GyanvapiCase - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Mon, 26 Feb 2024 08:00:08 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg GyanvapiCase - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष को लगा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका….. https://chaupalkhabar.com/2024/02/26/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d/ https://chaupalkhabar.com/2024/02/26/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d/#respond Mon, 26 Feb 2024 08:00:08 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=2396 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है। अदालत ने व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष के पूजा करने के अधिकार को बरकरार रखने का फ़ैसला लिया है। यह फैसला वाराणसी जिला अदालत के आदेश के बाद हुआ, जिसे मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में चुनौती दी …

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है। अदालत ने व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष के पूजा करने के अधिकार को बरकरार रखने का फ़ैसला लिया है। यह फैसला वाराणसी जिला अदालत के आदेश के बाद हुआ, जिसे मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज करते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार जारी रखने का आदेश दिया। इससे पहले वाराणसी जिला अदालत ने भी हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर गया था। हालांकि, यहां से भी मुस्लिम पक्ष को निराशा ही हाथ लगी और हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष की पूजा का अधिकार सुरक्षित रखा। ज्ञानव्यापी मस्जिद के सर्वे के बाद तहखाना खोल दिया गया था। इस मामले में शैलेंद्र कुमार पाठक ने वाद दायर किया था, जिसके बाद 31 जनवरी को जिला जज के आदेश पर हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार दे दिया गया था। जिला जज के आदेश के बाद काशी विश्वनाथ ट्रस्ट ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी थी।

31 जनवरी को जिला जज के आदेश पर हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा करने का अधिकार दिया गया था

ज्ञानवापी तहखाने को लेकर विवाद की मूल कहानी यह है कि पूजा शुरू होने से पहले हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि नवंबर 1993 से पहले व्यास तहखाने में पूजा-पाठ को उस वक्त की प्रदेश सरकार ने रुकवा दिया था, जिसको शुरू करने का पुनः अधिकार दिया जाए। मुस्लिम पक्ष ने प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट का हवाला देते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को अस्वीकार करते हुए हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में पूजा-पाठ का अधिकार दे दिया। मुस्लिम पक्ष का दावा था कि डीएम को वाराणसी कोर्ट ने रिसीवर नियुक्त किया है, जो पहले से काशी विश्वनाथ मंदिर के सदस्य हैं, इसलिए उनको नियुक्त नहीं किया जा सकता है। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा था कि दस्तावेज में किसी तहखाने का जिक्र नहीं है और व्यासजी ने पहले ही पूजा का अधिकार ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दिया था, इसलिए उन्हें अर्जी दाखिल करने का अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट ने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अंजुमन इंतजामिया कमेटी की तरफ से वाराणसी कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पूजा पर स्टे लगाने की बात कही गई थी। मुस्लिम पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प धरेगा। ज्ञानवापी मामले में हुए इस फैसले से सामाजिक विवाद की आग और बढ़ गई है। यह फैसला न केवल समाज में द्वंद्व उत्पन्न करता है, बल्कि धार्मिक सहिष्णुता और संविधानिक मूल्यों के संबंध में भी सवाल उठाता है। इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है, जिससे यह विवाद और गहरा हो सकता है।

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ज्ञानवापी के उस तहखाने की कहानी, जहां 30 साल बाद की गयी पूजा, प्राचीन मूर्तियों के सबूत से पता लगी, पूजा की पुरानी परंपरा https://chaupalkhabar.com/2024/02/02/the-story-of-the-basement-of-gyanvapi-where-puja-was-performed-after-30-years-evidence-of-ancient-idols-revealed-the-old-tradition-of-puja/ https://chaupalkhabar.com/2024/02/02/the-story-of-the-basement-of-gyanvapi-where-puja-was-performed-after-30-years-evidence-of-ancient-idols-revealed-the-old-tradition-of-puja/#respond Fri, 02 Feb 2024 07:44:01 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=2282 वाराणसी के कोर्ट ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी के तहखाने में पूजा का अधिकार प्रदान किया गया है। जिसके बाद 31 सालों से बरसो पुरानी पूजा के अधिकार को लेकर हुए विवाद को सुलझाया गया है। यह विवाद वाराणसी जिला अदालत में चल रहा हैं, जिसमें व्यासजी …

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वाराणसी के कोर्ट ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी के तहखाने में पूजा का अधिकार प्रदान किया गया है। जिसके बाद 31 सालों से बरसो पुरानी पूजा के अधिकार को लेकर हुए विवाद को सुलझाया गया है। यह विवाद वाराणसी जिला अदालत में चल रहा हैं, जिसमें व्यासजी के तहखाने में नवंबर 1993 से पहले हुई पूजा-पाठ को रुकवा देने का दावा किया जा रहा है। प्रमुख वादी शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास का कहना है कि उनके पूर्वजों ने इस स्थल में सद्गुण से पूजा की थी, और उन्हें इस अधिकार को पुनः स्थापित करने का अधिकार होना चाहिए।

कोर्ट ने इस मामले में ज्ञानवापी के तहखाने में पूजा का अधिकार देने का फैसला किया है, जिसके बाद रात के 2 बजे, कड़ी सुरक्षा के बावजूद यहां पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। इससे लगभग 30 सालों के बाद ज्ञानवापी के तहखाने में आरती की आवाज गूंजी। वाराणसी जिला अदालत ने पूजा पर लगी रोक हटाते हुए जिलाधिकारी को 7 दिनों के अंदर पूजा शुरू कराने का आदेश दिया था। इससे पहले यहां पर 1993 से पूजा पाठ बंद थी, लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने त्वरित कोर्ट के आदेश को मानते हुए  रात भर बैठके की । जिसके बाद में काशी विश्वनाथ ट्रस्ट बोर्ड की तरफ से पूजा-अर्चना की गई, जिससे स्थिति में सुधार हुआ।

 

इसके अलावा, वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद तीन दशक से भी ज्यादा समय से अदालत में लंबित है। ज्ञानवापी मस्जिद का इतिहास 350 साल से भी ज्यादा पुराना है। इसमें हिंदू पक्ष का दावा है कि वहां पहले से ही हिंदू मंदिर था, जिसे मुग़ल शासक औरंगजेब ने मस्जिद में बदल दिया था। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यहां कभी मंदिर नहीं था और मस्जिद हमेशा से ही यहां बनी हुई थी।

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इस मुद्दे पर अगस्त 2021 में पांच महिलाएं वाराणसी के सिविल जज के सामने याचिका दायर करने गई थीं। उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद के बगल में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना पूजा और दर्शन करने की अनुमति देने की मांग की थी। जज ने मस्जिद परिसर का सर्वे करने का आदेश दिया था, जिसके बाद हिंदू पक्ष ने यहां शिवलिंग मिलने का दावा किया। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां से एक न्यायाधीश को ट्रांसफर करके याचिका पर नियमित सुनवाई करने का निर्देश दिया गया।

 

Gyanvapi case: Varanasi court allows Hindu side to pray in mosque basement

 

जिला जज ने यह भी कहा कि विवाद पोषणीय नहीं है, लेकिन सुनवाई योग्य मानी जाएगी। मई 2023 में पांच याचिकाकर्ता  महिलाओं में से चार ने एक प्रार्थना पत्र दायर किया, जिसमें उन्होंने मांग की कि ज्ञानवापी मस्जिद के विवादित हिस्से को छोड़कर पूरे परिसर का ASI से सर्वे कराया जाए। इस पर जिला जज ने ASI सर्वे कराने का आदेश दिया।

 

The Statesman

ASI के सर्वे में मिली मूर्तियां और मंदिर के सूबत के आधार पर कहा गया कि इस स्थान पर पहले हिंदू मंदिर था, जिसे मुग़ल शासकों ने मस्जिद में बदला गया था। हिंदू पक्ष ने यहां के ढांचे में प्राचीन मंदिर के सबूत के रूप में पिलर्स और प्लास्टर का उपयोग करके मस्जिद को मूर्तियों के साथ सुसज्जित करने का आरोप लगाया है। विवादित स्थल को सील करने की मांग को सुनते हुए सेशन कोर्ट ने इसे सील करने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने केस जिला जज के पास भेजा और न्यायिक सुनवाई करने का आदेश दिया। जिला जज ने अपने फैसले में यह कहा कि सभी पक्षों को सर्वे रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया जाएगा। इसके बाद हिंदू पक्ष ने रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया कि यहां पर पहले हिंदू मंदिर था और मुस्लिम पक्ष द्वारा उसे मस्जिद में बदला गया।

 

By Neelam singh.

 

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