Highcourt - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Fri, 28 Jun 2024 07:08:20 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg Highcourt - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत, रांची जमीन घोटाला मामले में थे आरोपी https://chaupalkhabar.com/2024/06/28/mant-soren-ko-jharkhand-haiko/ https://chaupalkhabar.com/2024/06/28/mant-soren-ko-jharkhand-haiko/#respond Fri, 28 Jun 2024 07:08:20 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3770 झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन को रांची जमीन घोटाले के मामले में हाईकोर्ट द्वारा जमानत मिलने के बाद विवाद का नया मोड़ आ गया है। इस फैसले के बाद, सोरेन बेल बॉन्ड भरने के बाद जेल से बाहर आ सकेंगे। यह मामला अनधिकृत रूप से 8.86 एकड़ जमीन कब्जे करने के …

The post हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत, रांची जमीन घोटाला मामले में थे आरोपी first appeared on chaupalkhabar.com.

]]>
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन को रांची जमीन घोटाले के मामले में हाईकोर्ट द्वारा जमानत मिलने के बाद विवाद का नया मोड़ आ गया है। इस फैसले के बाद, सोरेन बेल बॉन्ड भरने के बाद जेल से बाहर आ सकेंगे। यह मामला अनधिकृत रूप से 8.86 एकड़ जमीन कब्जे करने के आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसे पीएमएलए एक्ट के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दर्ज किया गया है। जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान, ईडी की ओर से पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता एसवी राजू ने अदालत में बयान दिया कि हेमंत सोरेन ने अवैध तरीके से बड़गाईं अंचल में जमीन पर कब्जा किया है। यह अनुमान ईडी के द्वारा पीएमएलए एक्ट के तहत विधिक मान्यताओं के उल्लंघन को दर्शाता है।

ये खबर भी पढ़ें : संसद में NEET मामले पर विपक्ष का हंगामा, लोकसभा ने 12 बजे तक कार्यवाही रोकी

इस मुद्दे पर सोरेन की ओर से दी गई बयान में, सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि यह मामला केवल राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और इसे मनी लॉन्ड्रिंग के तर्क से देखना गलत होगा। उन्होंने इसे केंद्र सरकार द्वारा ईडी के दुरुपयोग के तरीके से किया गया दावा बताया। अदालत ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और 13 जून को फैसला सुरक्षित रखा था। इस फैसले के बाद, सोरेन को जमानत मिलने का समाचार राजनीतिक दायरे में गहरी चर्चाओं का कारण बना। उन्होंने जमानत के लिए लंबे समय से प्रयास किए थे, जो अब सफलतापूर्वक समाप्त हो गए हैं।

ये खबर भी पढ़ें : बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी को एम्स से मिली छुट्टी, बुधवार देर रात हुए थे भर्ती

झारखंड की राजनीतिक दीवारों में इस मामले की महत्वपूर्ण स्थिति बनी हुई है, जिसमें सोरेन और ईडी के बीच की जंग व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों के संघर्ष को दर्शाती है। विवादित जमीन कब्जे के बारे में तकनीकी और कानूनी पहलू निपटाने के लिए अदालती प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी।

The post हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत, रांची जमीन घोटाला मामले में थे आरोपी first appeared on chaupalkhabar.com.

]]>
https://chaupalkhabar.com/2024/06/28/mant-soren-ko-jharkhand-haiko/feed/ 0
सुप्रीम कोर्ट और HC के 17 पूर्व जजों ने CJI चंद्रचूड़ को लिखी चिट्ठी, निजी लाभ से प्रेरित तत्व न्यायिक प्रणाली में जनता का विश्वास खत्म कर रहे’ https://chaupalkhabar.com/2024/04/15/supreme-court-and-hc-of-17-east/ https://chaupalkhabar.com/2024/04/15/supreme-court-and-hc-of-17-east/#respond Mon, 15 Apr 2024 07:25:57 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=2931 21 पूर्व जजों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चिट्ठी लिखी है, जिसमें न्यायपालिका पर अनुचित दबाव की बात की गई है। इस चिट्ठी में उन्होंने न्यायपालिका की गरिमा, निष्पक्षता और स्वायत्ता को सुरक्षित रखने की अपील की है। पूर्व जजों ने इस चिट्ठी में बताया कि न्यायपालिका को राजनीतिक हितों और …

The post सुप्रीम कोर्ट और HC के 17 पूर्व जजों ने CJI चंद्रचूड़ को लिखी चिट्ठी, निजी लाभ से प्रेरित तत्व न्यायिक प्रणाली में जनता का विश्वास खत्म कर रहे’ first appeared on chaupalkhabar.com.

]]>
21 पूर्व जजों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चिट्ठी लिखी है, जिसमें न्यायपालिका पर अनुचित दबाव की बात की गई है। इस चिट्ठी में उन्होंने न्यायपालिका की गरिमा, निष्पक्षता और स्वायत्ता को सुरक्षित रखने की अपील की है।

पूर्व जजों ने इस चिट्ठी में बताया कि न्यायपालिका को राजनीतिक हितों और निजी लाभ से प्रेरित तत्वों से बचाने की जरूरत है। उनका मानना है कि ऐसी गतिविधियां न्यायपालिका की गरिमा को क्षति पहुंचाती हैं और जजों की निष्पक्षता पर सवाल उठाती हैं। चिट्ठी में इस गतिविधि के पीछे लगे राजनीतिक हितों और निजी लाभ की भावना को भी बताया गया है। इस तरह की गतिविधियां न्यायपालिका की छवि को धूमिल करती हैं और अदालती फैसलों पर प्रभाव डालने की कोशिश करती हैं।

चिट्ठी में इस गतिविधि के खिलाफ आवाज उठाने वाले पूर्व जजों ने न्यायपालिका को अपने लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों के लिए स्तंभ मानने की अपील की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता को सुरक्षित रखने की मांग की है। चिट्ठी में जजों ने इस गतिविधि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई में न्यायपालिका से आग्रह किया है कि वे इस तरह के दबावों को खत्म करें। इसके साथ ही उन्होंने न्यायपालिका के साथ मिलकर इसकी गरिमा और निष्पक्षता को बचाए रखने के लिए तैयार होने का भी विवेक जताया है।

इस गतिविधि के पीछे लगे राजनीतिक हितों और निजी लाभ की भावना को भी बताया गया है। इस तरह की गतिविधियां न्यायपालिका की छवि को धूमिल करती हैं और अदालती फैसलों पर प्रभाव डालने की कोशिश करती हैं। चिट्ठी में जजों ने इस गतिविधि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई में न्यायपालिका से आग्रह किया है कि वे इस तरह के दबावों को खत्म करें। इसके साथ ही उन्होंने न्यायपालिका के साथ मिलकर इसकी गरिमा और निष्पक्षता को बचाए रखने के लिए तैयार होने का भी विवेक जताया है।

ये खबर भी पढ़ें: अरविंद केजरीवाल ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख़, याचिका पर 15 अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती.

चिट्ठी के अनुसार, न्यायपालिका की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया और न्यायिक प्रक्रिया के लिए खतरनाक है। इसके अलावा, वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, पिंकी आनंद, मनन कुमार मिश्रा, आदिश अग्रवाल, चेतन मित्तल, हितेश जैन, उज्ज्वला पवार, उदय होल्ला, और स्वरूपमा चतुर्वेदी जैसे विशेषज्ञ भी इस चिट्ठी को समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं।

ये भी देखें:

The post सुप्रीम कोर्ट और HC के 17 पूर्व जजों ने CJI चंद्रचूड़ को लिखी चिट्ठी, निजी लाभ से प्रेरित तत्व न्यायिक प्रणाली में जनता का विश्वास खत्म कर रहे’ first appeared on chaupalkhabar.com.

]]>
https://chaupalkhabar.com/2024/04/15/supreme-court-and-hc-of-17-east/feed/ 0
ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका, शाहजहां शेख की कस्टडी पर पश्चिम बंगाल और केंद्र आमने-सामने….. https://chaupalkhabar.com/2024/03/06/%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0/ https://chaupalkhabar.com/2024/03/06/%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0/#respond Wed, 06 Mar 2024 08:47:55 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=2464 संदेशखाली मामले और शेख शाहजहां की कस्टडी पर पश्चिम बंगाल और केंद्र आमने-सामने आ गए है। ममता सरकार ने संदेशखाली और शेख शाहजहां के मामले पर सीबीआई जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सर्वोच्च न्यायालय ने ममता सरकार की तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है। TMC की याचिका पर शीर्ष कोर्ट …

The post ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका, शाहजहां शेख की कस्टडी पर पश्चिम बंगाल और केंद्र आमने-सामने….. first appeared on chaupalkhabar.com.

]]>
संदेशखाली मामले और शेख शाहजहां की कस्टडी पर पश्चिम बंगाल और केंद्र आमने-सामने आ गए है। ममता सरकार ने संदेशखाली और शेख शाहजहां के मामले पर सीबीआई जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सर्वोच्च न्यायालय ने ममता सरकार की तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है। TMC की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सुनवाई कब करनी होगी यह CJI तय करेंगे।

पांच जनवरी को पश्चिम बंगाल में एक राशन घोटाले के मामले में सीबीआई की टीम ने अकुंजीपारा में शेख शाहजहां के आवास पर छापेमारी की थी। इसके बाद, स्थानीय लोगों ने अधिकारियों पर हमला किया और कई अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को जख्मी कर दिया। इस घटना के बाद 55 दिनों के बाद पुलिस ने शेख को गिरफ्तार किया। ममता सरकार ने ईडी टीम पर हमले के बाद सीबीआई को इस मामले की जांच के लिए सौंपने का विरोध किया। उनके अनुसार, एसआईटी पहले से ही इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है, इसलिए सीबीआई को इसे सौंपने की आवश्यकता नहीं है। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया जहां उन्हें तुरंत सुनवाई करने की याचिका दी गई। इसके अलावा, कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अलग मामले में भी ममता सरकार को झटका दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है कि ईडी टीम पर हमले की जांच को सीबीआई को सौंपा जाए। ममता सरकार ने इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है, जहां उन्होंने जल्दी सुनवाई की मांग की है।

TMC की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने कहा कि सुनवाई कब करनी होगी यह CJI तय करेंगे।

यह संघर्ष पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्तिथि को और भी गहरा बना देगा। ममता सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि वह सरकारी इंस्टीट्यूशंस को सीबीआई के पास सौंपने के लिए तैयार नहीं है। वह सीबीआई की न्यायिक जांच की बजाय एसआईटी को भरोसा देना चाहती है। इस मामले में जनता की भावनाओं को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। सीबीआई की जांच में जनता को अधिक विश्वास होता है, क्योंकि यह एक निष्पक्ष जांच को सुनिश्चित करता है। पार्टी प्रतिद्वंद्वियों के दावों में भी विश्वास का संदेश जाता है।

सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्रवाई से यह साफ है कि यह मामला राजनीतिक खेल का हिस्सा बन चुका है। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जल्दी सुनवाई की मांग करना इसका सबूत है। यहां तक कि जनता भी इस मामले में अधिक निष्पक्षता और न्याय की मांग कर रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई घटना उत्पन्न हो गई है, जो सीबीआई जांच के मामले में उच्चतम न्यायालय के दरवाजे तक पहुंच गई है। यह संघर्ष न केवल राजनीतिक जमीन पर है, बल्कि जनता के भरोसे और न्याय की मांग पर भी नजर रखता है। अब यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट कैसे इस मामले को सुलझाता है और क्या इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में कोई नई मोड़ आता है।

The post ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका, शाहजहां शेख की कस्टडी पर पश्चिम बंगाल और केंद्र आमने-सामने….. first appeared on chaupalkhabar.com.

]]>
https://chaupalkhabar.com/2024/03/06/%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0/feed/ 0
ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष को लगा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका….. https://chaupalkhabar.com/2024/02/26/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d/ https://chaupalkhabar.com/2024/02/26/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d/#respond Mon, 26 Feb 2024 08:00:08 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=2396 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है। अदालत ने व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष के पूजा करने के अधिकार को बरकरार रखने का फ़ैसला लिया है। यह फैसला वाराणसी जिला अदालत के आदेश के बाद हुआ, जिसे मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में चुनौती दी …

The post ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष को लगा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका….. first appeared on chaupalkhabar.com.

]]>
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है। अदालत ने व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष के पूजा करने के अधिकार को बरकरार रखने का फ़ैसला लिया है। यह फैसला वाराणसी जिला अदालत के आदेश के बाद हुआ, जिसे मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज करते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार जारी रखने का आदेश दिया। इससे पहले वाराणसी जिला अदालत ने भी हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर गया था। हालांकि, यहां से भी मुस्लिम पक्ष को निराशा ही हाथ लगी और हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में हिंदू पक्ष की पूजा का अधिकार सुरक्षित रखा। ज्ञानव्यापी मस्जिद के सर्वे के बाद तहखाना खोल दिया गया था। इस मामले में शैलेंद्र कुमार पाठक ने वाद दायर किया था, जिसके बाद 31 जनवरी को जिला जज के आदेश पर हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार दे दिया गया था। जिला जज के आदेश के बाद काशी विश्वनाथ ट्रस्ट ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी थी।

31 जनवरी को जिला जज के आदेश पर हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा करने का अधिकार दिया गया था

ज्ञानवापी तहखाने को लेकर विवाद की मूल कहानी यह है कि पूजा शुरू होने से पहले हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि नवंबर 1993 से पहले व्यास तहखाने में पूजा-पाठ को उस वक्त की प्रदेश सरकार ने रुकवा दिया था, जिसको शुरू करने का पुनः अधिकार दिया जाए। मुस्लिम पक्ष ने प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट का हवाला देते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को अस्वीकार करते हुए हिंदू पक्ष को ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में पूजा-पाठ का अधिकार दे दिया। मुस्लिम पक्ष का दावा था कि डीएम को वाराणसी कोर्ट ने रिसीवर नियुक्त किया है, जो पहले से काशी विश्वनाथ मंदिर के सदस्य हैं, इसलिए उनको नियुक्त नहीं किया जा सकता है। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा था कि दस्तावेज में किसी तहखाने का जिक्र नहीं है और व्यासजी ने पहले ही पूजा का अधिकार ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दिया था, इसलिए उन्हें अर्जी दाखिल करने का अधिकार नहीं है।

हाईकोर्ट ने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अंजुमन इंतजामिया कमेटी की तरफ से वाराणसी कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पूजा पर स्टे लगाने की बात कही गई थी। मुस्लिम पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प धरेगा। ज्ञानवापी मामले में हुए इस फैसले से सामाजिक विवाद की आग और बढ़ गई है। यह फैसला न केवल समाज में द्वंद्व उत्पन्न करता है, बल्कि धार्मिक सहिष्णुता और संविधानिक मूल्यों के संबंध में भी सवाल उठाता है। इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है, जिससे यह विवाद और गहरा हो सकता है।

The post ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष को लगा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका….. first appeared on chaupalkhabar.com.

]]>
https://chaupalkhabar.com/2024/02/26/%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a5%8d/feed/ 0