ISRO - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Fri, 20 Sep 2024 07:49:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg ISRO - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 चंद्रयान-4 मिशन को मिली कैबिनेट से मंजूरी, 2104.06 करोड़ रुपये का फंड स्वीकृत. https://chaupalkhabar.com/2024/09/20/chandrayaan-4-mission-found-cab/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/20/chandrayaan-4-mission-found-cab/#respond Fri, 20 Sep 2024 07:49:18 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5000 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-4 मिशन के लिए सरकार से हरी झंडी प्राप्त कर ली है। इस महत्वाकांक्षी मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सरकार ने 2104.06 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसरो के प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ ने मिशन से संबंधित कुछ अहम जानकारियाँ साझा की हैं, जिनमें उन्होंने …

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-4 मिशन के लिए सरकार से हरी झंडी प्राप्त कर ली है। इस महत्वाकांक्षी मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सरकार ने 2104.06 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसरो के प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ ने मिशन से संबंधित कुछ अहम जानकारियाँ साझा की हैं, जिनमें उन्होंने बताया कि इस मिशन को पूरा होने में लगभग 36 महीने का समय लगेगा। डॉ. एस. सोमनाथ के अनुसार, चंद्रयान-4* की इंजीनियरिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। हालांकि, इसरो को इसके बाद भी कुछ अन्य प्रक्रियात्मक मंजूरियों का इंतजार रहेगा। यह मिशन अपने पूर्ववर्ती चंद्रयान-3 से कई मायनों में अलग है। चंद्रयान-3 का मुख्य लक्ष्य चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कराना था, लेकिन चंद्रयान-4 के साथ एक और चुनौती जोड़ी गई है—चंद्रमा से वापस पृथ्वी तक लौटना।

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इस बार मिशन का दायरा और भी बड़ा है। चंद्रयान-4 मिशन में सैटेलाइट का कुल आकार पहले की तुलना में लगभग दोगुना हो जाएगा। इस सैटेलाइट में पाँच मुख्य मॉड्यूल होंगे जो मिशन के अलग-अलग हिस्सों को संभालेंगे। ये पाँच मॉड्यूल होंगे:

1. प्रोपल्शन मॉड्यूल: चंद्रमा तक पहुंचने और वापसी के लिए जिम्मेदार होगा।
2. डिसेंडर मॉड्यूल: चंद्रमा पर लैंडिंग के समय सक्रिय रहेगा।
3. एसेंडर मॉड्यूल: चंद्रमा से वापस पृथ्वी के लिए प्रस्थान करेगा।
4. ट्रांसफर मॉड्यूल: मॉड्यूल्स के बीच समन्वय करेगा।
5. री-एंट्री मॉड्यूल: पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश के दौरान सक्रिय होगा।

इस बार, चंद्रयान-4 को एक बार में लॉन्च नहीं किया जाएगा। इसके दो हिस्सों को अलग-अलग समय पर लॉन्च किया जाएगा और फिर अंतरिक्ष में मॉड्यूल्स को जोड़ा जाएगा, जिसे वैज्ञानिक शब्दों में डॉकिंग कहा जाता है। इस प्रकार के मिशन के लिए उच्च तकनीक और परिशुद्धता की आवश्यकता होती है, जो इसरो के वैज्ञानिकों की चुनौतीपूर्ण कार्यकुशलता को दर्शाता है।

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इसरो चीफ ने गगनयान मिशन के बारे में भी जानकारी साझा की। गगनयान, भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन, इस साल के अंत तक लॉन्च होने के लिए तैयार है। गगनयान मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री पहली बार अंतरिक्ष में जाएंगे। यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। डॉ. सोमनाथ ने बताया कि इसरो इस वर्ष के अंत तक गगनयान को लॉन्च करने की पूरी कोशिश कर रहा है और इसकी तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।

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इसरो ने मिशन गगनयान परीक्षण उड़ान कार्यक्रम की घोषणा की https://chaupalkhabar.com/2023/10/16/isro-announces-mission-gaganyaan-test-flight-schedule/ https://chaupalkhabar.com/2023/10/16/isro-announces-mission-gaganyaan-test-flight-schedule/#respond Mon, 16 Oct 2023 10:41:34 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1882 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सोमवार को अपने मिशन गगनयान के लिए परीक्षण उड़ान कार्यक्रम की घोषणा की। इसरो ने एक्स पर लिखा “मिशन गगनयान:” टीवी-डी1 परीक्षण उड़ान 21 अक्टूबर, 2023 को एसडीएससी-एसएचएआर, श्रीहरिकोटा से सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच निर्धारित है। इसरो ने क्रू मॉड्यूल (सीएम) की तस्वीरें भी साझा की …

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सोमवार को अपने मिशन गगनयान के लिए परीक्षण उड़ान कार्यक्रम की घोषणा की। इसरो ने एक्स पर लिखा “मिशन गगनयान:” टीवी-डी1 परीक्षण उड़ान 21 अक्टूबर, 2023 को एसडीएससी-एसएचएआर, श्रीहरिकोटा से सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच निर्धारित है। इसरो ने क्रू मॉड्यूल (सीएम) की तस्वीरें भी साझा की हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाएगा।

 

आगामी मिशन गगनयान के एक हिस्से के रूप में, इसरो 21 अक्टूबर को कैप्सूल की प्रभावकारिता और आपातकालीन निकास प्रणाली का परीक्षण करेगा। इस मिशन के साथ, इसरो इस साल के अंत तक तीन अंतरिक्ष यात्रियों को कम-पृथ्वी की कक्षा में भेजने की योजना बना रहा है।

 

निर्धारित परीक्षण उड़ान के दौरान, सीएम पर दबाव नहीं डाला जाएगा और इसे क्रायोजेनिक, तरल और ठोस चरणों के साथ स्वदेशी एलवीएम -3 रॉकेट का उपयोग करके अंतरिक्ष में लॉन्च किया जाएगा। परीक्षण के एक भाग के रूप में, इसरो सीएम के विभिन्न घटकों का भी मूल्यांकन करेगा, जिसमें क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) शामिल है। रॉकेट को मानव रेटिंग जैसी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक बार फिर से कॉन्फ़िगर किया गया है।

 

गगनयान मिशन में तीन सदस्यीय दल शामिल होगा, जो एक कक्षीय मॉड्यूल (ओएम) पर पृथ्वी की परिक्रमा करेगा, जिसमें तीन दिनों के लिए 400 किमी की दूरी पर सीएम और एसएम शामिल हैं, जिसे फिर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा। उन्हें भारतीय समुद्री जल में उतारना। फिलहाल, चालक दल बेंगलुरु में अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा में मिशन के लिए प्रशिक्षण ले रहा है और प्रशिक्षण में मिशन के संबंध में सिमुलेशन, शारीरिक फिटनेस और शैक्षणिक पाठ्यक्रम शामिल है

Brajesh Kumar 

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Chandrayaan-3: क्या प्रज्ञान रोवर और विक्रम लैंडर फिर से सक्रिय हो पाएंगे? इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने चुनौतियों की चर्चा की https://chaupalkhabar.com/2023/09/22/former-isro-chairman-g-madhavan-stated-that-will-vikram-lander-pragyan-rover-be-activated-again/ https://chaupalkhabar.com/2023/09/22/former-isro-chairman-g-madhavan-stated-that-will-vikram-lander-pragyan-rover-be-activated-again/#respond Fri, 22 Sep 2023 06:38:13 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1691 आज इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरे भारत के रोवर प्रज्ञान और लैंडर विक्रम से फिर से संपर्क करने का प्रयास कर सकता है। नीलेश देसाई, इसरो के अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (एसएसी) के निदेशक, ने कहा कि अगर भाग्य ने साथ दिया, तो दोनों से फिर से संपर्क होगा और उनके उपकरण …

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आज इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरे भारत के रोवर प्रज्ञान और लैंडर विक्रम से फिर से संपर्क करने का प्रयास कर सकता है। नीलेश देसाई, इसरो के अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (एसएसी) के निदेशक, ने कहा कि अगर भाग्य ने साथ दिया, तो दोनों से फिर से संपर्क होगा और उनके उपकरण भी उपयोग करेंगे। लेकिन इसके सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। इस विषय पर इसरो के पूर्व अध्यक्ष श्री माधवन नायर ने कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणी कीं।

 

 

 

 

जी माधवन नायर ने बताया कि प्रज्ञान रोवर और विक्रम लैंडर लगभग दो सप्ताह से सो रहे हैं। यहाँ तापमान न्यूनतम 150 डिग्री से अधिक हो सकता है। यह फ्रीजर से कुछ निकालने की कोशिश करने के समान है। उस तापमान पर बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और तंत्र की एक्टिविटी वास्तव में चिंताजनक है।उनका कहना था कि ऐसे हालात पर पर्याप्त परीक्षण किए गए हैं। इसमें कोई संदेह नहीं। यह भी सुनिश्चित किया गया कि ऐसे हालात में भी काम करते रहें। लेकिन हमें सावधान रहना होगा। हमें भाग्य चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि सूर्योदय के बाद चांद भी सौर ताप उपकरणों और चार्जर बैटरियों को गर्म करेगा। यदि दोनों आवश्यकताएं सफलतापूर्वक पूरी हो जाती हैं, तो  संभावना है कि सिस्टम फिर से शुरू हो जाएगा। एक बार यह शुरू हो जाएगा, तो यह काफी संभव है कि हम अगले 14 दिनों में अधिक दूरी तक घूम सकेंगे और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उसकी सतह पर अधिक जानकारी जुटा सकेंगे।

 

सितंबर दो और चार को इन दोनों को पूरी तरह चार्ज करने के बाद, इसरो ने उन्हें स्लीप मोड में डाल दिया क्योंकि चंद्रमा पर रात्रि काल शुरू हो गया था, जिसमें उन्हें भयानक सर्दी और विकिरण से गुजरना पड़ा था। दोनों ने पिछले दो सप्ताह में न्यूनतम 120 से न्यूनतम 200 डिग्री सेल्सियस की सर्दियों का सामना किया है। 20 सितंबर की शाम से पृथ्वी के समय अनुसार सूर्योदय अब चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर होने लगा है।

Brajesh Kumar 

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इसरो वैज्ञानिक और चंद्रयान-3 की उल्टी गिनती के पीछे की आवाज N Valarmathi का निधन हो गया है। https://chaupalkhabar.com/2023/09/04/isro-scientist-n-valarmathi-passed-away/ https://chaupalkhabar.com/2023/09/04/isro-scientist-n-valarmathi-passed-away/#respond Mon, 04 Sep 2023 07:41:46 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1572 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती कराने वाली वैज्ञानिक एन वलारमति का शनिवार रात अचानक निधन हो गया। उन्होंने हाल ही में चंद्रयान –3 के लॉन्च के लिए वॉयसओवर किया था , जो उनका आखिरी काम साबित हुआ।  कइ समाचार एजेंसियों का दावा है कि वलारमति का 2 सितंबर को चेन्नई …

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती कराने वाली वैज्ञानिक एन वलारमति का शनिवार रात अचानक निधन हो गया। उन्होंने हाल ही में चंद्रयान –3 के लॉन्च के लिए वॉयसओवर किया था , जो उनका आखिरी काम साबित हुआ। 

कइ समाचार एजेंसियों का दावा है कि वलारमति का 2 सितंबर को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह कुछ समय से बीमार चल रही थीं। 

 

करीब छह साल से इसरो के प्रक्षेपणों की आवाज रहीं वलारमति को आखिरी बार 14 जुलाई को रॉकेट प्रक्षेपण की उल्टी गिनती करते हुए सुना गया था। हालांकि, उनका सबसे हालिया बयान 30 जुलाई को दिया गया था जब पीएसएलवी-सी 56 रॉकेट ने एक विशिष्ट वाणिज्यिक मिशन के हिस्से के रूप में 7 सिंगापुर उपग्रहों के साथ लॉन्च किया था। 

 

इसरो के पूर्व निदेशक डॉ. पीवी वेंकटकृष्णन ने ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट में वलारमथी के निधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्रीहरिकोटा से इसरो के आगामी मिशनों में अब वलारमथी मैडम की आवाज सुनाई नहीं देगी। मिशन चंद्रयान-3 उनका अंतिम काउंटडाउन था। उनके निधन से गहरा दुख हुआ है।

 

 

Kanishka Rajora

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आदित्य-एल1 कल 2 सितंबर 2023 को सुबह 11:50 बजे होगा लांच, यह सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष आधारित भारतीय मिशन होगा, https://chaupalkhabar.com/2023/09/01/aditya-l1-leading-launch-at-11-50-hrs-september-2-from-srihari-kota/ https://chaupalkhabar.com/2023/09/01/aditya-l1-leading-launch-at-11-50-hrs-september-2-from-srihari-kota/#respond Fri, 01 Sep 2023 12:27:41 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1548 ISRO  के सोलर मिशन आदित्‍य एल-1 के लिए लांचिंग से पहले का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार 1 सितम्बर को ये जानकारी दी है की भारत का पहला सौर मिशन आदित्‍य एल-1 कल शनिवार 2 सितंबर को सुबह के 11.50 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेस सेंटर से …

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ISRO  के सोलर मिशन आदित्‍य एल-1 के लिए लांचिंग से पहले का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार 1 सितम्बर को ये जानकारी दी है की भारत का पहला सौर मिशन आदित्‍य एल-1 कल शनिवार 2 सितंबर को सुबह के 11.50 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा. इसरो ने उन प्‍लेटफॉर्म्‍स की भी जानकारी शेयर की है, जहां से कल सुबह 11:20 बजे से आदित्‍य एल-1 की लॉन्चिंग को लाइव प्रसारित किया जाएगा .
कल शनिवार 2 सितंबर को लॉन्चिंग के बाद इसरो का स्‍पेसक्राफ्ट L1 पॉइंट तक की यात्रा तय करेगा. इस यात्रा को तय करने में इसको  4 महीने का समय लगेगा.
बता दें की , धरती से सूरज की दूरी तकरीबन 15 करोड़ किलोमीटर है. इस दूरी के बीच पांच लैग्रेंज पॉइंट्स हैं. जिन्हें  L1, L2, L3, L4 और L5 पॉइंट के नाम से जाना जाता है. पांचो में से  L1 इसका पहला पॉइंट है, जो धरती से लगभग 15 लाख किलोमीटर की दुरी पर है. जहाँ से सूर्य पर 24 घंटे नजर रखी जा सकती है. इसलिए L1 पॉइंट को लैग्रेंजियन पॉइंट, लैग्रेंज पॉइंट, लिबरेशन पॉइंट या एल-पॉइंट के तौर पर जाना जाता है.
https://twitter.com/isro/status/1697506899242217921?s=20
आदित्य-एल1 की खास बातें …
1 .आदित्य एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष आधारित भारतीय मिशन होगा।
2 .अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज बिंदु 1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में रखा जाएगा |
3. आदित्य एल1 पेलोड के सूट कोरोनल हीटिंग, कोरोनल मास इजेक्शन, प्री-फ्लेयर और फ्लेयर गतिविधियों और उनकी विशेषताओं, अंतरिक्ष मौसम की गतिशीलता, कण और क्षेत्रों के प्रसार आदि की समस्या को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे।
4. इसरो आदित्य एल1 मिशन का बजट 400 करोड़ रुपये है और इसरो ने दिसंबर 2019 से आदित्य एल1 पर काम करना शुरू किया था।
5. आदित्य एल1 का उद्देश्य सौर पवन पैटर्न, ऊर्जा पैटर्न और सूर्य से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी का अध्ययन करना है।
6. सूर्य से कण गतिशीलता के अध्ययन के लिए डेटा प्रदान करने वाले इन-सीटू कण और प्लाज्मा वातावरण का निरीक्षण करें।
सौर कोरोना का भौतिकी और इसका तापन तंत्र।
7. लैग्रेंजियन पॉइंट 1 (L1) लैंडिंग पॉइंट है जहां सूर्य पैटर्न का अध्ययन करने के लिए आदित्य 1 को रखा जाएगा।
8. इसे सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंजियन बिंदु 1 (एल 1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने की योजना है, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर है।
9. L1 के विशेष सुविधाजनक बिंदु का उपयोग करते हुए, चार पेलोड सीधे सूर्य को देखेंगे और शेष तीन पेलोड लैग्रेंज बिंदु L1 पर कणों और क्षेत्रों का इन-सीटू अध्ययन करेंगे।
10. आदित्य एल1 प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-एक्सएल है।
इसरो आदित्य एल1 मिशन बजट..
​भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन विभिन्न अंतरिक्ष मिशनों पर काम करता है और हाल ही में, उन्होंने चंद्रयान 3 मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है।अब, वे 2 सितंबर 2023 को आदित्य एल1 नामक एक नया मिशन लॉन्च करने के लिए तैयार हैं और यह एक सौर मिशन है जिसका उद्देश्य गैस पैटर्न, कोरोनल हीटिंग और सौर पवन त्वरण से संबंधित अध्ययन करना है।
आपको पता होना चाहिए कि इसरो आदित्य एल1 मिशन का बजट 400 करोड़ रुपये है और इसरो ने दिसंबर 2019 से आदित्य एल1 पर काम करना शुरू किया था।

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अब भारत के बाहर भी चल रहा है ISRO का जादू, सिंगापुर के 7 सेटेलाइट को करेगा लॉन्च https://chaupalkhabar.com/2023/07/25/isro-to-launch-singapores-seven-satellites-on-july-30/ https://chaupalkhabar.com/2023/07/25/isro-to-launch-singapores-seven-satellites-on-july-30/#respond Tue, 25 Jul 2023 08:04:20 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1215 चंद्रयान 3 के सफल प्रक्षेपण के बाद भारत की स्पेस अनुसन्धान इकाई इसरो आगामी 30 जुलाई को सिंगापुर के एक उपग्रह और 6 अन्य उपग्रहों को प्रक्षेपित करेगा, जिसमें इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा विकसित सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) पेलोड है, जो कीसी भी मौसम स्थितियों में तस्वीरें लेने में सक्षम है. भारत का रॉकेट …

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चंद्रयान 3 के सफल प्रक्षेपण के बाद भारत की स्पेस अनुसन्धान इकाई इसरो आगामी 30 जुलाई को सिंगापुर के एक उपग्रह और 6 अन्य उपग्रहों को प्रक्षेपित करेगा, जिसमें इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा विकसित सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) पेलोड है, जो कीसी भी मौसम स्थितियों में तस्वीरें लेने में सक्षम है. भारत का रॉकेट PSLV -C 56 रविवार 30 जुलाई को सुबह 6.30 बजे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा स्थित स्पेसपोर्ट के पहले लॉन्च-पैड से 6 अन्य उपग्रहों के साथ सिंगापुर के DS-SAR डीएस उपग्रह को उनके कक्षा में स्थापित करेगा.

बता दें की डीएस-एसएआर उपग्रह को सिंगापुर की रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एजेंसी (DSTA ) और सिंगापुर के ही सिंगापुर टेक्नोलॉजीस इंजीनियरिंग लिमिटेड (ST इंजीनियरिंग) के बीच साझेदारी से विकसित किया गया है. इस उपग्रह को खासकर सिंगापुर सरकार की विभिन्न एजेंसियों की उपग्रह से प्राप्त होने वाली तस्वीरों से सम्बंधित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाएगा. ST इंजीनियरिंग अपने वाणिज्यिक ग्राहकों को मल्टी-मॉडल एवं उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और भू-स्थानिक सेवाएं मुहैया कराने के लिए इस उपग्रह का उपयोग करेगा

इसरो के अध्यक्ष सोमनाथ एस के मुताबिक , “यह एक कमर्शियल मिशन है.” इस मिशन में सिंगापुर के उपग्रह DS-SAR के अलावा छह अन्य उपग्रहों में वेलोक्स-एएम शामिल है, जो प्रौद्योगिकी प्रदर्शन सूक्ष्म उपग्रह है. इसके अलावा प्रायोगिक उपग्रह ‘एटमॉस्फेरिक कपलिंग एंड डायनेमिक्स एक्सप्लोरर (आर्केड) और 3U नैनो उपग्रह स्कूब-2 को भी अंतरिक्ष में पहुचाया जाएगा.’

प्राप्त जानकारी के अनुसार इसरो ने ने बताया है कि शहरी और दूरस्थ इलाकों में उपकरणों एवं क्लाउड के बीच निर्बाध संपर्क सेवा मुहैया कराने वाले उन्नत 3यू नुलायन (नुस्पेस द्वारा विकसित), पृथ्वी की निचली कक्षा में परिक्रमा करने वाले 3यू नैनो उपग्रह गैलासिया-2 और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित ओआरबी-12 स्ट्राडर को भी भारतीय राकेट PSLV -C56 के साथ प्रक्षेपित किया जाएगा.

इसरो द्वारा लॉन्च किए जाने वाले DS-SAR के साथ छह अन्य उपग्रह कुछ इस प्रकार हैं ……

1. VELOX-AM
2. ARCADE
3. SCOOB-II
4. NuLIoN
5. Galassia-2
6. ORB-12 STRIDER

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अब भारत के बाहर भी चल रहा है ISRO का जादू, सिंगापुर के 7 सेटेलाइट को करेगा लॉन्च https://chaupalkhabar.com/2023/07/25/isro-to-launch-singapores-seven-satellites-on-july-30-2/ https://chaupalkhabar.com/2023/07/25/isro-to-launch-singapores-seven-satellites-on-july-30-2/#respond Tue, 25 Jul 2023 08:04:20 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1215 चंद्रयान 3 के सफल प्रक्षेपण के बाद भारत की स्पेस अनुसन्धान इकाई इसरो आगामी 30 जुलाई को सिंगापुर के एक उपग्रह और 6 अन्य उपग्रहों को प्रक्षेपित करेगा, जिसमें इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा विकसित सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) पेलोड है, जो कीसी भी मौसम स्थितियों में तस्वीरें लेने में सक्षम है. भारत का रॉकेट …

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चंद्रयान 3 के सफल प्रक्षेपण के बाद भारत की स्पेस अनुसन्धान इकाई इसरो आगामी 30 जुलाई को सिंगापुर के एक उपग्रह और 6 अन्य उपग्रहों को प्रक्षेपित करेगा, जिसमें इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा विकसित सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) पेलोड है, जो कीसी भी मौसम स्थितियों में तस्वीरें लेने में सक्षम है. भारत का रॉकेट PSLV -C 56 रविवार 30 जुलाई को सुबह 6.30 बजे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा स्थित स्पेसपोर्ट के पहले लॉन्च-पैड से 6 अन्य उपग्रहों के साथ सिंगापुर के DS-SAR डीएस उपग्रह को उनके कक्षा में स्थापित करेगा.

बता दें की डीएस-एसएआर उपग्रह को सिंगापुर की रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एजेंसी (DSTA ) और सिंगापुर के ही सिंगापुर टेक्नोलॉजीस इंजीनियरिंग लिमिटेड (ST इंजीनियरिंग) के बीच साझेदारी से विकसित किया गया है. इस उपग्रह को खासकर सिंगापुर सरकार की विभिन्न एजेंसियों की उपग्रह से प्राप्त होने वाली तस्वीरों से सम्बंधित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाएगा. ST इंजीनियरिंग अपने वाणिज्यिक ग्राहकों को मल्टी-मॉडल एवं उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और भू-स्थानिक सेवाएं मुहैया कराने के लिए इस उपग्रह का उपयोग करेगा

इसरो के अध्यक्ष सोमनाथ एस के मुताबिक , “यह एक कमर्शियल मिशन है.” इस मिशन में सिंगापुर के उपग्रह DS-SAR के अलावा छह अन्य उपग्रहों में वेलोक्स-एएम शामिल है, जो प्रौद्योगिकी प्रदर्शन सूक्ष्म उपग्रह है. इसके अलावा प्रायोगिक उपग्रह ‘एटमॉस्फेरिक कपलिंग एंड डायनेमिक्स एक्सप्लोरर (आर्केड) और 3U नैनो उपग्रह स्कूब-2 को भी अंतरिक्ष में पहुचाया जाएगा.’

प्राप्त जानकारी के अनुसार इसरो ने ने बताया है कि शहरी और दूरस्थ इलाकों में उपकरणों एवं क्लाउड के बीच निर्बाध संपर्क सेवा मुहैया कराने वाले उन्नत 3यू नुलायन (नुस्पेस द्वारा विकसित), पृथ्वी की निचली कक्षा में परिक्रमा करने वाले 3यू नैनो उपग्रह गैलासिया-2 और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित ओआरबी-12 स्ट्राडर को भी भारतीय राकेट PSLV -C56 के साथ प्रक्षेपित किया जाएगा.

इसरो द्वारा लॉन्च किए जाने वाले DS-SAR के साथ छह अन्य उपग्रह कुछ इस प्रकार हैं ……

1. VELOX-AM
2. ARCADE
3. SCOOB-II
4. NuLIoN
5. Galassia-2
6. ORB-12 STRIDER

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भारतीय वैज्ञानिक एक बार फिर चंद्रमा की ओर अपने मिशन चंद्रयान 3 (Chandrayaan 3) के जरिए बढ़ चले हैं।
इसरो ने कल 14 जुलाई, 2023 को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर से चंद्रयान 3 को लॉन्च किया गया। चंद्रयान-3 एक लैंडर, एक रोवर और एक प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैस है। इसका वजन करीब 3,900 किलोग्राम है।
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के तौर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन सेंटर पहुंचे थे। इसके अलावा पूर्व इसरो चीफ राधाकृष्णन, के सिवन और एएस किरण कुमार भी चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग पर मौजूद रहे।
इसरो के पूर्व चीफ माधवन नायर ने कहा कि इंसानी रूप से जो कुछ भी संभव था, वो किया जा चुका है। मुझे ऐसा कोई कारण नहीं नजर आता कि मिशन चंद्रयान-3 फेल हो।
बताया जा रहा है कि चंद्रयान 3 का रोबोटिक उपकरण 24 अगस्त तक चांद के उस हिस्से (Shackleton Crater) पर उतर सकता है, जहां अभी तक किसी भी देश का कोई अभियान नहीं पहुंचा है।
दुनियाभर के लोगों की नजरें भारत के इस मिशन पर हैं। दूसरे चंद्रयान के मुकाबले इस बार चंद्रयान 3 का लैंडर ज्यादा मजबूत पहियों के साथ 40 गुना बड़ी जगह पर लैंड होगा।

चंद्रयान 3 को LVM3 रॉकेट से लॉन्च किया गया है। लैंडर को सफलतापूर्वक चांद की सतह पर उतारने के लिए इसमें कई तरह के सुरक्षा उपकरणों को लगाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया,
‘जहां तक भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र का सवाल है, तो 14 जुलाई 2023 का दिन हमेशा सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा। चंद्रयान-3 हमारा तीसरा चंद्र मिशन, अपनी यात्रा पर निकलेगा। यह उल्लेखनीय मिशन हमारे राष्ट्र की आशाओं और सपनों को आगे बढ़ाएगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का यह दिन, भारतीय इतिहास में एक विशेष महत्व का है। मिशन चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग नए भारत की आकांक्षाओं को नया आकाश देने जा रही है। इस मिशन में हमारे देश के वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत, लगन, समर्पण और प्रतिबद्धता जुड़ी हुई है। यह मिशन सफल हो, इसके लिए इसरो की पूरी टीम को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

नासा के आर्टेमिस 3 मिशन के लिए कितना महत्वपूर्ण है चंद्रयान 3
चंद्रयान 3 नासा के आर्टेमिस-3 मिशन के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। अर्टेमिस 3 मिशन के अंतर्गत नासा चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानों को उतारने की योजना बना रहा है। ऐसे में चंद्रयान 3 की खोज से चांद के साउथ पोल के बारे में जो डाटा मिलेगा। उससे नासा के आर्टेमिस मिशन को चांद के इस खास क्षेत्र के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी।

चंद्रयान-3 का सफर कुल
चंद्रयान-3 का सफर कुल 40 दिन का होगा. जिसके बाद ये अपनी कक्षा में पहुंचेगा और चांद पर चक्कर लगाने के बाद रोवर लैंड होगा.धरती से चांद की कुल दूरी 3.84 लाख km की है. रॉकेट का सफर कुल 36 हजार किमी का होगा. रॉकेट रोवर को पृथ्वी के बाहरी ऑर्बिट तक ले जाएगा. इसमें करीब 16 मिनट लगेंगे.
बाहरी ऑर्बिट से बाद का सफर प्रोपल्शन मॉड्यूल से चांद के ऑर्बिट में पहुंचकर कई स्टेज में ऑर्बिट घटाएगा. 100 km के ऑर्बिट में पहुंचने पर प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग अंत में लैंडर चांद पर उतरेगा.

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