NDA - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Tue, 01 Oct 2024 11:27:51 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg NDA - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 चिराग पासवान का बड़ा बयान, “मैं सिद्धांतों से समझौता नहीं करूंगा, पिता की तरह मंत्री पद छोड़ने को तैयार”. https://chaupalkhabar.com/2024/10/01/big-statement-of-chirag-paswan/ https://chaupalkhabar.com/2024/10/01/big-statement-of-chirag-paswan/#respond Tue, 01 Oct 2024 11:27:51 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5185 लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, चिराग पासवान ने एक बार फिर अपने स्पष्ट और सख्त राजनीतिक रुख का प्रदर्शन किया है। चिराग ने सोमवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह अपने पिता, रामविलास पासवान, की तरह सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेंगे और …

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लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, चिराग पासवान ने एक बार फिर अपने स्पष्ट और सख्त राजनीतिक रुख का प्रदर्शन किया है। चिराग ने सोमवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह अपने पिता, रामविलास पासवान, की तरह सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेंगे और यदि आवश्यक हुआ, तो मंत्री पद छोड़ने में भी संकोच नहीं करेंगे। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, और अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

चिराग पासवान ने साफ कहा कि वह अपने पिता के उदाहरण का पालन करते हुए, अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने भी उस समय मंत्री पद छोड़ दिया था, जब वह महसूस करते थे कि दलितों के हितों का उल्लंघन हो रहा है।” उनका इशारा स्पष्ट था कि वह भी उसी तरह का फैसला लेने के लिए तैयार हैं। चिराग ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे उनके पिता रामविलास पासवान ने यूपीए सरकार में दलितों के मुद्दों पर समझौता नहीं किया था और मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

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हालांकि, चिराग ने यह भी स्पष्ट किया कि वह वर्तमान में एनडीए गठबंधन के साथ बने रहेंगे, क्योंकि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा, “जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, तब तक हम एनडीए का हिस्सा रहेंगे।” पीएम मोदी की तारीफ करते हुए चिराग ने मौजूदा सरकार को दलितों के प्रति संवेदनशील बताया। उनका कहना था कि मोदी सरकार ने दलितों की समस्याओं और उनकी चिंताओं को प्राथमिकता दी है। चिराग पासवान हाजीपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं और उनकी पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। उनके पास पार्टी के 5 सांसदों का समर्थन है, जो उन्हें भाजपा के सहयोगी दल के रूप में मजबूती प्रदान करता है। हालांकि, इस बयान से यह संकेत मिलता है कि चिराग पासवान अपने राजनीतिक भविष्य के लिए स्वतंत्र रूप से सोच रहे हैं और अपनी पार्टी का जनाधार बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

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पीटीआई के सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान के इस बयान को उनकी राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि चिराग भाजपा नेतृत्व को यह संदेश देना चाहते हैं कि वह अपने चाचा पशुपति कुमार पारस के साथ भाजपा की बढ़ती नजदीकियों से पूरी तरह खुश नहीं हैं। यह भी संभव है कि चिराग अपनी पार्टी को भाजपा की छाया से बाहर निकालकर स्वतंत्र रूप से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ पर केजरीवाल और आप का विरोध, संजय सिंह ने भाजपा पर हमला बोला https://chaupalkhabar.com/2024/09/19/one-nation-one-election-at-kejar/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/19/one-nation-one-election-at-kejar/#respond Thu, 19 Sep 2024 12:55:07 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4995 केंद्र की मोदी सरकार ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद देश में इस मुद्दे पर चर्चा और विवाद तेज हो गए हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें पार्टी …

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केंद्र की मोदी सरकार ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद देश में इस मुद्दे पर चर्चा और विवाद तेज हो गए हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के खिलाफ अपनी आपत्ति जताई है। अरविंद केजरीवाल ने वीडियो में कहा कि भाजपा ने हाल ही में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ का नया जुमला पेश किया है और उन्होंने सवाल किया कि क्या इसकी वास्तव में आवश्यकता है? केजरीवाल ने तंज करते हुए कहा कि जब चुनाव होते हैं, तब नेता अपने वादों और आश्वासनों के साथ लोगों के दरवाजे पर आते हैं। वे हर चुनाव के समय जनता के सामने आकर मीठी बातें करते हैं और यह जनप्रतिनिधियों की एक जिम्मेदारी होती है।

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केजरीवाल ने यह भी कहा कि भाजपा के ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव का मकसद केवल यह है कि नेताओं को लंबे समय तक जनता से दूर रहने का मौका मिले। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब सभी चुनाव एक साथ होंगे, तो नेता साढ़े चार साल तक ‘ऐश’ करेंगे और उसके बाद जनता को कुछ चुनावी लाभ देकर वोट मांगेंगे। उन्होंने इस स्थिति की तुलना एक तानाशाही से की, जिसमें नेताओं को बिना किसी सवाल के सत्ता में बने रहने का मौका मिलेगा। अरविंद केजरीवाल ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के बजाय ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ और ‘वन नेशन-वन इलाज’ की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को समान शिक्षा और समान स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने यह सुझाव दिया कि सभी स्कूल और अस्पताल समान गुणवत्ता के हों, ताकि गरीब और अमीर के बीच भेदभाव समाप्त हो सके और हर किसी को बेहतर शिक्षा और इलाज मिल सके।

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आप ने ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के विरोध में बार-बार आवाज उठाई है। अब पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। संजय सिंह ने भाजपा पर भ्रष्टाचार और कमीशन के आरोप लगाए और कहा कि भाजपा ‘वन नेशन, वन करप्शन’ और ‘वन नेशन, वन कमीशन’ की पार्टी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और अब देश में ऐसी तानाशाही चाहते हैं जहां पांच साल तक कोई उनसे सवाल न कर सके। संजय सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर चुनाव नहीं होते, तो यूपी में किसानों के लिए ‘काले कानून’ वापस नहीं लिए जाते और पेट्रोल, डीजल, LPG सिलेंडर की कीमतें भी नहीं घटतीं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान नेताओं और पार्टियों की लाचारी जनता के हित में होती है, क्योंकि यह उन्हें काम करने और जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रेरित करता है।

इस प्रकार, ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस जारी है और विभिन्न दल अपनी-अपनी राय प्रस्तुत कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं का यह स्पष्ट कहना है कि इस प्रस्ताव के बजाय देश को शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार की दिशा में अधिक ध्यान देना चाहिए।

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कांग्रेस और एनसी पर PM मोदी का तीखा हमला कहा, जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के एजेंडे को लागू नहीं होने दिया जाएगा 370 की वापसी कोई भी शक्ति नहीं करवा सकती” https://chaupalkhabar.com/2024/09/19/congress-and-nc-are-tough/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/19/congress-and-nc-are-tough/#respond Thu, 19 Sep 2024 12:04:07 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4991 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के कटड़ा में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर जमकर हमला बोला। मोदी ने कहा कि दुनिया की कोई ताकत जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की वापसी नहीं करा सकती और पाकिस्तान के एजेंडे को राज्य में लागू नहीं …

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के कटड़ा में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर जमकर हमला बोला। मोदी ने कहा कि दुनिया की कोई ताकत जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की वापसी नहीं करा सकती और पाकिस्तान के एजेंडे को राज्य में लागू नहीं होने देंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर की बदलती तस्वीर की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि पहले लाल चौक पर आना और तिरंगा फहराना जोखिम भरा काम था, लेकिन अब वहां की स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। श्रीनगर के बाजारों में अब ईद और दीवाली दोनों की रौनक देखने को मिलती है और लाल चौक पर देर शाम तक चहल-पहल रहती है। इस क्षेत्र में रिकॉर्ड संख्या में टूरिस्ट भी आ रहे हैं।

मोदी ने जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य बनाने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने संसद में इस घोषणा को दोहराया और कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा फिर से मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस और एनसी पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान ने खुद इन पार्टियों की पोल खोल दी है, क्योंकि पाकिस्तान का समर्थन कांग्रेस और एनसी के एजेंडे के साथ मेल खाता है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद आतंकवाद और अलगाववाद कमजोर पड़ गए हैं। उन्होंने माता के भक्तों पर हालिया हमले का भी जिक्र किया और शहीद विजय कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर अब स्थायी शांति की ओर बढ़ रहा है और आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त होगा।

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मोदी ने रियासी और उधमपुर के लोगों को संबोधित करते हुए कांग्रेस, एनसी और पीडीपी पर आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने चिनाब ब्रिज के निर्माण की फाइल को दबा दिया था। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय स्वीकृत हुआ यह पुल अब एक शानदार सुविधा और आकर्षण का केंद्र बन चुका है। कांग्रेस पर हमला करते हुए मोदी ने कहा कि यह पार्टी केवल वोट बैंक की राजनीति करती है और डोगरा विरासत पर हमला करने वाली है। उन्होंने कांग्रेस के शाही परिवार को भ्रष्ट करार दिया और कहा कि यह परिवार भारत में भ्रष्टाचार की जड़ है। मोदी ने कांग्रेस के शाही परिवार के एक सदस्य द्वारा विदेश में देवी-देवताओं के प्रति अपमानजनक बयान देने की भी आलोचना की।

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प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भाजपा ही है जिसने दशकों से चले आ रहे भेदभाव को खत्म किया है और जम्मू-कश्मीर की आस्था और संस्कृति को सम्मान देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारें हमेशा वोटों के लिए आस्था और संस्कृति को दांव पर लगाती रही हैं। अंत में, मोदी ने जनता से कांग्रेस, पीडीपी और एनसी के खिलाफ मतदान करने की अपील की और कहा कि इन पार्टियों की राजनीतिक विरासत का सूर्य अस्त करना आवश्यक है। उन्होंने भाजपा को कमल के निशान को चुनने का आह्वान किया और कहा कि यह चुनाव जम्मू-कश्मीर के भविष्य को तय करने का है।

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वन नेशन, वन इलेक्शन, इलेक्शन’, भारतीय चुनाव प्रणाली में बड़ा बदलाव? https://chaupalkhabar.com/2024/09/16/one-nation-one-election-election/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/16/one-nation-one-election-election/#respond Mon, 16 Sep 2024 07:29:31 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4899 ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, एक चुनाव) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के प्रमुख एजेंडों में से एक है। इस विचार का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराना है। सरकार तेजी से इस दिशा में काम कर रही है, और उम्मीद जताई जा रही है कि मोदी …

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‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, एक चुनाव) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के प्रमुख एजेंडों में से एक है। इस विचार का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराना है। सरकार तेजी से इस दिशा में काम कर रही है, और उम्मीद जताई जा रही है कि मोदी सरकार अपने वर्तमान कार्यकाल (मोदी 3.0) में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक पेश कर सकती है। इसका मतलब यह है कि देशभर के सभी चुनाव एक ही समय पर होंगे, जो बार-बार चुनाव कराने की प्रक्रिया को सरल बना सकता है। मोदी सरकार वर्तमान में अपने सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जेडीयू (JDU) और तेलुगू देशम पार्टी (TDP) जैसी प्रमुख पार्टियों का सहयोग भी है। ये पार्टियां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा हैं और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के विचार पर सरकार का समर्थन कर रही हैं। बताया जा रहा है कि एनडीए में शामिल सभी दल इस अवधारणा के पक्ष में हैं और इसके कार्यान्वयन के लिए तैयार हैं।

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यह विचार केवल सरकार का एजेंडा ही नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे बार-बार जनता और अन्य राजनीतिक दलों के समक्ष प्रस्तुत किया है। बीजेपी के 2019 लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का वादा किया गया था। इस साल स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में पीएम मोदी ने राजनीतिक दलों से इस दिशा में साथ आने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि “समय की मांग है कि हम एक राष्ट्र, एक चुनाव के संकल्प को हासिल करें।” इससे चुनावों की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकार ने इस मुद्दे पर अध्ययन और विचार के लिए एक समिति गठित की, जिसकी अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने की। इस समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने सुझाव दिया है कि पहले लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं। इसके बाद 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनावों का आयोजन किया जाना चाहिए, जिससे सभी स्तरों के चुनाव एक निश्चित समय सीमा में संपन्न हो सकें।

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‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मुख्य उद्देश्य चुनावों की आवृत्ति को कम करना और संसाधनों की बचत करना है। बार-बार चुनाव कराने से सरकार और जनता दोनों पर वित्तीय और प्रशासनिक बोझ पड़ता है। एक साथ चुनाव कराने से प्रशासनिक लागत कम होगी और विकास योजनाओं के संचालन में भी रुकावटें कम होंगी। हालांकि, इस प्रस्ताव के खिलाफ भी कुछ तर्क दिए जा रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि इससे क्षेत्रीय पार्टियों को नुकसान हो सकता है और स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय मुद्दों के नीचे दबा दिया जाएगा। इसके अलावा, यह भी तर्क दिया जा रहा है कि एक साथ चुनाव कराने से संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

 

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भाजपा की आलोचना और जन सुराज की चुनौती,प्रशांत किशोर की राजनीति पर चर्चा. https://chaupalkhabar.com/2024/09/05/criticism-of-bjp-and-public-surra/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/05/criticism-of-bjp-and-public-surra/#respond Thu, 05 Sep 2024 10:42:15 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4684 प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जो अभी तक आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं हुई है, ने बिहार में प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच ‘बी टीम’ का तमगा प्राप्त किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किशोर पर हमला करते हुए उनकी पार्टी को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ‘बी टीम’ करार दिया है। यह आरोप …

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प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जो अभी तक आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं हुई है, ने बिहार में प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच ‘बी टीम’ का तमगा प्राप्त किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किशोर पर हमला करते हुए उनकी पार्टी को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ‘बी टीम’ करार दिया है। यह आरोप भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने ट्विटर अकाउंट पर किया। मालवीय ने अपने ट्वीट में लिखा, “हिंदुस्तान की राजनीति में एक और मुस्लिम परस्त पार्टी का उदय हो चुका है। इस बार बिहार में! जैसे ही कोई हिंदू नेता कैफी या जालीदार टोपी पहन लेता है, तो समझ लेना चाहिए कि उसे मुसलमानों की भलाई नहीं, सिर्फ उनका वोट चाहिए। बिहार में जन सुराज और राजद, एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। भाजपा और एनडीए ही एकमात्र राष्ट्रवादी विकल्प है।” यह बयान भाजपा की ओर से किशोर को निशाना बनाने का नवीनतम प्रयास है, जो आगामी बिहार चुनाव के मद्देनजर हो रहा है।

भाजपा को किशोर के मुसलमानों को प्राथमिकता देने के आरोप से अधिक चिंता ऊंची जातियों के उनकी ओर आकर्षित होने की संभावनाओं को लेकर है। किशोर ने बिहार में कम से कम 40 मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारने का वादा किया है। इसके अलावा, किशोर ने जुलाई में 40 महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारने की घोषणा की है, जो भाजपा और उसके सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है। भाजपा के नेतृत्व को किशोर की संगठनात्मक तैयारी और 1 करोड़ सदस्यों के साथ जन सुराज को लॉन्च करने की घोषणा ने ‘घबराहट’ में डाल दिया है। यह घटना उस समय हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के बावजूद भाजपा ने बिहार की पांच लोकसभा सीटें — पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, औरंगाबाद और सासाराम — खो दी थीं।

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किशोर की घोषणा को राजद के मुस्लिम-यादव वोट बैंक को लक्षित करने की योजना के रूप में देखा गया है। बिहार की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत है और वह सब बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय जनता दल को वोट देते हैं, केवल नीतीश कुमार की जेडी(यू) के समर्थकों के। इसके अलावा किशोर के भाषण का दूसरा हिस्सा यह रहा जिसमें उन्होंने कहा, की “भाजपा को हराने के लिए मुसलमानों को गांधी, आंबेडकर, लोहिया और जेपी (जयप्रकाश नारायण) की विचारधारा को अपनाना होगा” जिसे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को गंभीरता से लिया है। किशोर ने 2014 में नरेंद्र मोदी की जीत में योगदान दिया था, लेकिन 2015 से 2021 तक उन्होंने भाजपा के खिलाफ लड़ने वाली पार्टियों और नेताओं की जीत में योगदान किया। किशोर का कहना है कि भाजपा ने केवल 37 प्रतिशत वोटों के साथ दिल्ली में सरकार बनाई, जबकि हिंदू आबादी 80 प्रतिशत है, इसका मतलब है कि 40 प्रतिशत हिंदुओं ने भाजपा के खिलाफ और नफरत की राजनीति के खिलाफ वोट दिया।

किशोर का उद्देश्य विपक्ष की जगह लेने का है, जैसा कि राजद के तेजस्वी यादव पर उनके लगातार हमलों से स्पष्ट है। साथ ही, उनकी नजर भाजपा के ऊंची जातियों के वोट बैंक पर भी है। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने किशोर पर आरोप लगाया है कि वह भाजपा की ‘बी टीम’ हैं। “यह लोकसभा चुनावों से स्पष्ट है जब उन्होंने भाजपा और मोदी की प्रशंसा की, लेकिन उन्हें हमारे आधार का कोई वोट नहीं मिलेगा।” जन सुराज के एक पदाधिकारी द्वारा कहा गया की नीतीश कुमार एक घटती हुई ताकत हैं।और नीतीश के जाने के बाद बिहार में दो पार्टियां ही बची रहेंगी जिनमें से एक है राजद और दूसरी है भाजपा। और देखा जाए तो भाजपा अपनी विचारधारा और लोकप्रिय नेतृत्व वाले विशाल संगठन के सहारे ही वहाँ अपनी मज़बूती को बनाये हुए है। तेजस्वी के स्थान पर (जन सुराज के लिए) अधिक गुंजाइश है।”

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जुलाई में, राजद के दिग्गज नेता जगदानंद सिंह ने एक पत्र लिखकर जन सुराज को भाजपा की ‘टीम बी’ करार दिया था और राजद के सदस्यों के किशोर के प्रति निष्ठा बदलने की चिंता जताई थी। पिछले पांच महीनों में कई प्रमुख राजद नेता जैसे देवेंद्र प्रसाद यादव, रामबली चंद्रवंशी, अब्दुल मजीद और रिवाज अंसारी जन सुराज में शामिल हो चुके हैं। किशोर के साथ जुड़ने वालों में से है कर्पूरी ठाकुर की पोती डॉ. जागृति और पूर्व आईपीएस अधिकारी रही आनंद मिश्रा एव अभिनेत्री अक्षरा सिंह शामिल हैं। बीजेपी के उपाध्यक्ष ने एक मीडिया रिपोर्ट में बताया की “प्रशांत किशोर के पास पैसा और जगह है। और हर पार्टी के नेता जो नाराज़ हैं या जिन्हें टिकट नहीं मिल रहा है, वह यह सब देखकर उनके साथ आ जाएंगे। लालू के समर्थक प्रतिबद्ध हैं; यादव भाजपा को वोट नहीं देंगे। और यहां तक कि मुसलमान वोटर भी उन्हें वोट नहीं देंगे क्योंकि उन्हें मालूम है कि वह भी भाजपा को नहीं हरा सकते।”

उन्होंने कहा कि किशोर उच्च जाति के मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए वे गांधी और आंबेडकर की प्रशंसा कर रहे हैं। भाजपा के एक महासचिव ने कहा कि किशोर की यात्रा चंपारण, सारण और मिथिला जैसे भाजपा के गढ़ों में भी घूमी है। उन्होंने कहा, “वो पहले आरजेडी के गढ़ मगध और सीमांचल क्यों नहीं गए? वो जानते हैं कि ऊंची जातियों के पास राजनीति के लिए संसाधन हैं और उन्हें जीता जा सकता है।”

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भाजपा प्रदेश इकाई के एक नेता ने कहा कि किशोर बिहार में बदलाव की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अरविंद केजरीवाल की राह पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा, “किशोर बदलाव की कहानी का इस्तेमाल कर रहे हैं और कह रहे हैं कि बिहारियों ने पिछले 40 सालों में सभी पार्टियों को आजमाया है — चाहे वो आरजेडी हो, जेडी(यू) हो या भाजपा। वो बदलाव, रोजगार, युवाओं के पलायन, शिक्षा की कमी और एनडीए के 25 साल के शासन के बावजूद उद्योग की कमी के बारे में अपनी बात रख रहे हैं और यह गति पकड़ रहा है।”

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वक्फ संशोधन विधेयक 2024: विपक्ष के विरोध और सरकार के तर्कों के बीच लोकसभा में पेश किया गया वक्फ संशोधन विधेयक. https://chaupalkhabar.com/2024/08/08/waqf-amendment-bill-2024-opposition/ https://chaupalkhabar.com/2024/08/08/waqf-amendment-bill-2024-opposition/#respond Thu, 08 Aug 2024 09:16:27 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4216 केंद्रीय अल्पसंख्यक और कानून मंत्री किरेन रिजीजू ने गुरुवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पेश किया। लोकसभा में इस विधेयक को पेश करते समय काफी हंगामा हुआ, जहां विपक्षी दलों ने इसे संविधान की बुनियादी धारणाओं पर हमला बताते हुए विरोध किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) समेत …

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केंद्रीय अल्पसंख्यक और कानून मंत्री किरेन रिजीजू ने गुरुवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पेश किया। लोकसभा में इस विधेयक को पेश करते समय काफी हंगामा हुआ, जहां विपक्षी दलों ने इसे संविधान की बुनियादी धारणाओं पर हमला बताते हुए विरोध किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) समेत कई विपक्षी दलों ने इस विधेयक को अस्वीकार्य बताते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के प्रमुख नेता केसी वेणुगोपाल ने इस विधेयक को संविधान की बुनियाद पर हमला करार दिया। उन्होंने लोकसभा में कहा, “हम हिंदू हैं, लेकिन हम दूसरे धर्मों की आस्था का भी सम्मान करते हैं। यह विधेयक महाराष्ट्र और हरियाणा में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। पिछली बार जनता ने साफ संदेश दिया था, लेकिन सरकार ने उससे कुछ नहीं सीखा। यह विधेयक संघीय ढांचे पर सीधा आक्रमण है।”

उन्होंने आगे यह भी कहा कि इस विधेयक के जरिए सरकार वक्फ गवर्निंग काउंसिल में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का प्रावधान कर रही है, जोकि धर्म की स्वतंत्रता पर हमले को दर्शाता है। “इससे पहले आप ईसाइयों के पास जाएंगे, फिर जैनियों के पास। यह विधेयक विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दे रहा है, जिसे भारत की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी,” वेणुगोपाल ने कहा। वहीं, सरकार ने इस विधेयक को मुस्लिम विरोधी मानने से इनकार किया है। जेडीयू और टीडीपी जैसी एनडीए की सहयोगी पार्टियों ने विधेयक का समर्थन किया। जेडीयू के सांसद ललन सिंह ने भी इस पर अपना पक्ष रखा और कहा, की “यह विधेयक मुस्लिम विरोधी नहीं है, बल्कि इस विधेयक को वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लाया गया है। विपक्ष इसे मंदिरों के मुद्दे से जोड़ रहा है, जो कि बिलकुल निराधार है। सरकार का अधिकार है कि वह किसी भी निरंकुश संस्था पर नियंत्रण के लिए कानून बनाए।”

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ने भी इस विधेयक को मुसलमानों के खिलाफ मानने से इनकार करते हुए कहा, “यह मुसलमानों के खिलाफ कैसे हो सकता है? यह कानून पारदर्शिता लाने के लिए बनाया जा रहा है। विपक्ष इसे मंदिरों के साथ तुलना कर रहा है और मुख्य मुद्दे से भटका रहा है।” लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की एक बैठक बुलाई जिसमें वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा की गई। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और हिबी ईडेन ने इस विधेयक का विरोध करने के लिए नियम 72 के तहत एक नोटिस भी दिया था।

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कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इस विधेयक के जरिए राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों को सीमित करने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, सर्वेक्षण और अतिक्रमणों को हटाने के मुद्दों को प्रभावी ढंग से निपटाने के बजाय सरकार इन शक्तियों को कमजोर कर रही है। वेणुगोपाल ने कहा, “यह विधेयक संघीय ढांचे पर सीधा आक्रमण है और संविधान की बुनियाद पर चोट करता है।” सरकार का दावा है कि वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, सर्वेक्षण और अतिक्रमणों को हटाने के मुद्दों को हल करने के लिए यह विधेयक आवश्यक है। राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से इस विधेयक में कई प्रावधान किए गए हैं, जो वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

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संशोधन विधेयक 2024 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखा मतभेद देखने को मिल रहा है। जहां सरकार इसे वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक आवश्यक कदम मानती है, वहीं विपक्ष इसे धर्म की स्वतंत्रता और संविधान की मूल भावना पर हमला बताकर विरोध कर रहा है। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में माहौल गर्म रहा, और आने वाले दिनों में इस पर और अधिक बहस की संभावना है।

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अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला, कहा ‘जिसने हराया, उसे हटा नहीं पा रहे हैं’ https://chaupalkhabar.com/2024/07/30/akhilesh-yadav-of-bjp-on-us/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/30/akhilesh-yadav-of-bjp-on-us/#respond Tue, 30 Jul 2024 11:50:44 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4117 समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अंदरूनी खींचतान पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा, “जिसने हराया, उसे हटा नहीं पा रहे हैं।” अखिलेश यादव ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पर …

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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अंदरूनी खींचतान पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा, “जिसने हराया, उसे हटा नहीं पा रहे हैं।” अखिलेश यादव ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान यह दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार “चलने वाली नहीं, गिरने वाली सरकार” है। उन्होंने कहा कि यह सरकार ‘साइकिल’ के भरोसे चल रही है। साइकिल समाजवादी पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) दोनों का चुनाव चिन्ह है, जिसमें तेदेपा इस सरकार का मुख्य घटक दल है।

यादव ने भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की प्रधानमंत्री के साथ बैठक के एक वीडियो का हवाला देते हुए कहा, “जबसे उत्तर प्रदेश में हारे हैं तब से कोई नमस्कार नहीं कर रहा है। वह वीडियो देखा आपने, कोई किसी को नमस्कार नहीं कर रहा है, कोई किसी को देख नहीं रहा है।” उन्होंने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के साथ नोकझोंक के दौरान प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा, “आप अपने आप को ताकतवर कहते थे, लेकिन जिसने हराया, उसे हटा नहीं पा रहे हैं।” अखिलेश यादव ने दावा किया कि केंद्र की सरकार चलने वाली नहीं है, बल्कि गिरने वाली है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “साइकिल ही आपकी सरकार चलवा रही है। जिस दिन साइकिल हट गई, सरकार कैसे चलाएंगे।”

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अखिलेश यादव ने कटाक्ष किया, कि मोदी सरकार का यह 11वां बजट है, लेकिन फिर भी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।  “सरकार बनने के बाद जो खुशी दिखाई देनी चाहिए थी, वह भी दिखाई नहीं दे रही है।” यादव ने आरोप लगाया कि बजट में युवाओं, बेरोजगारों और गांवों के लिए कुछ भी नहीं है तथा महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए भी कुछ नहीं किया गया है। “अगर 10 साल में सबकुछ इतना अच्छा हुआ है तो आप भूख सूचकांक में कहां खड़े हैं? आपने ‘मेक इन इंडिया’ का सबसे बड़ा सपना दिखाया। उत्तर प्रदेश को कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिला, हमें सिर्फ प्रधानमंत्री जी मिले हैं।”

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उन्होंने दावा किया कि निजीकरण से नौकरियां बढ़ने का सपना दिखाया गया था, लेकिन नौकरियां कम होती चली गईं। यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम से यह साबित हो रहा है कि सरकार ने कितना काम किया है। उन्होंने रेल हादसों का जिक्र करते हुए कहा, “एक और रेल दुर्घटना की खबर सुनी है। जबसे यह सरकार आई है तब से रेल दुर्घटना और पेपर लीक में स्पर्धा चल रही है कि कौन आगे जाएगा।” यादव ने सरकार के किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर सवाल उठाते हुए कहा, “11 साल हो गए, क्या किसानों की आय दोगुनी हो गई? अगर आप एमएसपी दे रहे हैं तो उसकी कानूनी गारंटी भी दीजिए।” उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए बड़े-बड़े समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं दिख रहा है। अखिलेश यादव ने ‘अग्निपथ’ योजना पर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा के केंद्र में आते ही इस योजना को खत्म कर दिया जाएगा। उनका कहना था कि समाजवादियों को यह योजना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।

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बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा, केंद्रीय मंत्री ने दिया लिखित जवाब…. https://chaupalkhabar.com/2024/07/22/rate-of-bihar-as-special-state/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/22/rate-of-bihar-as-special-state/#respond Mon, 22 Jul 2024 10:55:32 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4000 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लंबे समय से चली आ रही मांग एक बार फिर ठुकरा दी गई है। केंद्र सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से साफ मना कर दिया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से जानकारी दी कि अंतर-मंत्रालयी समूह …

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लंबे समय से चली आ रही मांग एक बार फिर ठुकरा दी गई है। केंद्र सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से साफ मना कर दिया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से जानकारी दी कि अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता। इस उत्तर ने राज्य सरकार और जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और बिहार के विशेष राज्य का दर्जा पाने की दिशा में एक और बाधा खड़ी कर दी है। नीतीश कुमार ने कई बार इस मुद्दे को उठाया है और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस दर्जे से बिहार को केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता और विकास के अवसर मिलेंगे, जो कि राज्य की पिछड़ी स्थिति को सुधारने में मददगार साबित होंगे। नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को विभिन्न मंचों पर उठाया है और केंद्र सरकार से बार-बार इस पर विचार करने की अपील की है। बावजूद इसके, उनकी मांग को बार-बार ठुकराया जा रहा है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की नीति के अनुसार विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए किसी भी राज्य को अतिरिक्त लाभ या सहायता देने की योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि 2012 में आईएमजी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की कोई आवश्यकता नहीं है और वर्तमान स्थिति में ऐसा कोई भी निर्णय लेना सही नहीं होगा। आईएमजी की 2012 की रिपोर्ट में बिहार की विकास आवश्यकताओं और उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का गहन विश्लेषण किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि बिहार की पिछड़ी स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करने की जरूरत है, और विशेष दर्जा देने से इस मुद्दे का समाधान नहीं होगा। रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया था कि विशेष राज्य का दर्जा देने से राज्य के विकास में एक स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि यह सिर्फ एक अस्थायी उपाय साबित हो सकता है।

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बिहार के विभिन्न हिस्सों में इस निर्णय को लेकर निराशा और आक्रोश का माहौल है। कई लोग मानते हैं कि बिहार की विशेष स्थिति को देखते हुए उसे विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष दर्जा मिलने से राज्य को आर्थिक सहायता और अन्य संसाधन प्राप्त होते, जिससे राज्य की विकास दर में तेजी आ सकती थी। राज्य सरकार और स्थानीय नेताओं ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार को बिहार की स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए और राज्य को विशेष दर्जा देने के मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर बिहार को विशेष दर्जा नहीं दिया जाता है, तो राज्य सरकार को और अधिक संघर्ष करना पड़ेगा और बिहार के विकास के लिए अन्य उपायों की तलाश करनी होगी।

 

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“कांवड़ यात्रा के दौरान नेम प्लेट आदेश पर विवाद, योगी सरकार की आलोचना और एनडीए में मतभेद” https://chaupalkhabar.com/2024/07/20/during-the-kanwar-yatra/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/20/during-the-kanwar-yatra/#respond Sat, 20 Jul 2024 11:44:04 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3974 उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानदारों और ढाबा मालिकों को नेम प्लेट लगाने के आदेश के बाद योगी सरकार की आलोचना हो रही है। इस मुद्दे पर एनडीए के भीतर भी विभिन्न मत हैं। जहां कुछ दलों ने इसका विरोध किया है, वहीं कुछ दलों ने इसका समर्थन किया है। उत्तर प्रदेश की …

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उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानदारों और ढाबा मालिकों को नेम प्लेट लगाने के आदेश के बाद योगी सरकार की आलोचना हो रही है। इस मुद्दे पर एनडीए के भीतर भी विभिन्न मत हैं। जहां कुछ दलों ने इसका विरोध किया है, वहीं कुछ दलों ने इसका समर्थन किया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कांवड़ यात्रा वाले मार्ग पर दुकानदारों और ढाबा मालिकों को अपनी दुकानों के आगे नेम प्लेट लगाने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद इसकी खूब आलोचना हो रही है। विपक्षी दलों ने इस फैसले को समाज को बांटने वाला बताते हुए इसका विरोध किया है। एनडीए के सहयोगी दलों में भी इसको लेकर अलग-अलग राय है। एनडीए में शामिल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) (एलजेपी (आर)) ने इस फैसले का विरोध किया है। वहीं, सहयोगी पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने इसका समर्थन किया है और कहा है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश में ‘कांवड़ यात्रा’ मार्ग पर फल विक्रेताओं को उनके स्टॉलों पर अपना नाम लिखने के लिए कहे जाने में कुछ भी गलत नहीं दिखता है।

मांझी द्वारा इस फैसले से जुड़े विवाद को लेकर पूछे गए सवालो के उत्तर में यूपी सरकार का समर्थन किया गया । इसके बाद पार्टी प्रमुख मांझी दवारा कहा गया की “मैं अन्य दलों के लिए नहीं बोल सकता, परन्तु मुझे इस तरह के आदेश में कुछ भी गलत नहीं दिखाई नहीं दिया , यदि व्यवसायों में शामिल लोगों को अपना नाम और पता प्रमुखता से उजागर करने के लिए कहा जाता है तो इसमें नुकसान ही क्या है?”जिसके बाद उन्होंने आगे कहा, की “असल में, नेम प्लेट से खरीदारों के लिए पसंदीदा स्टॉल देखना आसान हो जाएगा। और इस मामले को धर्म के चश्मे से देखना कतई गलत है।

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जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता के सी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे का जिक्र करते हुए यूपी पुलिस के आदेश की आलोचना की थी और कहा था कि बिहार, झारखंड और कांवड़ यात्रा से जुड़े अन्य राज्यों में इसी तरह के निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। त्यागी ने कहा कि यूपी सरकार का यह कदम समाज में विभाजन पैदा कर सकता है और लोगों के बीच संदेह और अविश्वास को बढ़ा सकता है। इस फैसले के खिलाफ उठ रही आवाजों के बावजूद, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ने अपने समर्थन को दोहराया है। मांझी का मानना है कि नेम प्लेट्स का उपयोग व्यापार में पारदर्शिता लाने और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस आदेश को धर्म के दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए।

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विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उनका कहना है कि इस तरह के आदेश से समाज में धार्मिक विभाजन बढ़ सकता है। कुछ दलों का यह भी कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य विशेष समुदाय को निशाना बनाना है। विपक्षी नेताओं ने यूपी सरकार से इस आदेश को वापस लेने की मांग की है और इसे समाज में सामंजस्य बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया है। हालांकि, योगी सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि यह आदेश केवल व्यापार में पारदर्शिता लाने और ग्राहकों के अनुभव को सुधारने के लिए है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का उद्देश्य किसी भी समुदाय को निशाना बनाना नहीं है।

इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के अलग-अलग मत होने के बावजूद, यूपी सरकार ने अपने फैसले को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है। सरकार का कहना है कि नेम प्लेट्स लगाने से व्यापार में पारदर्शिता आएगी और ग्राहक आसानी से अपने पसंदीदा दुकानों और स्टॉल्स को पहचान सकेंगे।

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राज्यसभा में भाजपा को झटका, ताकत घटकर 86 सीटें, महत्वपूर्ण बिल पास कराने के लिए मित्र दलों पर निर्भरता बढ़ी https://chaupalkhabar.com/2024/07/15/shock-to-bjp-in-rajya-sabha/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/15/shock-to-bjp-in-rajya-sabha/#respond Mon, 15 Jul 2024 11:16:50 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3914 राज्यसभा में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक बड़ा झटका लगा है। चार मनोनीत सदस्यों की सेवानिवृत्ति के बाद अब भाजपा के पास उच्च सदन में मात्र 86 सीटें रह गई हैं, जबकि एनडीए के सदस्यों की कुल संख्या 101 हो गई है। इस परिवर्तन से आगामी बजट सत्र में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित …

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राज्यसभा में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक बड़ा झटका लगा है। चार मनोनीत सदस्यों की सेवानिवृत्ति के बाद अब भाजपा के पास उच्च सदन में मात्र 86 सीटें रह गई हैं, जबकि एनडीए के सदस्यों की कुल संख्या 101 हो गई है। इस परिवर्तन से आगामी बजट सत्र में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। राज्यसभा की कुल क्षमता 245 सीटों की है, जिनमें से 19 सीटें वर्तमान में खाली हैं। इनमें 4 सीटें जम्मू-कश्मीर की हैं, जहां विधानसभा चुनाव के बाद ही राज्यसभा चुनाव होंगे। शेष 15 सीटों में 4 सीटें नामित सदस्यों की हैं और 11 सीटों पर महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, त्रिपुरा, राजस्थान, हरियाणा और असम में चुनाव होना है। भाजपा के लिए मनोनीत श्रेणी की खाली सीटों को जल्द से जल्द भरना महत्वपूर्ण है, ताकि मित्र दलों पर निर्भरता को कम किया जा सके।

जो चार मनोनीत सदस्य सेवानिवृत्त हुए हैं, उनमें राकेश सिन्हा, राम शकल, सोनल मानसिंह और महेश जेठमलानी शामिल हैं। इन सदस्यों ने राज्यसभा में मनोनीत होने के बाद औपचारिक रूप से भाजपा का साथ दिया था। मनोनीत श्रेणी में गुलाम अली एक और ऐसे सदस्य हैं जो भाजपा का समर्थन करते हैं और वे सितंबर 2028 में सेवानिवृत्त होंगे। भाजपा को महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने के लिए एनडीए के सात गुटनिरपेक्ष मनोनीत सदस्यों, दो निर्दलीय और एआईएडीएमके और वाईएसआरसीपी जैसे मित्र दलों के समर्थन की आवश्यकता होगी। मौजूदा सदन में, सात गुटनिरपेक्ष सदस्यों ने खुद को भाजपा का हिस्सा नहीं बताया है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी के किसी भी कानून या प्रस्ताव को पारित कराने में उनका समर्थन महत्वपूर्ण है।

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आगामी बजट सत्र में भाजपा को अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कई कदम उठाने होंगे। इसके लिए पार्टी को मनोनीत श्रेणी की खाली सीटों को शीघ्रता से भरना होगा। इसके अतिरिक्त, पार्टी को अपने मित्र दलों के समर्थन को सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास करने होंगे। राज्यसभा में मौजूदा स्थिति भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। पार्टी को अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए न केवल अपनी रणनीति को पुनः मूल्यांकित करना होगा, बल्कि मित्र दलों के साथ तालमेल भी बिठाना होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इन चुनौतियों का सामना कैसे करती है और अपनी ताकत को फिर से कैसे बढ़ाती है।

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