Indian National Congress - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Tue, 12 Dec 2023 10:08:51 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg Indian National Congress - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य धीरज प्रसाद साहू के यहां से करोड़ों रुपयों की बरामदगी https://chaupalkhabar.com/2023/12/12/recovery-of-crores-of-rupees-from-the-house-of-congress-rajya-sabha-member-from-jharkhand-dheeraj-prasad-sahu/ https://chaupalkhabar.com/2023/12/12/recovery-of-crores-of-rupees-from-the-house-of-congress-rajya-sabha-member-from-jharkhand-dheeraj-prasad-sahu/#respond Tue, 12 Dec 2023 10:08:51 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1965 कांग्रेस के झारखंड से राज्यसभा सदस्य धीरज प्रसाद साहू के खिलाफ बड़ी चर्चाएं हो रही हैं। उनके यहां से करोड़ों रुपयों की बरामदगी और पार्टी में विवादों का आरोप है। धीरज प्रसाद साहू के खिलाफ अनियमितता के आरोपों की चर्चा गहराई में बढ़ रही है। झारखंड से इस प्रमुख नेता के पास से हो रही …

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कांग्रेस के झारखंड से राज्यसभा सदस्य धीरज प्रसाद साहू के खिलाफ बड़ी चर्चाएं हो रही हैं। उनके यहां से करोड़ों रुपयों की बरामदगी और पार्टी में विवादों का आरोप है। धीरज प्रसाद साहू के खिलाफ अनियमितता के आरोपों की चर्चा गहराई में बढ़ रही है। झारखंड से इस प्रमुख नेता के पास से हो रही बड़ी नकदी बरामदगी के बाद, पार्टीउनसे हिसाब मांगने की मांग कर रही है। कुछ लोगों ने उनके व्यापारिक संस्थानों से आया धन पर सवाल उठाया है, जबकि साहू और उनके समर्थक इसे विपक्षी राजनीतिक हमले का आरोप बता रहे हैं।

धीरज प्रसाद साहू का राजनीतिक सफर 2009 में आरंभ हुआ था, जब उन्हें दक्षिण भारतीय नेता के रूप में उच्च स्थान पर देखा गया था। उन्होंने राज्यसभा उपचुनाव में सफलता हासिल की थी और इसके बाद वे पार्टी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे थे। लेकिन हाल ही में उनके व्यापारिक संस्थानों से करोड़ों की बरामदगी के बाद विवादों की धारा चल पड़ी है। प्रतिकूल परिस्थितियों में, उनका राजनीतिक करियर कठिनाई में है, जबकि कुछ लोग उन्हें किए गए आरोपों के पीछे छवि को धूमिला करने का आरोप लगा रहे हैं।

साहू परिवार के व्यवसायिक संस्थानों से हो रहे करोड़ों रुपयों के बरामद होने के बाद, उन्हें पार्टी द्वारा जांच की मांग का सामना करना पड़ा है। इस मामले में एक पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने साहू परिवार के व्यापारिक संस्थानों से करोड़ों की बरामदगी पर उन्हें पार्टी द्वारा हिसाब मांगने को अनुचित बताया है। उनका कहना है कि यह परिवार व्यवसाय में सक्रिय है और इस तरह की बरामदगी इसके हिस्से हैं, जो अनुचित रूप से पर्दे में लाना गलत है।

हालांकि, इस घटना के पीछे का कारण और बरामदगी के विवादित पक्षों को लेकर विपक्षी दलों की नजरें भी बढ़ी हैं। साहू परिवार के सदस्यों के मुताबिक, उनका व्यवसाय सालों से चल रहा है, और इसे अवैध मानना गलत है। उन्हें भाजपा द्वारा फंसाने का आरोप भी लगाया जा रहा है। साहू परिवार के पूर्व सांसद शिवप्रसाद साहू के समय से भी यहां हजारों करोड़ों का लेनदेन होता था, जिससे व्यापारिक संस्थानों से बरामदगी का आरोप लगाना गलत हो सकता है।

 

कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडलों में इस घटना को लेकर हलचल बढ़ रही है। उनके राजनीतिक करियर पर इसका असर दिख रहा है, जबकि वो चुप्पी साधे हैं।

धीरज प्रसाद साहू के खिलाफ आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक द्वेष का परिणाम बताया है। प्रमुख नेता फुरकान अंसारी ने उनके परिवार के व्यवसायिक कार्यों को समर्थन दिया है और इसे बिना सबूतों के अवैध घोषित करने को नापसंद किया है।
कुछ नेता उनके खिलाफ चल रहे विवादों को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि साहू और उनके समर्थक इसे विपक्षी दलों और राजनीतिक द्वेष का परिणाम बता रहे हैं।

कुछ व्यक्तिगत राजनीतिक द्वेषों और आरोपों के बावजूद, साहू के समर्थक उन्हें निष्कलंक राजनीतिक करियर और पार्टी में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान की दृष्टि से देखना चाहते हैं।

अभी तक, साहू ने इस विवाद में चुप्पी साधी है, जबकि कुछ प्रमुख नेता उनके खिलाफ चल रहे आरोपों को स्पष्टीकरण के लिए पार्टी से मांग रहे हैं। यह विवाद साहू के राजनीतिक करियर को नये मोड़ पर ले जा सकता है, जहां उनकी छवि और पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

 

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ANIMAL फिल्म पर भड़का सांसद रंजीत रंजन का ग़ुस्सा कहा, ऐसी फ़िल्में समाज के लिए है घातक https://chaupalkhabar.com/2023/12/08/mp-ranjeet-ranjan-said-animal-that-these-films-are-having-a-bad-impact-on-the-society/ https://chaupalkhabar.com/2023/12/08/mp-ranjeet-ranjan-said-animal-that-these-films-are-having-a-bad-impact-on-the-society/#respond Fri, 08 Dec 2023 10:44:08 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1940 फिल्मों की दुनिया हमेशा से हमारे जीवन का हिस्सा रही है। वे हमें मनोरंजन के साथ-साथ जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं। लेकिन हाल के कुछ फिल्मों के संदेश और प्रस्तुतीकरण ने समाज में विवाद उत्पन्न किया है। ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों में दिखाई गई हिंसा और नकारात्मकता के मुद्दे उठ रहे हैं और सांसद …

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फिल्मों की दुनिया हमेशा से हमारे जीवन का हिस्सा रही है। वे हमें मनोरंजन के साथ-साथ जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं। लेकिन हाल के कुछ फिल्मों के संदेश और प्रस्तुतीकरण ने समाज में विवाद उत्पन्न किया है। ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों में दिखाई गई हिंसा और नकारात्मकता के मुद्दे उठ रहे हैं और सांसद रंजीत रंजन ने इस बारे में समाज की भावनाओं को उजागर किया है।

 

फिल्मों में धार्मिक भावनाओं को भी आहत किया जा रहा है। ‘एनिमल’ जैसी फिल्में धार्मिक इतिहास और भावनाओं को उचाल कर रही हैं। इसमें इतिहास से जुड़े गानों को गैंगवार के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।

 

‘’एनिमल’ फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही हो, लेकिन इसे लेकर जहां एक तरफ़ लोग रनबीर कपूर और बाँबी देओल आदि की प्रशंसा कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर लोग फ़िल्म में दिखाई गई हिंसा की आलोचना भी कर रहे हैं और लोगों द्वारा नकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग बेबाकी से इस फिल्म में दिखाई गई हिंसा के प्रस्तुतीकरण की आलोचना कर रहे थे, अब इस फिल्म के विरोध के सुर संसद में सुनाई दे रहे हैं। गुरुवार को कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन ने ‘सिनेमा का युवाओं पर पड़ता नकारात्मक प्रभाव’ विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘सिनेमा समाज का आईना होता है। हम लोग सिनेमा देखकर बड़े हुए हैं और सिनेमा हम सभी को प्रभावित करता है, खासकर युवाओं की जिंदगी को वह प्रभावित करता है।

 

आजकल की फिल्मों में महिलाओं के प्रति असम्मान को फिल्मों के जरिए सही ठहराया जा रहा है’। रंजीत रंजन ने कहा, ‘आजकल कुछ अलग तरह की फिल्में आ रही हैं। फिल्मों का आदर्श प्रभाव युवाओं पर भी बड़ा होता है। रंजीत रंजन का कहना है कि फिल्मों में दिखाई गई हिंसा और असम्मान अब युवाओं के आदर्श माने जा रहे हैं। ‘कबीर सिंह’ और ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों में हीरो को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे उन्हें नकारात्मक आदर्श माना जा रहा है। इससे समाज में नकारात्मकता का संदेश जा रहा है जो अस्वीकार्य है।

रंजीत रंजन ने कहा, ‘आजकल कुछ अलग तरह की फिल्में आ रही हैं। नकारात्मक किरदारों को बच्चे आदर्श मानने लगे कबीर सिंह हो या पुष्पा हो… आजकल एक एनिमल पिक्चर चल रही है। मैं आपको बता नहीं सकती… मेरी बेटी के साथ बहुत सारी बच्चियां थीं, जो कॉलेज में पढ़ती हैं। …आधी पिक्चर में उठकर रोते हुए चली गईं। इतनी हिंसा उसमें है। महिलाओं के प्रति असम्मान को फिल्मों के जरिए सही ठहराया जा रहा है।

 

कबीर सिंह और एनिमल में जिस तरह हीरो अपनी पत्नी के साथ सलूक करता है, लोग, समाज और फिल्में उसे सही ठहराते दिखाई दे रहे हैं। ये बहुत ही सोचने वाला विषय है। बहुत सारे ऐसे उदाहरण हैं कि इन फिल्मों या उसमें दिखाई जा रही हिंसा के जरिए हीरो को गलत और नकारात्मक तरीके से पेश किया जा रहा है। 11वीं और 12वीं के बच्चे इन्हें अपना आदर्श मानने लगे हैं। इस वजह से इस तरह की हिंसा हमेशा समाज में देखने को मिल रही है’। धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं

 

रंजीत रंजन ने आगे कहा, ‘उच्च कोटि का इतिहास रहा है पंजाब का, हरि सिंह नलवा का। इस फिल्म में एक गाना है- अर्जुन वेल्ली ने जोर के गंडासी मारी। … फिल्म का हीरो दो परिवारों के बीच नफरत की लड़ाई में बड़े-बड़े हथियार लेकर सरेआम हिंसा करता है और कोई कानून उसे रोकता या सजा देता नजर नहीं आता।

 

जहां तक अर्जुन वेल्ली गाने का सवाल है, हरि सिंह नलवा कमांडर इन चीफ थे। उन्होंने मुगलों-अंग्रेजों के खिलाफ उनकी बढ़ती हुई सत्ता को रोकने के लिए लड़ाई लड़ी थी। उनका बेटा था अर्जुन सिंह नलवा। उन्होंने कई मुसलमानों को 1947 में बचाने का काम किया था। इस उच्च कोटि के इतिहास से जुड़े गाने को बैकग्राउंड में गैंगवार के साथ दिखा रहे हैं। इससे हमारी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी जब मुगलों से लड़ाई लड़ रहे थे, तब वे एक लोकगीत के जरिए अपनी फौज में जोश पैदा करते थे’।

 

रंजीत रंजन सांसद ने कहा, ‘सेंसर बोर्ड ऐसी फिल्मों को कैसे बढ़ावा दे सकता है? किस तरह से ऐसी फिल्में पास होकर आ रही हैं, जो हमारे समाज के बीमारी हैं। ऐसी फिल्मों का स्थान हमारे समाज में नहीं होना चाहिए’। रंजन ने इसके बारे में चिंता जताई है कि ऐसी फिल्में हमारे समाज में नहीं होनी चाहिए, और उन्हें बढ़ावा देने से इस समस्या का हल नहीं होगा।

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