। हुड्डा ने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस की नीतियों और गारंटियों को नकल करके अपना घोषणापत्र तैयार किया है, क्योंकि उनके पास अपने गिनवाने लायक कोई बड़ा काम नहीं है।

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उन्होंने हरियाणा में नशे की समस्या को लेकर भाजपा को कठघरे में खड़ा किया। हुड्डा का कहना था कि जब उनकी सरकार थी, तब प्रदेश में नशे की समस्या नाममात्र थी। लेकिन, भाजपा सरकार के आने के बाद “चिट्टा” जैसे खतरनाक नशे का प्रसार पूरे हरियाणा में हो चुका है। हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार ने राज्य की युवा पीढ़ी और किसानों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है।

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कुमारी शैलजा ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों को किया खारिज, कहा- “कांग्रेस ही मेरा घर है” https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/kumari-shailja-joins-bjp/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/kumari-shailja-joins-bjp/#respond Mon, 23 Sep 2024 12:32:56 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5078 हरियाणा विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी का दौर जारी है। इसी बीच, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद कुमारी शैलजा के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। हरियाणा …

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हरियाणा विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी का दौर जारी है। इसी बीच, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद कुमारी शैलजा के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कुमारी शैलजा को भाजपा में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमारी शैलजा ने स्पष्ट कर दिया कि वह भाजपा में जाने के बारे में नहीं सोच रहीं और उनकी प्राथमिकता हमेशा कांग्रेस ही रहेगी।

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कुमारी शैलजा ने “पंचायत आजतक” के एक इंटरव्यू में इन अटकलों पर अपनी चुप्पी तोड़ी और भाजपा में शामिल होने के प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के इस प्रस्ताव में कोई दिलचस्पी नहीं रखतीं। शैलजा ने कहा, “मेरा राजनीतिक जीवन भाजपा के कई नेताओं से लंबा है। मुझे किसी तरह की नसीहत देने की जरूरत नहीं है। मैंने अपना रास्ता चुना है, और कांग्रेस ही मेरा भविष्य है।” मनोहर लाल खट्टर ने अपने बयान में कहा था कि कुमारी शैलजा जैसी दलित नेता का कांग्रेस में अपमान हुआ है, और भाजपा ने हमेशा दलितों को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा, “हमने पहले भी कई नेताओं को अपने साथ मिलाया है और शैलजा जी का स्वागत करने के लिए तैयार हैं।”

इस पर कुमारी शैलजा ने कड़ा जवाब देते हुए कहा, “जो नेता आज भाजपा में बैठकर इस तरह की बातें कर रहे हैं, वे यह जान लें कि मेरा राजनीतिक जीवन उनसे कहीं ज्यादा लंबा और अनुभव से भरा है। मुझे भ्रमित करने की कोशिश न करें। मैं अपनी पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जा रही हूं।” जब शैलजा से पूछा गया कि 25 तारीख को उनके भाजपा में शामिल होने की अफवाहें किस हद तक सही हैं, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मेरी रगों में कांग्रेस का खून दौड़ता है। मैं कभी भी भाजपा में शामिल होने की सोच भी नहीं सकती। जिस तरह मेरे पिता कांग्रेस के तिरंगे में लिपटकर गए थे, उसी तरह मैं भी अपनी पार्टी का तिरंगा कभी नहीं छोड़ूंगी।”

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कुमारी शैलजा ने कांग्रेस छोड़ने की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए अपनी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा को दोहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही उनका घर है और वह अपनी पार्टी के साथ मजबूती से खड़ी रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा या अन्य कोई भी दल चाहे जितने भ्रम फैला लें, उनका कांग्रेस के प्रति समर्पण अटूट है।

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हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024, कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा और नए समीकरण https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/haryana-assembly-election-2024-a-3/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/haryana-assembly-election-2024-a-3/#respond Mon, 23 Sep 2024 11:39:52 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5073 हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 का बिगुल बज चुका है, और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं। बीजेपी की ओर से जहां नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया है, वहीं कांग्रेस ने अब तक अपने मुख्यमंत्री चेहरे का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। इस …

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हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 का बिगुल बज चुका है, और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं। बीजेपी की ओर से जहां नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया है, वहीं कांग्रेस ने अब तक अपने मुख्यमंत्री चेहरे का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। इस बीच, कांग्रेस नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सीएम उम्मीदवार को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिससे चुनावी माहौल में नई चर्चा शुरू हो गई है। रविवार को सिरसा पहुंचे भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान कहा, “हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनना तय है। मुख्यमंत्री वही होगा जिसे विधायक चुनेंगे और इस पर अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान करेगा।” उनके इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि कांग्रेस फिलहाल सामूहिक नेतृत्व के सिद्धांत पर चुनावी मैदान में उतर रही है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य में कांग्रेस की बढ़ती पकड़ पर भरोसा जताते हुए कहा, “हरियाणा की जनता ने मन बना लिया है कि इस बार राज्य में कांग्रेस की ही सरकार बनेगी।”

हुड्डा ने नारा देते हुए कहा, “न जात पर न पात पर, मोहर लगेगी हाथ पर।” इस नारे के जरिए उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में लोगों के समर्थन की बात की और दावा किया कि 36 बिरादरी के लोग कांग्रेस के साथ खड़े हैं। उनका यह बयान पार्टी को विभिन्न समुदायों का समर्थन प्राप्त होने की ओर इशारा करता है, जो कांग्रेस के लिए एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। हरियाणा में आगामी 5 अक्टूबर 2024 को विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसके नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। चुनावी समीकरणों की बात करें तो राज्य में मुख्य रूप से कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। जहां बीजेपी ने नायब सिंह सैनी को सीएम उम्मीदवार घोषित कर साफ संदेश दे दिया है कि पार्टी एक सशक्त नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ने जा रही है, वहीं कांग्रेस ने सामूहिक नेतृत्व का भरोसा जताया है।

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इस चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के अलावा आम आदमी पार्टी (AAP) भी अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है। आप के राज्य में प्रवेश ने दोनों प्रमुख दलों की चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि आप की चुनौती कांग्रेस और बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, चंद्रशेखर आजाद की आज़ाद समाज पार्टी (ASP) और दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (JJP) गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रही हैं, जिससे राज्य के चुनावी समीकरणों में और बदलाव की संभावना है। जननायक जनता पार्टी (JJP) और आजाद समाज पार्टी (ASP) के गठबंधन ने हरियाणा के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई चुनौती पेश की है। गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने से यह दल राज्य के पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित कर सकते हैं। यह गठबंधन मुख्य रूप से युवा और दलित वर्गों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

 

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जम्मू-कश्मीर के सांबा विधानसभा में सीएम मोहन यादव का कांग्रेस पर प्रहार, अनुच्छेद 370 और बंटवारे को ठहराया जिम्मेदार https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/samba-method-of-jammu-and-kashmir/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/samba-method-of-jammu-and-kashmir/#respond Mon, 23 Sep 2024 10:10:31 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5068 मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के सांबा विधानसभा सीट पर आयोजित एक जनसभा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार सुरजीत सिंह सलाथिया के समर्थन में जोरदार भाषण दिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राज्य में अनुच्छेद 370 लागू होने के लिए कांग्रेस की …

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के सांबा विधानसभा सीट पर आयोजित एक जनसभा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार सुरजीत सिंह सलाथिया के समर्थन में जोरदार भाषण दिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राज्य में अनुच्छेद 370 लागू होने के लिए कांग्रेस की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। डॉ. यादव ने कहा कि देश के विभाजन के समय कांग्रेस ने कई गलतियां कीं, जिनका खामियाजा आज तक देश को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से पंजाब के विभाजन को एक गंभीर त्रुटि बताया और कहा कि यह कांग्रेस के गलत फैसलों का परिणाम था कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू हुआ, जिसने राज्य की प्रगति में रोड़ा अटकाया।

सीएम यादव ने अपने भाषण में उन आलोचकों पर भी निशाना साधा जिन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने के बाद खून-खराबे की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा, “जो लोग कहते थे कि अनुच्छेद 370 हटेगा तो खून की नदियां बहेंगी, वे आज देख सकते हैं कि जम्मू-कश्मीर कैसे शांति और विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत नई ऊँचाइयों को छू रहा है और जम्मू-कश्मीर भी प्रगति के पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस की विफलताओं को भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कारण जम्मू-कश्मीर को वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से अलग रखा गया। कांग्रेस के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर के लोग असुरक्षा और पिछड़ेपन का शिकार रहे। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 ने जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य हिस्सों से अलग रखा, जिसके कारण वहां की जनता को आवश्यक सुविधाएं और विकास के अवसर नहीं मिल पाए।

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जनसभा के दौरान सीएम मोहन यादव ने यह विश्वास व्यक्त किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी जम्मू-कश्मीर में अपने दम पर सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से बीजेपी काम कर रही है, उसके आधार पर हम यह कह सकते हैं कि जनता विकास, शांति और सुरक्षा के लिए बीजेपी को भारी समर्थन देगी।” उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब नव ऊर्जा के साथ विकास की नई गाथा लिखी जा रही है, और जनता ने बीजेपी को अपना आशीर्वाद देने का मन बना लिया है।

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सीएम यादव ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि दोनों पार्टियां वही भाषा बोल रही हैं, जो पाकिस्तान बोल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन दलों का रजिस्ट्रेशन भारत में है या पाकिस्तान में। यादव ने जोर देकर कहा कि ऐसे दलों से जम्मू-कश्मीर को कोई उम्मीद नहीं होनी चाहिए, क्योंकि उनके एजेंडा में केवल सत्ता हासिल करना है, जबकि बीजेपी विकास, राष्ट्रवाद और शांति की बात करती है। सीएम मोहन यादव ने अपने ट्वीट के जरिए भी जनता को संबोधित किया। उन्होंने लिखा, “जम्मू-कश्मीर के घगवाल में सांबा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी सुरजीत सिंह सलाथिया के समर्थन में आयोजित ‘विजय संकल्प सभा’ को संबोधित किया। कांग्रेस के गलत निर्णयों ने राज्य को प्रगति से दूर रखा, लेकिन आज जम्मू-कश्मीर नवीन ऊँचाइयों को छूने के लिए तैयार है।”

 

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पश्चिम बंगाल कांग्रेस में बदलाव, अधीर रंजन की जगह शुभंकर सरकार बने नए अध्यक्ष. https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/west-bengal-congress/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/west-bengal-congress/#respond Mon, 23 Sep 2024 06:49:00 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5061 पश्चिम बंगाल कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है। कांग्रेस आलाकमान ने अधीर रंजन चौधरी को हटाकर शुभंकर सरकार को राज्य कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। शुभंकर सरकार, जो अभी …

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पश्चिम बंगाल कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है। कांग्रेस आलाकमान ने अधीर रंजन चौधरी को हटाकर शुभंकर सरकार को राज्य कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। शुभंकर सरकार, जो अभी तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव पद पर कार्यरत थे, अब पश्चिम बंगाल कांग्रेस की कमान संभालेंगे। हालिया लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति निराशाजनक रही। राज्य में पार्टी सिर्फ एक सीट, मालदा दक्षिण, पर जीत दर्ज कर सकी। अधीर रंजन चौधरी, जो बंगाल कांग्रेस के प्रमुख थे, खुद अपनी बहरामपुर सीट से हार गए। कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अधीर रंजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस प्रदर्शन के बाद से ही उनके पद से हटने की अटकलें तेज हो गई थीं।

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अधीर रंजन चौधरी का ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के साथ संबंध तनावपूर्ण रहा। वह ममता बनर्जी के कट्टर आलोचक माने जाते हैं, और इसी कारण टीएमसी के साथ कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो सका। माना जाता है कि उनके इस रुख के कारण राज्य में कांग्रेस को टीएमसी के साथ हाथ मिलाने का मौका नहीं मिला, जो पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर भारी पड़ा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी चुनाव के दौरान अधीर रंजन की इस नकारात्मक भूमिका पर उन्हें सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई थी। शुभंकर सरकार को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। शुभंकर का कांग्रेस में लंबा अनुभव रहा है, और उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। इस साल हुए लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया था और साथ ही अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, और मिजोरम का प्रभारी भी नियुक्त किया गया था। इससे पहले 2013 से 2018 तक वह कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और ओडिशा राज्य के प्रभारी के रूप में कार्यरत थे। उनकी संगठनात्मक क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही उन्हें अब पश्चिम बंगाल कांग्रेस की जिम्मेदारी दी गई है।

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शुभंकर सरकार के नेतृत्व में कांग्रेस को उम्मीद है कि वह पश्चिम बंगाल में पार्टी को एक नई दिशा दे सकेंगे और पार्टी के गिरते ग्राफ को रोकने के लिए नए सिरे से रणनीति बना सकेंगे। उनकी नियुक्ति को कांग्रेस की ओर से राज्य में संगठन को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब पार्टी को आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी स्थिति सुधारनी है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को देखते हुए शुभंकर सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं। राज्य में तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला होने के कारण कांग्रेस की जमीन खिसकती जा रही है। ऐसे में शुभंकर सरकार को न केवल पार्टी के आंतरिक ढांचे को मजबूत करना होगा, बल्कि कार्यकर्ताओं में जोश और विश्वास भी भरना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि वह टीएमसी और ममता बनर्जी के साथ संबंधों को किस तरह से संभालते हैं, क्योंकि राज्य की राजनीति में टीएमसी का वर्चस्व है।

इस बड़े फेरबदल से कांग्रेस आलाकमान ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी पश्चिम बंगाल में फिर से खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश करेगी। शुभंकर सरकार की नियुक्ति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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