jharkhand - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Tue, 03 Sep 2024 12:49:30 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg jharkhand - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 मधु कोड़ा की बीजेपी में एंट्री, पार्टी के लिए चुनावी तुरुप का पत्ता या नैरेटिव पर संकट? https://chaupalkhabar.com/2024/09/03/madhu-koda-in-bjp/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/03/madhu-koda-in-bjp/#respond Tue, 03 Sep 2024 12:49:30 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4615 झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को लेकर बीजेपी के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर विवाद बना हुआ है। हाल ही में यह चर्चा तेज हो गई कि कोड़ा बीजेपी में शामिल हो गए हैं, लेकिन राज्य के बीजेपी नेताओं का कहना है कि कोड़ा पिछले हफ्ते नहीं, बल्कि कई महीने पहले ही पार्टी …

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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को लेकर बीजेपी के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर विवाद बना हुआ है। हाल ही में यह चर्चा तेज हो गई कि कोड़ा बीजेपी में शामिल हो गए हैं, लेकिन राज्य के बीजेपी नेताओं का कहना है कि कोड़ा पिछले हफ्ते नहीं, बल्कि कई महीने पहले ही पार्टी में शामिल हो चुके थे। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, जिससे स्थिति पर रहस्य का पर्दा बना हुआ है। कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा, जो कि फरवरी में बीजेपी में शामिल हुई थीं, ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके पति मधु कोड़ा भी अब बीजेपी का हिस्सा हैं और पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। हालांकि, बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर कोड़ा के पार्टी में शामिल होने की घोषणा नहीं की है, लेकिन कोड़ा की हालिया गतिविधियों से इस बात का संकेत मिलता है कि वे पार्टी में सक्रिय हो चुके हैं।

पिछले शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के बागी नेता लोबिन हेमब्रोम के बीजेपी में शामिल होने के मौके पर कोड़ा को भी बीजेपी नेताओं के साथ मंच साझा करते देखा गया। झारखंड बीजेपी प्रमुख बाबूलाल मरांडी और राज्य प्रभारी हिमंत बिस्वा सरमा ने कोड़ा और हेमब्रोम दोनों को बीजेपी की भगवा पट्टी पहनाई। इस घटना के बाद से यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि कोड़ा भी पार्टी में शामिल हो गए हैं। हालांकि, इस कार्यक्रम के बाद बीजेपी की ओर से सिर्फ हेमब्रोम के पार्टी में शामिल होने की घोषणा की गई।

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बीजेपी के नेताओं का कहना है कि मधु कोड़ा फरवरी से ही पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। झारखंड बीजेपी महासचिव मनोज सिंह ने कहा, “कोड़ा बीजेपी परिवार का हिस्सा हैं और वह पार्टी में शामिल हो चुके हैं। वह पार्टी की विभिन्न गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं और उन्होंने हाल ही में एक रैली में भी हिस्सा लिया था।” कोड़ा की बीजेपी में बढ़ती सक्रियता को लेकर जेएमएम और कुछ बीजेपी नेताओं ने नाराजगी जताई है। पूर्व मुख्यमंत्री को 2017 में कोयला खनन घोटाले में दोषी ठहराया गया था और बीजेपी ने उन्हें “भ्रष्टाचार का प्रतीक” कहा था। अब, जब बीजेपी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राज्य चुनावों में उतरने की तैयारी कर रही है, तो कोड़ा की मौजूदगी पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है।

जेएमएम ने बीजेपी पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। पार्टी के नेताओं ने कहा कि एक ओर बीजेपी भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बना रही है, जबकि दूसरी ओर वह एक ऐसे नेता को गले लगा रही है, जिसे वह पहले भ्रष्टाचार का प्रतीक मानती थी। जेएमएम के महासचिव विनोद पाण्डेय ने कहा, “भाजपा कोड़ा को भ्रष्टाचार का प्रतीक कहती थी, लेकिन आज वह उन्हें अपने साथ लेकर चल रही है।” मधु कोड़ा का राजनीतिक सफर बीजेपी के साथ शुरू हुआ था, जब उन्होंने 2000 में जगन्नाथपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी। लेकिन 2005 में बीजेपी से टिकट न मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीतकर बीजेपी सरकार को समर्थन दिया। बाद में, 2006 में, उन्होंने जेएमएम और कांग्रेस के समर्थन से राज्य में सरकार बनाई, लेकिन उनकी सरकार ज्यादा दिन नहीं चली और उन्हें 2008 में इस्तीफा देना पड़ा।

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कोड़ा के बीजेपी में शामिल होने की संभावना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनकी पत्नी गीता कोड़ा ‘हो’ अनुसूचित जनजाति से आती हैं, जो सिंहभूम क्षेत्र में प्रभावशाली है। बीजेपी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कोड़ा परिवार पर भरोसा कर रही है। राज्य के बीजेपी नेताओं का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी की पैठ बनाने के लिए कोड़ा की मदद की जा सकती है। हालांकि, बीजेपी के भीतर कुछ नेता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कोड़ा की उपस्थिति पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी नैरेटिव को कमजोर कर सकती है। लेकिन चुनावी रणनीति के तहत पार्टी कोड़ा के साथ जुड़ने का जोखिम उठाने के लिए तैयार दिख रही है।

गीता कोड़ा ने इस बात को स्पष्ट किया कि वे और उनके पति मधु कोड़ा अब एक इकाई के रूप में बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं और झारखंड के आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के लिए प्रयासरत हैं। अब यह देखना बाकी है कि बीजेपी कोड़ा के साथ किस तरह का तालमेल बैठाती है और चुनावी मैदान में किस तरह से उतरती है।

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झारखंड की सियासत में हलचल, पूर्व सीएम चंपई सोरेन भाजपा में होंगे शामिल। https://chaupalkhabar.com/2024/08/27/jharkhands-politics-is-in-turmoil/ https://chaupalkhabar.com/2024/08/27/jharkhands-politics-is-in-turmoil/#respond Tue, 27 Aug 2024 10:31:27 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4454 झारखंड में विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा करने वाले हैं। भाजपा प्रदेश प्रभारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस खबर की पुष्टि की। चंपई सोरेन 30 …

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झारखंड में विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। हाल ही में, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा करने वाले हैं। भाजपा प्रदेश प्रभारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस खबर की पुष्टि की। चंपई सोरेन 30 अगस्त को रांची में भाजपा में औपचारिक रूप से शामिल होंगे। चंपई सोरेन ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और भाजपा में शामिल होने के निर्णय की पुष्टि की। उनकी दिल्ली की यह यात्रा उनकी झामुमो से अलग होने की अटकलों के बीच आई है। चंपई ने झामुमो नेतृत्व पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया और एक नई राजनीतिक राह तलाशने की बात कही थी।

चंपई सोरेन की राजनीति में एक लंबी यात्रा रही है। उन्होंने 1991 में निर्दलीय विधायक के रूप में राजनीति में कदम रखा और फिर 1995 में झामुमो के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद उन्होंने 2005, 2009, 2014 और 2019 में विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की। झारखंड के आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका रही है, जिससे उन्हें ‘झारखंड टाइगर’ के उपनाम से जाना जाता है। चंपई ने शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन के साथ मिलकर झारखंड के आदिवासी समुदाय के हितों के लिए काम किया।

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चंपई ने 2010 से 2014 तक विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली और 2019 में हेमंत सोरेन की सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर कार्य किया। हाल ही में, 31 जनवरी 2024 को भूमि घोटाले के आरोपों में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री का पद सौंपा गया। लेकिन, जुलाई 2024 में हेमंत सोरेन की जमानत पर रिहाई के बाद चंपई को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया और वे फिर से कैबिनेट मंत्री के पद पर नियुक्त हुए।

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चंपई सोरेन के झामुमो से अलग होने और भाजपा में शामिल होने के निर्णय ने झारखंड की राजनीतिक स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे के बाद झामुमो के नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे और एक नई राजनीतिक दिशा की ओर कदम बढ़ाया। अब देखना यह होगा कि भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी राजनीतिक यात्रा कैसी रहती है और झारखंड में आगामी विधानसभा चुनाव पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

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कोल्हान में JMM की स्थिति पर चंपई सोरेन का प्रभाव, विस चुनाव में पार्टी को झटका लगने की संभावना. https://chaupalkhabar.com/2024/08/19/status-of-jmm-in-kolhan/ https://chaupalkhabar.com/2024/08/19/status-of-jmm-in-kolhan/#respond Mon, 19 Aug 2024 06:41:39 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4360 चंपई सोरेन का झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में एक महत्वपूर्ण और लंबा राजनीतिक सफर रहा है, लेकिन अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उनका यह सफर समाप्ति की ओर है। चंपई सोरेन कोल्हान प्रमंडल की 14 विधानसभा सीटों में झामुमो की जड़ें जमाने में एक मुख्य भूमिका निभाते रहे हैं। अलग राज्य आंदोलन के …

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चंपई सोरेन का झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में एक महत्वपूर्ण और लंबा राजनीतिक सफर रहा है, लेकिन अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उनका यह सफर समाप्ति की ओर है। चंपई सोरेन कोल्हान प्रमंडल की 14 विधानसभा सीटों में झामुमो की जड़ें जमाने में एक मुख्य भूमिका निभाते रहे हैं। अलग राज्य आंदोलन के दौरान से ही वे ‘कोल्हान टाइगर’ के नाम से लोकप्रिय रहे हैं और उनका जनमानस पर प्रभाव व्यापक रहा है। चंपई सोरेन ने मजदूर आंदोलनों में भी एक अहम भूमिका अदा की है, जिसमें उन्होंने बड़े औद्योगिक घरानों को सम्मानजनक समझौतों के लिए मजबूर किया। उनके इस प्रभाव के कारण ही झामुमो ने कोल्हान प्रमंडल में एक अभेद्य गढ़ बना रखा था, जैसा कि संताल प्रमंडल में भी देखने को मिलता है। यह प्रभाव ही था जिसके चलते विपरीत परिस्थितियों में उन्हें मुख्यमंत्री पद भी सौंपा गया।

हालांकि, चंपई सोरेन के राजनीतिक सफर में एक मोड़ तब आया जब उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया गया। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में उनकी नाराजगी की खबरें छनकर आने लगीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नाराजगी के चलते वे झामुमो से अलग रास्ता अख्तियार कर सकते हैं। लेकिन जब उन्हें हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, तो यह संभावना बनी कि वे पार्टी में ही बने रहेंगे। अब सवाल यह है कि यदि चंपई सोरेन भाजपा में शामिल होते हैं, तो झामुमो को कोल्हान प्रमंडल में किस प्रकार का झटका लग सकता है? खासकर तब, जब पिछली विधानसभा चुनावों में झामुमो ने इस प्रमंडल में भाजपा का खाता भी नहीं खुलने दिया था। कोल्हान प्रमंडल के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। यहां तक कि जमशेदपुर पूर्वी से तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को भी पराजित होना पड़ा था।

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भाजपा ने इस बार कोल्हान क्षेत्र को लेकर अपनी रणनीति को मजबूत किया है और चंपई सोरेन के संभावित भाजपा में शामिल होने को एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के बड़े रणनीतिकारों ने कोल्हान क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए चंपई सोरेन के प्रभाव का लाभ उठाने की योजना बनाई है। बंगाल भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की मध्यस्थता ने इस प्रक्रिया को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। चंपई सोरेन ने हाल ही में दिल्ली रवाना होने से पहले कोलकाता के एक बड़े होटल में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की, जिसके बाद वे दिल्ली की ओर रवाना हुए। इस घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। अगर चंपई सोरेन भाजपा में शामिल होते हैं, तो यह झामुमो के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, खासकर कोल्हान प्रमंडल में, जहां उनकी अनुपस्थिति में झामुमो के लिए पिछला प्रदर्शन दोहराना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

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यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चंपई सोरेन का यह कदम झारखंड की राजनीति में क्या बदलाव लाता है। झामुमो के लिए यह एक कठिन दौर साबित हो सकता है, जबकि भाजपा के लिए यह एक बड़ी सफलता हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह झारखंड की राजनीतिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है।

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मोदी सरकार की ‘पूर्वोदय योजना’ से पांच राज्यों को मिलेगा ‘उदय’ का अवसर… https://chaupalkhabar.com/2024/07/24/modi-government-purvodaya-yo/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/24/modi-government-purvodaya-yo/#respond Wed, 24 Jul 2024 09:24:37 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4028 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बजट के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। इस बजट में बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष रूप से लाभान्वित किया गया है, जहां केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं का ऐलान किया है। इनमें से एक महत्वपूर्ण योजना ‘पूर्वोदय’ योजना है, जिसे देश के पूर्वी हिस्से के …

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बजट के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। इस बजट में बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष रूप से लाभान्वित किया गया है, जहां केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं का ऐलान किया है। इनमें से एक महत्वपूर्ण योजना ‘पूर्वोदय’ योजना है, जिसे देश के पूर्वी हिस्से के विकास के लिए तैयार किया गया है। इस योजना का लाभ बिहार, आंध्र प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे पांच राज्यों को मिलेगा। वित्त मंत्री ने इस योजना के माध्यम से इन राज्यों में चहुंमुखी विकास की संभावना जताई है। पूर्वोदय योजना का उद्देश्य देश के पूर्वी हिस्से के राज्यों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करना है। इन राज्यों में प्राकृतिक संपदाएँ प्रचुर मात्रा में हैं और इनकी सांस्कृतिक परंपराएं भी बहुत समृद्ध हैं। इस योजना के माध्यम से इन राज्यों में मानव संसाधन विकास, अवसंरचना का विस्तार और आर्थिक अवसरों का सृजन किया जाएगा। यह योजना देश के पूर्वी भाग को विकसित भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि पूर्वोदय योजना से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को विशेष लाभ होगा। इन राज्यों में व्यापक स्तर पर विकास कार्य किए जाएंगे, जिसमें बुनियादी ढांचे का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना शामिल है। बजट में बिहार के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गई हैं। बिहार में विकास परियोजनाओं के लिए 59,409 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। इसमें 26,000 करोड़ रुपये सड़क और पुल परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बिहार में बिजली संयंत्र की स्थापना के लिए 21,400 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं से राज्य में बिजली की समस्या का समाधान होगा और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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वित्त मंत्री ने बिहार में नए हवाई अड्डों, मेडिकल कॉलेजों और बाढ़ परियोजनाओं के लिए भी धनराशि आवंटित की है। इससे राज्य में बुनियादी ढांचे का विकास होगा और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी। साथ ही, नए हवाई अड्डों के निर्माण से राज्य में परिवहन सुविधाओं में सुधार होगा, जिससे व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। आंध्र प्रदेश को भी इस बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। वित्त मंत्री ने आंध्र प्रदेश की राजधानी के विकास के लिए विशेष वित्तीय सहायता के रूप में 15,000 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। इसके अलावा, पोलावरम प्रोजेक्ट के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जो राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है।

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पोलावरम प्रोजेक्ट के तहत बांध और जलाशय का निर्माण किया जाएगा, जिससे राज्य में जल संसाधनों का सही उपयोग हो सकेगा और कृषि एवं उद्योगों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं के विकास के लिए भी बजट में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। पूर्वोदय योजना का लाभ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा को भी मिलेगा। इन राज्यों में अवसंरचना विकास के साथ-साथ मानव संसाधन विकास पर भी जोर दिया जाएगा। झारखंड में खनिज संसाधनों का सही उपयोग करके राज्य के आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। पश्चिम बंगाल में उद्योगों के विकास और रोजगार सृजन पर ध्यान दिया जाएगा। ओडिशा में पर्यटन और कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए विशेष योजनाएं बनाई जाएंगी।

पूर्वोदय योजना के माध्यम से इन पांच राज्यों में चहुंमुखी विकास की उम्मीद है। यह योजना न केवल बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और आर्थिक अवसरों के सृजन पर भी जोर देगी। इससे इन राज्यों में समृद्धि और खुशहाली का मार्ग प्रशस्त होगा। इस प्रकार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की पूर्वोदय योजना देश के पूर्वी हिस्से के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। यह योजना इन पांच राज्यों को विकास की मुख्य धारा में शामिल करने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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“मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा में बहुमत साबित कर कैबिनेट का विस्तार किया, तीन नये चहरे भी होंगे शामिल। https://chaupalkhabar.com/2024/07/08/chief-minister-hemant-soren/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/08/chief-minister-hemant-soren/#respond Mon, 08 Jul 2024 13:25:14 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3869 सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा में बहुमत साबित कर एक बार फिर अपनी सरकार की स्थिति को मजबूत किया। इसके साथ ही, दोपहर चार बजे उनके नेतृत्व में कैबिनेट का विस्तार भी हुआ। राजभवन में आयोजित इस समारोह में सभी नए मंत्रियों को राज्यपाल द्वारा पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। …

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सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा में बहुमत साबित कर एक बार फिर अपनी सरकार की स्थिति को मजबूत किया। इसके साथ ही, दोपहर चार बजे उनके नेतृत्व में कैबिनेट का विस्तार भी हुआ। राजभवन में आयोजित इस समारोह में सभी नए मंत्रियों को राज्यपाल द्वारा पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। विशेष रूप से, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को हेमंत सोरेन के बाद कैबिनेट में नंबर दो की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह हेमंत सोरेन का तीसरा कार्यकाल है। नए कैबिनेट में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सात, कांग्रेस के चार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक मंत्री शामिल किए गए हैं। कांग्रेस से डॉ. इरफान अंसारी और दीपिका पांडेय सिंह को नए चेहरों के रूप में शामिल किया गया है, जबकि झामुमो से बैद्यनाथ राम को भी नई भूमिका में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, बैद्यनाथ राम पूर्व में भी मंत्री रह चुके हैं।

शपथ ग्रहण समारोह राजभवन में आयोजित किया गया था, जिसमें मंत्रियों, विभागीय सचिवों और कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। सबसे पहले चंपई सोरेन ने शपथ ली और फिर अन्य मंत्रियों ने एक-एक कर शपथ ग्रहण की। इस प्रकार, चंपई सोरेन ने कैबिनेट में नंबर दो की स्थिति हासिल की। उनके इस नई जिम्मेदारी को लेने से पार्टी में उनके नाराज होने की अफवाहों पर भी विराम लग गया है झारखंड की विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं, जिसके आधार पर मुख्यमंत्री समेत कुल 12 मंत्रियों की नियुक्ति की जा सकती है। हेमंत सोरेन सरकार ने पहले चार वर्षों में 11 मंत्रियों के साथ ही काम चलाया। इनमें झामुमो के छह, कांग्रेस के चार और राजद के एक मंत्री शामिल थे। इस बार झामुमो के एक और सदस्य को शामिल करके मंत्रियों की संख्या सात कर दी गई है। इस प्रकार, अब कैबिनेट अपने पूर्ण स्वरूप में है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार, किसी भी राज्य में सांसदों अथवा विधायकों की संख्या के 15 प्रतिशत सदस्यों को ही कैबिनेट में रखा जा सकता है। झारखंड में 81 विधायकों के हिसाब से यह संख्या 12 तक होती है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अब कैबिनेट इस प्रकार से तैयार है:

1. हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झामुमो
2. चंपई सोरेन, झामुमो
3. डा. रामेश्वर उरांव, कांग्रेस
4. सत्यानंद भोक्ता, राजद
5. बैद्यनाथ राम, झामुमो
6. दीपक बिरुआ, झामुमो
7. बन्ना गुप्ता, कांग्रेस
8. डा. इरफान अंसारी, कांग्रेस
9. मिथिलेश कुमार ठाकुर, झामुमो
10. हफीजुल हसन, झामुमो
11. बेबी देवी, झामुमो
12. दीपिका पांडेय सिंह, कांग्रेस

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हेमंत सोरेन की इस नई कैबिनेट में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विभिन्न दलों से अनुभवी और नए चेहरों का समावेश किया गया है, जो राज्य के समग्र विकास के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। चंपई सोरेन की नंबर दो की स्थिति उन्हें पार्टी में उनके कद और महत्व को दर्शाती है। इसके साथ ही, कांग्रेस और राजद के मंत्रियों की भागीदारी सरकार की सहयोगी रणनीति को मजबूत करती है। इस कैबिनेट विस्तार से सरकार के आगामी कार्यकाल में कई नई योजनाओं और विकास कार्यों की उम्मीद की जा रही है। हेमंत सोरेन ने अपने तीसरे कार्यकाल में विकास और समृद्धि को प्राथमिकता देने की बात कही है, जिससे झारखंड के लोगों की उम्मीदें और अधिक बढ़ गई हैं। नई कैबिनेट के गठन के बाद, सभी मंत्रियों से अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाने की अपेक्षा की जा रही है, ताकि राज्य में प्रगति और विकास की नई लहर आए।

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हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत, रांची जमीन घोटाला मामले में थे आरोपी https://chaupalkhabar.com/2024/06/28/mant-soren-ko-jharkhand-haiko/ https://chaupalkhabar.com/2024/06/28/mant-soren-ko-jharkhand-haiko/#respond Fri, 28 Jun 2024 07:08:20 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3770 झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन को रांची जमीन घोटाले के मामले में हाईकोर्ट द्वारा जमानत मिलने के बाद विवाद का नया मोड़ आ गया है। इस फैसले के बाद, सोरेन बेल बॉन्ड भरने के बाद जेल से बाहर आ सकेंगे। यह मामला अनधिकृत रूप से 8.86 एकड़ जमीन कब्जे करने के …

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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन को रांची जमीन घोटाले के मामले में हाईकोर्ट द्वारा जमानत मिलने के बाद विवाद का नया मोड़ आ गया है। इस फैसले के बाद, सोरेन बेल बॉन्ड भरने के बाद जेल से बाहर आ सकेंगे। यह मामला अनधिकृत रूप से 8.86 एकड़ जमीन कब्जे करने के आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसे पीएमएलए एक्ट के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग के तहत दर्ज किया गया है। जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान, ईडी की ओर से पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता एसवी राजू ने अदालत में बयान दिया कि हेमंत सोरेन ने अवैध तरीके से बड़गाईं अंचल में जमीन पर कब्जा किया है। यह अनुमान ईडी के द्वारा पीएमएलए एक्ट के तहत विधिक मान्यताओं के उल्लंघन को दर्शाता है।

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इस मुद्दे पर सोरेन की ओर से दी गई बयान में, सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि यह मामला केवल राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और इसे मनी लॉन्ड्रिंग के तर्क से देखना गलत होगा। उन्होंने इसे केंद्र सरकार द्वारा ईडी के दुरुपयोग के तरीके से किया गया दावा बताया। अदालत ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और 13 जून को फैसला सुरक्षित रखा था। इस फैसले के बाद, सोरेन को जमानत मिलने का समाचार राजनीतिक दायरे में गहरी चर्चाओं का कारण बना। उन्होंने जमानत के लिए लंबे समय से प्रयास किए थे, जो अब सफलतापूर्वक समाप्त हो गए हैं।

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झारखंड की राजनीतिक दीवारों में इस मामले की महत्वपूर्ण स्थिति बनी हुई है, जिसमें सोरेन और ईडी के बीच की जंग व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों के संघर्ष को दर्शाती है। विवादित जमीन कब्जे के बारे में तकनीकी और कानूनी पहलू निपटाने के लिए अदालती प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी।

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चुनाव के बीच ED के छापे में 30 करोड़ कैश मिलने का अनुमान, झारखंड में मंत्री के PS के नौकर के घर से मिला नोटों का अंबार https://chaupalkhabar.com/2024/05/06/choice-among-ed-raid-in-30-k/ https://chaupalkhabar.com/2024/05/06/choice-among-ed-raid-in-30-k/#respond Mon, 06 May 2024 06:30:32 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3111 सवाल है कि क्या झारखंड में राजनीतिक बदलाव का वक्त है? विश्वास करें या ना करें, पिछले कुछ महीनों से झारखंड के राजनीतिक मंच पर कई घटनाएं घटित हुई हैं जो सामान्य जनता की आंखों को खोलने का काम कर रही हैं। इनमें से एक है रांची में हाल ही में हुई छापेमारी, जिसमें ग्रामीण …

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सवाल है कि क्या झारखंड में राजनीतिक बदलाव का वक्त है? विश्वास करें या ना करें, पिछले कुछ महीनों से झारखंड के राजनीतिक मंच पर कई घटनाएं घटित हुई हैं जो सामान्य जनता की आंखों को खोलने का काम कर रही हैं। इनमें से एक है रांची में हाल ही में हुई छापेमारी, जिसमें ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के प्रत्याशित निजी सचिव संजीव लाल के घर से भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई है। इसके साथ ही, पिछले साल दिसंबर में भी झारखंड में बड़ी संख्या में कैश बरामदगी हुई थी, जहाँ कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और कारोबारी धीरज साहू के कई ठिकानों से आईटी द्वारा 350 करोड़ से ज्यादा कैश बरामद किया था।

यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में झारखंड में चुनाव प्रचार करते समय करप्शन के मुद्दे को उठाया था। इससे स्पष्ट है कि झारखंड की राजनीति में कुछ गंभीर समस्याओं का सामना किया जा रहा है। इस घटना के पीछे का सच क्या है? क्या यह झारखंड की राजनीति में एक नया मोड़ है? इन प्रश्नों के जवाब तलाशते हुए, हमें इन घटनाओं के पीछे की कहानी में खुद को डुबोकर निकलना होगा।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी से नकदी बरामद किए जाने के बाद, झारखंड की राजनीति में चल रहे कई सवालों के उत्तर तलाशे जा रहे हैं। इस घटना के साथ-साथ, पिछले साल दिसंबर में हुई एक और कैश बरामदगी को भी देखते हुए, सामान्य जनता के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सभी घटनाएं केवल एक सिरे से हैं या इसके पीछे कुछ और राज हैं। यह बात साफ है कि झारखंड के राजनीतिक मंच पर काले धन के बारे में सवाल उठ रहे हैं। इस घटना के समय, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे केवल झारखंड के नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए भी चिंता का विषय बन गए हैं।

कई लोगों को इस घटना का राजनीतिक रंग भी दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ महीनों से हुई घटनाओं के बाद, कांग्रेस और भाजपा के बीच तनाव भी बढ़ा है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, ‘काउंटिंग होने दीजिए ये गिनती 50 करोड़ तक जाएगी। पूरी झारखंड सरकार गले तक भ्रष्टाचार में डूबी हुई है।’ वहीं, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और कारोबारी धीरज साहू के ठिकानों से हुई कैश बरामदगी के मामले में भी गंभीर उलझन में है। इस पर धीरज साहू ने कहा था कि छापेमारी में जो कैश बरामद किया गया है, वो मेरी शराब की कंपनियों का है। उन्होंने यह भी कहा कि शराब का कारोबार नकदी में होता है और इसका कांग्रेस पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।

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राजनीतिक दलों के बीच इस बड़े मुद्दे पर विवाद तेजी से बढ़ रहा है। बीजेपी के विधायकों ने कहा है कि धीरज साहू ने झारखंड के संसाधनों का दोहन किया है और गरीबों का हक मार कर एकत्रित की है। इस बड़े मुद्दे को लेकर झारखंड की राजनीति में गहराई से उतरने के लिए हमें सार्वजनिक दलों की सहयोगिता की आवश्यकता है। यह समय है कि हम सभी एक साथ मिलकर राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ें और एक सशक्त और ईमानदार झारखंड की दिशा में कदम बढ़ाएं।

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ED की पूछताछ के ख़िलाफ़ हेमंत सोरेन की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई, कहा- पहले हाई कोर्ट जाएं https://chaupalkhabar.com/2023/09/18/ed-sent-notice-to-hemant-soren-for-fourth-time-summons-challenging-petition-heard-in-supreme-court-today-plea-denied-by-the-court/ https://chaupalkhabar.com/2023/09/18/ed-sent-notice-to-hemant-soren-for-fourth-time-summons-challenging-petition-heard-in-supreme-court-today-plea-denied-by-the-court/#respond Mon, 18 Sep 2023 12:24:57 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1646 Jharkhand के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें घटने का नाम ही नही ले रही है . हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ के लिए इसबार चौथी बार समन भेजा है. ED ने समन भेजते हुए झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राजधानी रांची स्थित ED कार्यलय में आगामी …

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Jharkhand के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें घटने का नाम ही नही ले रही है . हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ के लिए इसबार चौथी बार समन भेजा है. ED ने समन भेजते हुए झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राजधानी रांची स्थित ED कार्यलय में आगामी 23 सितंबर को पूछताछ के लिए मौजूद होने का आदेश दिया है. ED द्वारा भेजे गए इस समन से प्रदेश में सियासत तेज हो गई है.

प्रवर्तन निदेशालय के समन को चुनौती देते हुए झारखण्ड के मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन ने पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल किया था, जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें झटका दे दिया. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया. माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हेमंत सोरेन की जमानत याचिका यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया की ,मामला राज्य से जुड़ा है तो पहले आप हाई कोर्ट जाइए.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इससे पहले भी ईडी रांची जमीन घोटाले मामेल तीन बार समन नोटिस भेज चुकी है. लेकिन हर बार निजी कारणों का हवाला देकर हेमंत सोरेन ने ईडी के सामने पेश होने में असमर्थतता जताई है. इसबार ED ने संबंधित केस में सीएम सोरेन को चौथी बार  समन भेजा था, लेकिन इसबार समन को चुनौती देते हुए हेमंत सोरेन सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए थे. जहाँ  सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पहले हाई कोर्ट जाने का आदेश दे दिया.

बता दें कि पिछले बार ईडी द्वारा भेजे गए समन के जवाब में सीएम सोरेन ने जी20 में राष्ट्रपति के द्वारा भेजे गए निमंत्रण भोज में शामिल होने का हवाला देते हुए, पूछताछ के लिए उपस्थित होने में अपनी असमर्थतता जताई थी.

मीडिया में प्रकाशित हुई एक खबर के मुताबिक, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ईडी की ओर से मांगे गये संपत्ति के ब्यौरे के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने यह कहके बात को टाल दिया कि वह पहले ही ईडी को संपत्ति का पूरा ब्यौरा दे चुके हैं. लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो वह फिर से एक कॉपी दे सकते हैं.  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में ई़़डी द्वारा की जा रही कार्रवाई पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है की , पुरे मामले में मालिकाना हक और उन पर कब्जा वाली प्रोपर्टी के सोर्स को लेकर पीएमएलए के तहत जांच की आड़ में उनको लगातार परेशान किया जा रहा है. हालांकि इस पुरे मामले में विस्तृत जानकारी ईडी और सीबीआई को पहले ही दी जा चुकी है.

 

Brajesh Kumar

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झारखंड में 32 ठिकाने पर ईडी की छापेमारी, वित्त मंत्री रामेशवर उरांव के बेटे के घर पर पडी रेड. https://chaupalkhabar.com/2023/08/23/ed-riads-today-on-32-places-of-jharkhand/ https://chaupalkhabar.com/2023/08/23/ed-riads-today-on-32-places-of-jharkhand/#respond Wed, 23 Aug 2023 09:31:35 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1471 झारखंड में शराब के अवैध कारोबार से अर्जित धन की हेराफेरी की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने आज सुबह से ही झारखंड की राजधानी में सात स्थानों सहित राज्य भर में 32 स्थानों पर छापेमारी शुरू कर दी। झारखंड की राजधानी में जिन जगहों पर छापेमारी की सूचना है, उनमें शराब …

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झारखंड में शराब के अवैध कारोबार से अर्जित धन की हेराफेरी की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने आज सुबह से ही झारखंड की राजधानी में सात स्थानों सहित राज्य भर में 32 स्थानों पर छापेमारी शुरू कर दी।


झारखंड की राजधानी में जिन जगहों पर छापेमारी की सूचना है, उनमें शराब कारोबारी योगेन्द्र तिवारी का हरमू के पटेल चौक स्थित आवास के अलावा देवघर और दुमका स्थित ठिकाने भी शामिल हैं.वित्त मंत्री रामेश्‍वर ओरांव के बेटे रोहित ओरांव के ठिकानों पर भी ईडी छापेमारी कर रही है.

ईडी सूत्रों के मुताबिक यह मामला तब उठा जब यह बात सामने आई कि छत्तीसगढ़ के शराब सलाहकार, आपूर्तिकर्ताओं और उत्पाद विभाग ने झारखंड सरकार को 450 करोड़ रुपये से अधिक के उत्पाद राजस्व का नुकसान पहुंचाया.

झारखंड में नई शराब नीति के सलाहकार अरुण पति त्रिपाठी पर छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का मास्टरमाइंड होने का आरोप है. उन पर केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य की सहमति के बिना झारखंड में सलाहकार बनने का आरोप है.

नियमानुसार झारखंड में सलाहकार बनने के लिए उन्हें अपने मूल विभाग और छत्तीसगढ़ सरकार से अनुमति लेनी होती थी. उन पर छत्तीसगढ़ में कई गंभीर आरोप हैं, जिनमें फर्जी कंपनी बनाने और छत्तीसगढ़ में होलोग्राम छापने का आरोप भी शामिल है. छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला मामले में जिन तीन कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं. झारखंड की शराब नीति में भी उनका सीधा दखल है.
ईडी जिन सात ठिकानों पर छापेमारी कर रही है, उनमें झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर ओरांव के बेटे और नेक्साजेन शोरूम के मालिक विनय सिंह भी शामिल हैं.

छापेमारी वाले ठिकानों में रांची के अलावा धनबाद, देवघर, दुमका और गोड्डा शामिल हैं. रांची में जिन ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है उनमें श्रवण जालान का आवास भी शामिल है.

 

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