Nitish Kumar - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Mon, 09 Sep 2024 10:14:53 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg Nitish Kumar - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 बिहार की राजनीतिक धारा, नीतीश और तेजस्वी की बैठक से अगले विधानसभा चुनावों की संभावनाएं. https://chaupalkhabar.com/2024/09/09/political-stream-of-bihar/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/09/political-stream-of-bihar/#respond Mon, 09 Sep 2024 10:14:53 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4758 बिहार की राजनीति ने हमेशा राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस राज्य में लंबे समय से प्रमुख भूमिका में रहे हैं। उन्होंने बार-बार गठबंधनों और राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में कुशलता दिखाई है। हाल ही में, नीतीश कुमार की तेजस्वी यादव के साथ …

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बिहार की राजनीति ने हमेशा राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस राज्य में लंबे समय से प्रमुख भूमिका में रहे हैं। उन्होंने बार-बार गठबंधनों और राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में कुशलता दिखाई है। हाल ही में, नीतीश कुमार की तेजस्वी यादव के साथ बैठक ने बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर नई अटकलें शुरू कर दी हैं। नीतीश कुमार ने 2023 में जाति सर्वेक्षण के आधार पर दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के लिए आरक्षण को 65 प्रतिशत कर दिया था। हालांकि, पटना उच्च न्यायालय ने इस फैसले को रद्द कर दिया, और मामला सुप्रीम कोर्ट में है। तेजस्वी यादव ने इस फैसले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने का आग्रह किया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

नीतीश की तेजस्वी के साथ हालिया बैठक का औपचारिक बहाना नए सूचना आयुक्त के चयन पर चर्चा था। लेकिन नीतीश ने भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के शहर में होने के दौरान कहा कि उन्होंने पहले गलती की थी, जो अब नहीं होगी। यह बयान नीतीश के दोहरी रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने भाजपा से संबंध सुधारने की कोशिश की है।

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भाजपा ने नीतीश को खुश रखने के लिए केंद्रीय बजट में बिहार के लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया और 2025 के राज्य चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ने की घोषणा की। इसके बावजूद, नीतीश की पार्टी जेडी(यू) के भीतर भाजपा के प्रति सही संतुलन बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। जेडी(यू) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि तेजस्वी से मुलाकात को अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।

इस बीच, चिराग पासवान और उनकी पार्टी ने दलित वोटों को मजबूत करने के लिए आक्रामक रुख अपनाया है। चिराग ने सुप्रीम कोर्ट के उप-कोटा आदेश का विरोध किया और दलितों के अधिकारों के मुद्दे को उठाया। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि चिराग पासवान की महत्त्वाकांक्षाओं और नीतीश कुमार की चतुर राजनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिशें लगातार चल रही हैं।

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नए राजनीतिक समीकरणों के बीच, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की बैठक ने यह संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में आगामी समय में और भी हलचल देखने को मिल सकती है। यह स्पष्ट है कि सभी प्रमुख दल अपने-अपने चुनावी हितों को ध्यान में रखते हुए रणनीतियों में बदलाव कर रहे हैं।

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जद(यू) में अंदरूनी कलह, भाजपा के साथ गठबंधन और विचारधारा के बीच फंसी नीतीश कुमार की पार्टी. https://chaupalkhabar.com/2024/09/07/internal-strife-in-jdu-bjp/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/07/internal-strife-in-jdu-bjp/#respond Sat, 07 Sep 2024 07:27:50 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4721 जनता दल (यूनाइटेड) [जद(यू)] के भीतर इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में दो धड़ों के बीच सत्ता संघर्ष उभर कर सामने आया है। एक ओर वे नेता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन को बनाए रखने के पक्षधर हैं, जबकि दूसरी …

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जनता दल (यूनाइटेड) [जद(यू)] के भीतर इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में दो धड़ों के बीच सत्ता संघर्ष उभर कर सामने आया है। एक ओर वे नेता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन को बनाए रखने के पक्षधर हैं, जबकि दूसरी ओर वे नेता हैं जो पार्टी की मूल विचारधारा पर समझौता करने के खिलाफ हैं। यह विवाद तब खुलकर सामने आया जब जद(यू) के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। केसी त्यागी ने मोदी सरकार के कुछ फैसलों, जैसे सिविल सेवाओं में लेटरल एंट्री, समान नागरिक संहिता, और सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण पर दिए गए फैसले का खुलकर विरोध किया। इसके अलावा, इजरायल और फिलिस्तीन पर भारत की विदेश नीति को लेकर भी उन्होंने तीखे सवाल उठाए। हालांकि, त्यागी के ये बयान जद(यू) की विचारधारा के अनुरूप ही थे, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के साथ पार्टी के समीकरण को बिगड़ने से रोकने के लिए उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया।

भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर जद(यू) के भीतर विवाद और भी गहरा हो गया है, खासकर तब जब पार्टी ने संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन किया। वक्फ संपत्ति पर कानून में संशोधन को लेकर पार्टी के अंदर मतभेद उभरकर सामने आए। कुछ नेताओं ने इस विधेयक का विरोध यह कहकर किया कि यह जद(यू) की मूल विचारधारा के खिलाफ है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने संसद में विधेयक का समर्थन किया, जबकि जद(यू) के अन्य नेता, जैसे विजय कुमार चौधरी, इससे असहमत थे। चौधरी ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को दूर किए बिना इस विधेयक को पारित नहीं किया जाना चाहिए। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले विजय कुमार चौधरी के इस बयान को पार्टी की आधिकारिक स्थिति के रूप में देखा गया। दूसरी ओर, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ज़मा खान ने मुस्लिम बच्चों के लिए नए स्कूल और वक्फ भूमि पर 21 मदरसों के निर्माण की योजना की घोषणा करके ललन सिंह के बयान का असर कम करने की कोशिश की।

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जद(यू) के अंदर यह सत्ता संघर्ष इस बात का संकेत है कि पार्टी के नेता अगले साल के विधानसभा चुनाव और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के एक नेता ने बताया कि एक धड़ा भाजपा के साथ गठबंधन बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा धड़ा मानता है कि भाजपा की मजबूरी है, इसलिए जद(यू) को अपनी पहचान और विचारधारा पर कायम रहना चाहिए। इस विभाजन के बीच पार्टी के कुछ नेता अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भाजपा के साथ मधुर संबंध बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, नीतीश कुमार एक अनुभवी और चतुर राजनेता हैं। वे पहले भी पार्टी के भीतर असहमति रखने वाले नेताओं, जैसे जॉर्ज फर्नांडिस और शरद यादव, को दरकिनार कर चुके हैं। पिछले साल ललन सिंह ने नीतीश कुमार के साथ मतभेदों की अफवाहों के चलते पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, पार्टी ने इन अफवाहों का खंडन किया था। नीतीश कुमार ने अपने करीबी सहयोगी संजय झा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है, ताकि विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को मजबूत किया जा सके।

विधानसभा चुनाव से पहले जद(यू) के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। वक्फ विधेयक पर मतभेद, त्यागी का इस्तीफा, और पार्टी के भीतर के असंतोष ने जद(यू) को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है। पार्टी के अंदर की एक और घटना, जिसने असंतोष को और बढ़ा दिया, वह थी 22 अगस्त को राज्य कार्यकारिणी सदस्यों की सूची का अचानक बदलाव। पहली सूची में 251 सदस्यों के नाम थे, लेकिन कुछ ही घंटों में इसे वापस लेकर नई सूची जारी की गई, जिसमें सदस्यों की संख्या घटाकर 115 कर दी गई। इस बदलाव ने पार्टी के अंदर और भी असंतोष पैदा कर दिया, क्योंकि ललन सिंह और अशोक चौधरी के कई समर्थकों को नई सूची से हटा दिया गया था। पार्टी ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह बदलाव उन नेताओं को हटाने के लिए किया गया, जो लोकसभा चुनावों के दौरान सक्रिय नहीं थे या जिनका प्रदर्शन असंतोषजनक था। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम सत्ता संतुलन बनाने के लिए उठाया गया था। अशोक चौधरी ने जहानाबाद संसदीय सीट पर हार के लिए भूमिहारों को जिम्मेदार ठहराते हुए विवाद खड़ा कर दिया। उनका बयान जद(यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार को पसंद नहीं आया, जिन्होंने उनकी आलोचना की और कहा कि नीतीश कुमार कभी जाति आधारित राजनीति नहीं करते हैं।

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बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। वे कुर्मी-कुशवाहा और अत्यंत पिछड़ी जातियों के गठबंधन के कारण राज्य की राजनीति में एक मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर चल रहे इस सत्ता संघर्ष को देखते हुए, नीतीश कुमार को जल्द से जल्द पार्टी के भीतर की दरारों को दूर करना होगा। नीतीश कुमार के नेतृत्व पर चर्चा करते हुए, पूर्व भाजपा उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक बार कहा था, “नीतीश कुमार हमेशा अपने मौजूदा साथी को मात देने के लिए दो खिड़कियां खुली रखते हैं।” इस बात को ध्यान में रखते हुए, विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश कुमार इस समय की चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं और उन्होंने पहले भी ऐसे कई राजनीतिक संकटों का सामना किया है।

पार्टी के सांसद रामप्रीत मंडल ने कहा, “त्यागी ने अवांछित रुख अपनाया, लेकिन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की संवेदनशीलता को देखते हुए पार्टी में आखिरकार नीतीश जी के विचार ही चलेंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे नेता क्या सोचते हैं।”

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बिहार की राजनीति में नई हलचल: नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की मुलाकात से उठी अटकलें, पुराना वीडियो बना चर्चा का केंद्र. https://chaupalkhabar.com/2024/09/06/new-solution-in-bihar-politics/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/06/new-solution-in-bihar-politics/#respond Fri, 06 Sep 2024 09:38:59 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4707 बिहार की राजनीति में हाल के दिनों में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। 4 सितंबर 2024 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से यह चर्चा शुरू हो …

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बिहार की राजनीति में हाल के दिनों में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। 4 सितंबर 2024 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से यह चर्चा शुरू हो गई है कि नीतीश कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं, जिससे भाजपा और नीतीश कुमार की दोस्ती में दरार आने की संभावना जताई जा रही है।

तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच यह मुलाकात अचानक और अप्रत्याशित थी, जिससे अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। इस मुलाकात के बाद राजद समर्थक सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार महागठबंधन में लौट सकते हैं, और इस तरह से बिहार की सियासत में नया मोड़ आ सकता है। हालांकि, इस मुलाकात का वास्तविक कारण क्या था, इसे लेकर तेजस्वी यादव ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात महज एक सामाजिक बातचीत थी और इसमें कोई बड़ा राजनीतिक इशारा नहीं था।

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हालांकि, इस मुलाकात के बाद भी राजनीतिक अटकलें कम नहीं हुई हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें नीतीश कुमार और लालू यादव की मुलाकात को हाल की बताया जा रहा है। इस वीडियो को कई लोगों ने शेयर किया और इसे बिहार की सियासी स्थिति पर बड़ा असर डालने वाला बताया। लेकिन जांच में पता चला कि यह वीडियो दो साल पुराना है। यह वीडियो 5 सितंबर 2022 का है, जब नीतीश कुमार लालू यादव से मिलने राबड़ी आवास पर गए थे, और तब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी। इसलिए, इस वीडियो की ताजगी के दावे पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही बिहार की सियासत में कई बदलाव हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल नीतीश कुमार और भाजपा के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। वर्तमान में बिहार में भाजपा और जेडीयू की डबल इंजन की सरकार है, जो अपने विकास कार्यों के लिए जानी जाती है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में कहा कि भाजपा की विचारधारा पर लोगों का भरोसा पूरी तरह से है। उन्होंने यह भी कहा कि 2005 के बाद बिहार में जो विकास हुआ है, वह नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के नेतृत्व में संभव हुआ है। उनके अनुसार, भाजपा ने जो भी वादे किए हैं, उन्हें पूरा भी किया है।

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वहीं, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने राजद पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लालू प्रसाद का कुशवाहा समाज के प्रति प्रेम ढकोसला है। उन्होंने दावा किया कि राजद के लुभावने भाषणों से जनता को भ्रमित किया जाता है, और कुशवाहा समाज को परिवारवादी राजनीति से बाहर रखना चाहिए। इस तरह से, बिहार की राजनीति में चल रही हलचल और सोशल मीडिया पर फैली अटकलों के बावजूद, फिलहाल कोई ठोस प्रमाण या आधिकारिक बयान नहीं आया है जो यह साबित कर सके कि नीतीश कुमार और भाजपा के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव होने वाला है। वर्तमान में, यह कह पाना मुश्किल है कि भविष्य में बिहार की सियासत में क्या मोड़ आएगा, लेकिन फिलहाल की स्थिति में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि नीतीश कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल होंगे।

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नीतीश कुमार की जदयू में बड़ा फेरबदल: प्रदेश कमेटी भंग, नई कमेटियों का गठन. https://chaupalkhabar.com/2024/08/24/nitish-kumar-in-jdu-big/ https://chaupalkhabar.com/2024/08/24/nitish-kumar-in-jdu-big/#respond Sat, 24 Aug 2024 10:32:43 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4428 बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने शनिवार को एक अहम निर्णय लिया है। पार्टी ने प्रदेश कमेटी और राजनीतिक सलाहकार समिति को भंग कर दिया है। इसके साथ ही नई कमेटियों का गठन भी कर दिया गया है, …

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बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने शनिवार को एक अहम निर्णय लिया है। पार्टी ने प्रदेश कमेटी और राजनीतिक सलाहकार समिति को भंग कर दिया है। इसके साथ ही नई कमेटियों का गठन भी कर दिया गया है, जिसमें कई नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस संबंध में एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। जदयू के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर भी इस आदेश पत्र को साझा किया गया है। जारी किए गए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश जदयू की प्रदेश कमेटी और प्रदेश राजनीतिक सलाहकार समिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। इसके बाद, पार्टी ने नई कमेटी का गठन करते हुए 10 उपाध्यक्ष, 49 महासचिव और 46 सचिव नियुक्त किए हैं।

इन नए पदाधिकारियों में एमएलसी ललन कुमार सराफ को कोषाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। यह घोषणा भी जदयू के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर की गई है। इस राजनीतिक फेरबदल के बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पूर्णिया दौरा भी सुर्खियों में रहा। हालांकि, यह दौरा अपेक्षाकृत छोटा था, लेकिन इस दौरान उन्होंने इलाके का हवाई निरीक्षण और समीक्षा बैठक की।

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नीतीश कुमार के इस दौरे के बाद से पूर्णिया में हवाई उड़ान सेवा जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। यह इलाका सीमांचल का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, जिससे यहां की विकास योजनाओं को और गति मिलेगी। बिहार की राजनीति में इस बदलाव को लेकर विभिन्न अटकलें लगाई जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जदयू की यह रणनीति आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह नई पहल पार्टी के संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई कमेटियों के गठन के साथ, पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि वह अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत कर रही है और इसके लिए बड़े बदलावों से भी पीछे नहीं हटेगी। इससे जदयू के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद है, जिससे पार्टी आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हो सकेगी।

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“केंद्र सरकार के बजट में बिहार को मिली नई उम्मीदें: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू नेताओं की प्रतिक्रियाएं” https://chaupalkhabar.com/2024/07/23/central-government-budget/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/23/central-government-budget/#respond Tue, 23 Jul 2024 10:19:51 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4020 जनता दल (यूनाइटेड) ने मंगलवार को केंद्रीय बजट में बिहार के लिए की गई कई घोषणाओं का स्वागत किया और कहा कि ये विकास उपाय राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगे। इस संदर्भ में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हम बिहार …

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जनता दल (यूनाइटेड) ने मंगलवार को केंद्रीय बजट में बिहार के लिए की गई कई घोषणाओं का स्वागत किया और कहा कि ये विकास उपाय राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगे। इस संदर्भ में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हम बिहार को विशेष दर्जा दिलाने के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं और अब केंद्र सरकार ने बिहार के विकास के लिए ठोस कदम उठाए हैं। केंद्र की मोदी 3.0 सरकार ने आज बजट पेश कर दिया है। इस बार के बजट में बिहार के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं, जिससे राज्य के विकास की दिशा में नई उम्मीदें जागी हैं। एनडीए के घटक दलों के नेता इस बजट को लेकर काफी खुश और सकारात्मक हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बजट की सराहना करते हुए कहा कि हम बिहार को विशेष दर्जा दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे हैं। हमने केंद्र से विशेष राज्य का दर्जा या विशेष मदद की मांग की थी जिससे राज्य की प्रगति हो सके। अगर केंद्र से अतिरिक्त मदद मिलती है तो इसका फायदा बिहार को अवश्य मिलेगा।

जदयू के राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने भी बजट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बिहार के लिए घोषित की गई धनराशि को लेकर संजय कुमार झा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस बजट में हमारे मुद्दों और चिंताओं को संबोधित किया गया है। पहली बार, उत्तर बिहार में बाढ़ से निपटने के लिए बजट में एक ठोस प्रस्ताव पेश किया गया है। मुझे यकीन है कि अगर राज्य को इसकी आवश्यकता होगी तो सरकार बिहार की और अधिक मदद करेगी।

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संजय कुमार झा ने बजट राशि और बिहार को लेकर किए गए अन्य प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि अभी हम लोगों ने पूरा बजट नहीं पढ़ा है। यह जानकारी केवल भाषण में हुए जिक्र से मिली है। संजय कुमार झा ने बताया कि बजट में उत्तर बिहार के बाढ़ नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। यह पहली बार है जब इस मुद्दे को बजट में प्रमुखता से स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं को बजट में शामिल किया गया है, जो राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बिहार के विकास के लिए घोषित की गई योजनाओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और कृषि क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार की इन घोषणाओं से राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि हम बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम और बढ़ा रहे हैं और हमें विश्वास है कि इन घोषणाओं से राज्य के विकास में तेजी आएगी।

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केंद्र सरकार द्वारा बिहार के लिए घोषित धनराशि और योजनाओं का जिक्र करते हुए संजय कुमार झा ने कहा कि बजट में राज्य की विभिन्न आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने बताया कि अभी बजट का पूरा अध्ययन किया जाना बाकी है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बिहार को इससे काफी लाभ होगा। नीतीश कुमार और संजय कुमार झा की प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट होता है कि बिहार के विकास के लिए केंद्र सरकार के इस बजट को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य के विकास की दिशा में यह बजट एक नई उम्मीद और उत्साह लेकर आया है, जिससे बिहार की जनता को भी काफी उम्मीदें हैं।

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बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा, केंद्रीय मंत्री ने दिया लिखित जवाब…. https://chaupalkhabar.com/2024/07/22/rate-of-bihar-as-special-state/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/22/rate-of-bihar-as-special-state/#respond Mon, 22 Jul 2024 10:55:32 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4000 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लंबे समय से चली आ रही मांग एक बार फिर ठुकरा दी गई है। केंद्र सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से साफ मना कर दिया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से जानकारी दी कि अंतर-मंत्रालयी समूह …

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लंबे समय से चली आ रही मांग एक बार फिर ठुकरा दी गई है। केंद्र सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने से साफ मना कर दिया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से जानकारी दी कि अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार को विशेष दर्जा नहीं दिया जा सकता। इस उत्तर ने राज्य सरकार और जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और बिहार के विशेष राज्य का दर्जा पाने की दिशा में एक और बाधा खड़ी कर दी है। नीतीश कुमार ने कई बार इस मुद्दे को उठाया है और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस दर्जे से बिहार को केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता और विकास के अवसर मिलेंगे, जो कि राज्य की पिछड़ी स्थिति को सुधारने में मददगार साबित होंगे। नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को विभिन्न मंचों पर उठाया है और केंद्र सरकार से बार-बार इस पर विचार करने की अपील की है। बावजूद इसके, उनकी मांग को बार-बार ठुकराया जा रहा है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की नीति के अनुसार विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए किसी भी राज्य को अतिरिक्त लाभ या सहायता देने की योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि 2012 में आईएमजी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की कोई आवश्यकता नहीं है और वर्तमान स्थिति में ऐसा कोई भी निर्णय लेना सही नहीं होगा। आईएमजी की 2012 की रिपोर्ट में बिहार की विकास आवश्यकताओं और उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का गहन विश्लेषण किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि बिहार की पिछड़ी स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करने की जरूरत है, और विशेष दर्जा देने से इस मुद्दे का समाधान नहीं होगा। रिपोर्ट में यह सुझाव भी दिया गया था कि विशेष राज्य का दर्जा देने से राज्य के विकास में एक स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि यह सिर्फ एक अस्थायी उपाय साबित हो सकता है।

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बिहार के विभिन्न हिस्सों में इस निर्णय को लेकर निराशा और आक्रोश का माहौल है। कई लोग मानते हैं कि बिहार की विशेष स्थिति को देखते हुए उसे विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष दर्जा मिलने से राज्य को आर्थिक सहायता और अन्य संसाधन प्राप्त होते, जिससे राज्य की विकास दर में तेजी आ सकती थी। राज्य सरकार और स्थानीय नेताओं ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार को बिहार की स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए और राज्य को विशेष दर्जा देने के मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर बिहार को विशेष दर्जा नहीं दिया जाता है, तो राज्य सरकार को और अधिक संघर्ष करना पड़ेगा और बिहार के विकास के लिए अन्य उपायों की तलाश करनी होगी।

 

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कांग्रेस ने NDA पर कसा तंज कहा एनडीए मतलब नीतीश/नायडू डिपेंडेंट एलायंस https://chaupalkhabar.com/2024/06/08/congress-took-a-dig-at-nda/ https://chaupalkhabar.com/2024/06/08/congress-took-a-dig-at-nda/#respond Sat, 08 Jun 2024 08:01:24 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3514 कांग्रेस ने शुक्रवार को एनडीए घटक दल की मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एनडीए शब्द के बार-बार इस्तेमाल को लेकर तंज कसा। कांग्रेस का कहना था कि पिछले दस सालों में नरेंद्र मोदी ने जितनी बार एनडीए का जिक्र नहीं किया होगा, उससे ज्यादा जिक्र तो उन्होंने शुक्रवार को अपने संबोधन में किया …

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कांग्रेस ने शुक्रवार को एनडीए घटक दल की मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एनडीए शब्द के बार-बार इस्तेमाल को लेकर तंज कसा। कांग्रेस का कहना था कि पिछले दस सालों में नरेंद्र मोदी ने जितनी बार एनडीए का जिक्र नहीं किया होगा, उससे ज्यादा जिक्र तो उन्होंने शुक्रवार को अपने संबोधन में किया है। कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा का कहना था कि अब ‘एनडीए’ का मतलब ‘नीतीश/नायडू डिपेंडेंट अलायंस’ हो गया है। खेड़ा ने दावा किया कि पहले कहा जाता था कि अकेला मोदी सब पर भारी है। पहले मोदी की गारंटी की बात की जाती थी। अब एनडीए की गारंटी की बात हो रही है। लेकिन नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को पता है कि मोदी की गारंटी का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए वे भी अब भरोसा नहीं करते।

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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संविधान की प्रति को माथे से लगाने पर भी निशाना साधा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना था कि नरेंद्र मोदी ने पिछले दस सालों में जिस संविधान पर बार-बार हमला किया, अब उसे सिर माथे से लगा रहे हैं। रमेश ने कहा कि मोदी एनडीए में नई जान फूंकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन संविधान का सम्मान करने का उनका यह प्रयास केवल दिखावा है। खेड़ा ने कहा कि नरेंद्र मोदी अब एनडीए का नाम लेकर उसे पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। एनडीए जो कभी अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में एक मजबूत गठबंधन था, अब केवल एक नाम बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि एनडीए के कई पुराने साथी अब गठबंधन छोड़ चुके हैं और अब यह गठबंधन केवल नाम का रह गया है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में एनडीए का जिक्र कर यह साबित कर दिया है कि भाजपा अकेले चुनाव नहीं लड़ सकती। खेड़ा ने कहा कि अब मोदी को नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अब भी पुराने सहयोगियों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही है। कांग्रेस ने एनडीए के संदर्भ में कहा कि यह गठबंधन अब पहले जैसा नहीं रहा। अब एनडीए का मतलब ही बदल गया है। उन्होंने कहा कि अब एनडीए का मतलब ‘नीतीश/नायडू डिपेंडेंट अलायंस’ हो गया है। पहले मोदी की गारंटी पर भरोसा किया जाता था, लेकिन अब किसी को उस गारंटी पर विश्वास नहीं है।

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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को दिखावा करार दिया और कहा कि यह केवल एनडीए को पुनर्जीवित करने की कोशिश है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मोदी अब भी पुराने सहयोगियों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही है। मोदी अब भी एनडीए को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह संभव नहीं है।

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NDA की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर फाइनल मुहर, विपक्ष पर साधा निशाना कहा “ना हारे थे ना हारे है”…. https://chaupalkhabar.com/2024/06/07/lok-sabha-elections-2024-nda-meeting/ https://chaupalkhabar.com/2024/06/07/lok-sabha-elections-2024-nda-meeting/#respond Fri, 07 Jun 2024 09:12:24 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3488 लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा पूर्ण बहुमत से चूक गई, लेकिन एनडीए ने 293 सीटें हासिल करके 272 सीटों (बहुमत) का आंकड़ा प्राप्त कर लिया। इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। इसके पहले …

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लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा पूर्ण बहुमत से चूक गई, लेकिन एनडीए ने 293 सीटें हासिल करके 272 सीटों (बहुमत) का आंकड़ा प्राप्त कर लिया। इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। इसके पहले एनडीए की एक बैठक बुलाई गई है जिसमें सभी दलों के शीर्ष नेता, मुख्यमंत्री, और सांसद भाग लेंगे। इस बैठक के बाद प्रधानमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। 9 जून को राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी। जनसेना प्रमुख पवन कल्याण ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, कोई भी भारत की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकता।

सविंधान सदन (पुरानी संसद) के सेंट्रल हॉल में एनडीए के संसदीय दल की बैठक शुरू हो चुकी है। एनडीए के सहयोगी दलों के पार्टी प्रमुखों का स्वागत किया जा रहा है। इस बैठक में नरेंद्र मोदी ,अमित शाह, जेपी नड्डा, नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू उपस्थित थे इसके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवनिर्वाचित सांसदों का स्वागत किया और पार्टी कार्यकर्ताओं के परिश्रम पर बात करते हुए उनको ध्यानवाद दिया। उन्होंने एनडीए को तीसरी बार बहुमत मिलने पर सहयोगियों का धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “न हम हारे थे, न हारें हैं; हम विजय को पचाना जानते हैं।” उन्होंने कहा कि पहले भी (2014 में) एनडीए था, कल (2019 में) भी एनडीए था और आज (2024 में) भी एनडीए है। दस साल बाद भी कांग्रेस 100 सीटों का आंकड़ा नहीं छू पाई। पीएम मोदी ने ईवीएम पर उठाए गए सवालों को लेकर विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने 4 जून को परिणाम वाले दिन का एक वाकया साझा करते हुए कहा कि ईवीएम जिंदा है या मर गया। उन्होंने कहा कि शाम होते-होते ईवीएम पर सवाल उठाने वाले विपक्षियों के मुंह पर ताला लग गया। ये लोग ईवीएम के खिलाफ झूठ का षड्यंत्र लेकर बैठे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA को तीसरी बार बहुमत मिलने पर सहयोगियों का धन्यवाद दिया और कहा, “न हम हारे थे, न हारें हैं; हम विजय को पचाना जानते हैं।”

मोदी बोले- “किसी पार्टी का सांसद हो, मेरे लिए सभी समान होंगे।” उन्होंने कहा कि विकसित भारत के अपने सपने को साकार करके रहेंगे। मोदी ने दक्षिण के राज्यों में एनडीए को मिली बढ़त का जिक्र किया, विशेष रूप से केरल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हमारी विचारधारा को लेकर हमारे कार्यकर्ताओं पर जुल्म किया गया। इतना तो जम्मू-कश्मीर में भी नहीं हुआ था। आज पहली बार केरल से हमारा प्रतिनिधि सदन में होगा। इस दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बड़ी जीत पर भी बयान दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, “एनडीए ने 30 साल के समय में 5 साल के 3 कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण रूप से पूरे किए हैं। अब यह अपने चौथे कार्यकाल में प्रवेश करने जा रहा है। इस दौरान उन्होंने दिवंगत पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, शरद यादव, जॉर्ज फर्नांडीज जैसे नेताओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो बीज उन्होंने बोया था, उसे जनता ने अपने विश्वास से सींचकर विशाल वटवृक्ष बना दिया है।

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जनसेना प्रमुख पवन कल्याण ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।  जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, कोई भी भारत की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकता। एनडीए के सहयोगी दलों के पार्टी प्रमुखों का स्वागत किया जा रहा है। मीटिंग में अमित शाह, जेपी नड्डा, नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, और नरेंद्र मोदी उपस्थित हैं।अपना दल प्रमुख अनुप्रिया पटेल ने भी पीएम के लिए नरेंद्र मोदी के नाम के प्रस्ताव को समर्थन दिया। लोजपा रामविलास के प्रमुख चिराग पासवान ने भी प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। अपने वक्तव्य में उन्होंने नरेंद्र मोदी के पिछले 10 वर्षों की उपलब्धियों पर धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्यूलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने कहा कि वे एनडीए के साथ बने रहेंगे और उन्होंने भी प्रस्ताव का समर्थन किया।

एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने भी पीएम पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम को समर्थन दिया है। शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी पीएम पद के लिए मोदी के नाम का समर्थन किया और कहा कि उनका भाजपा के साथ गठबंधन फेविकोल के जोड़ की तरह मजबूत है, यह टूटने वाला नहीं है। इस दौरान उन्होंने पीएम के लिए ‘मैं उस माटी का वृक्ष नहीं…’ कविता की कुछ पंक्तियां पढ़ीं।
जदयू प्रमुख नीतीश कुमार ने भी नरेंद्र मोदी के नाम के प्रस्ताव को समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मोदी 10 साल पीएम रहने के बाद एक बार फिर पीएम बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बार पूरे समय वे सरकार के साथ बने रहेंगे। अगली बार एनडीए फिर एक साथ बिहार में चुनाव लड़ेगा और सभी सीटें जीतेगा।

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टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि देश सही समय पर सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के कार्यों का जिक्र किया और एनडीए संसदीय दल के नेता के तौर पर मोदी के नाम का समर्थन किया। चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि हमने आंध्र प्रदेश में 95 प्रतिशत सीटें जीतीं। इस दौरान उन्होंने अपने सहयोगी पवन कल्याण की पार्टी जनसेना और भाजपा का उल्लेख किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव एनडीए संसदीय दल के नेता चुने जाने के लिए किया। अमित शाह ने भी उक्त प्रस्ताव का समर्थन किया। कार्यक्रम की शुरुआत में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सभी को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “ये हम सबके लिए एक ऐतिहासिक पल है और हम लगातार तीसरी बार एनडीए के नेता के रूप में श्री नरेंद्र मोदी जी को चयन करने वाले हैं। इस ऐतिहासिक घड़ी में आज हम सब लोग चश्मदीद गवाह बन रहे हैं… ये हम सबका सौभाग्य है।”

जेपी नड्डा ने अरुणाचल और सिक्किम में भी भाजपा-एनडीए की सरकार बनने का जिक्र किया। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ है। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रश्मिरथी के अंश ‘वसुधा का नेता कौन हुआ, भूखंड विजेता कौन हुआ…’ का पाठ किया। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले भारत के बारे में कहा जाता था कि यहां कुछ बदलने वाला नहीं है। आज 10 साल बाद मोदी जी के नेतृत्व में वही भारत आकांक्षी भारत बन गया है और विकसित भारत के संकल्प को लेकर चल पड़ा है। NDA संसदीय बैठक के लिए संसद पहुंचने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह खुशी की बात है कि पीएम मोदी लगातार तीसरी बार पीएम बनेंगे। यह शिवसेना के लिए खुशी की बात है, क्योंकि शिवसेना और बीजेपी की विचारधारा एक जैसी है। एनडीए के सभी गठबंधन दलों ने उन्हें अपना नेता चुना है और आज की बैठक उनके नेतृत्व में हो रही है।

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Nitish Kumar: नौकरी को लेकर फिर नीतीश कुमार के दो टूक जवाब। रोहिणी आचार्य और मीसा भारती की उम्मीदवारी पर क्या बोले नीतीश. https://chaupalkhabar.com/2024/04/08/nitish-kumar-about-job-again-nitish-k/ https://chaupalkhabar.com/2024/04/08/nitish-kumar-about-job-again-nitish-k/#respond Mon, 08 Apr 2024 09:45:50 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=2879 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राजद नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के दावे पर प्रहार किया, जो युवाओं को नौकरी उपलब्ध कराने का आरोप लगा रहे थे। उन्होंने कहा कि नौकरी के क्षेत्र में उन्होंने काम किया है और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं के झूठे दावों को प्रकट किया। नीतीश कुमार ने …

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राजद नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के दावे पर प्रहार किया, जो युवाओं को नौकरी उपलब्ध कराने का आरोप लगा रहे थे। उन्होंने कहा कि नौकरी के क्षेत्र में उन्होंने काम किया है और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं के झूठे दावों को प्रकट किया। नीतीश कुमार ने कहा, “हमारे सभी कामों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

हम नौकरियों के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिससे लोगों को रोजगार के अवसर मिलें। तेजस्वी जैसे नेता झूठ-मूठ बोलकर सिर्फ प्रचार कर रहे हैं, जबकि हम नौकरियों के क्षेत्र में वास्तविक काम कर रहे हैं।”उन्होंने आगे कहा, “जब हम आए तो सड़कें खराब थीं, हिंदू-मुस्लिम झगड़े होते थे। हमने इन समस्याओं का समाधान किया और राज्य को शांति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाया।”मुख्यमंत्री ने लालू-राबड़ी के 15 वर्षों के शासन काल का भी जिक्र किया, और पूछा, “माता-पिता के राज में कोई काम हुआ क्या? लोग डर के मारे अपने घरों से नहीं निकलते थे।

हिंदू-मुस्लिम झगड़े रोजगार के अवसरों को क्यों नहीं बढ़ा पाए?”नीतीश कुमार ने उन्हें उनके काम की सूची देते हुए कहा, “हमने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कों, और सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम किया है। आज राज्य में विकास की नई धारा चल रही है और यह हमारे काम का परिणाम है।”उन्हें एक प्रश्न पर जवाब देते हुए कहा गया, “लालू प्रसाद की दो बेटियां चुनाव में हैं, लेकिन उनके उम्मीदवारी से हमारा कोई लेना-देना नहीं है।

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हम अपने कामों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”चुनावी तैयारियों के संबंध में प्रश्न पर नीतीश कुमार ने कहा, “हमारी पूरी तैयारी है और हम हर जगह जाएंगे। हमने समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए काम किया है, और इस बार हम फिर से जनता के विश्वास को जीतेंगे।”

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बिहार: महागठबंधन की सीटों का तय हुआ वितरण, राजद को 26 और कांग्रेस को 9, कौन लड़ेगा चुनाव? https://chaupalkhabar.com/2024/03/29/bihar-grand-alliance-seats/ https://chaupalkhabar.com/2024/03/29/bihar-grand-alliance-seats/#respond Fri, 29 Mar 2024 08:05:27 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=2763 बिहार में महागठबंधन की सीटों का बंटवारा तय, चुनावी मैदान में हलचल बिहार के राजनीतिक मैदान में महागठबंधन की सीटों का बंटवारा निर्धारित हो गया है, जिससे चुनावी दंगल में रंगबाजी बढ़ने की संभावना है। मुख्य घटक राष्ट्रीय जनता दल को 26 सीटें मिली हैं, जिन्हें वे अपने प्रत्याशियों को समर्पित करेंगे। इसके साथ ही, …

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बिहार में महागठबंधन की सीटों का बंटवारा तय, चुनावी मैदान में हलचल बिहार के राजनीतिक मैदान में महागठबंधन की सीटों का बंटवारा निर्धारित हो गया है, जिससे चुनावी दंगल में रंगबाजी बढ़ने की संभावना है। मुख्य घटक राष्ट्रीय जनता दल को 26 सीटें मिली हैं, जिन्हें वे अपने प्रत्याशियों को समर्पित करेंगे।

इसके साथ ही, कांग्रेस पार्टी को 9 सीटों पर संघर्ष करना पड़ा है, जबकि वामदलों को 5 सीटें मिली हैं। महागठबंधन के प्रमुख दलों ने अपने उम्मीदवारों को सीटों पर नियुक्त करने के लिए एकमति से काम किया है। जिसके परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय जनता दल को गया, नवादा, जहानाबाद, औरंगाबाद, बक्सर, पाटलिपुत्र, मुंगेर, जमुई, बांका, और वाल्मीकि नगर सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारने का निर्णय लिया गया है। इन सीटों के अलावा, राजद के उम्मीदवार पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, वैशाली, सारण, सिवान, गोपालगंज, उजियारपुर, दरभंगा, मधुबनी, झंझारपुर, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया, और हाजीपुर सीटों पर भी चुनावी मैदान में उतरेंगे।

इसी के साथ, कांग्रेस पार्टी को किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पश्चिमी चंपारण, पटना साहिब, सासाराम, और महाराजगंज सीटों पर उम्मीदवारों को उतारने का निर्णय लिया गया है।महागठबंधन के इस बड़े कदम के साथ, राजनीतिक दलों के बीच समझौते और साझेदारी की चर्चाएं भी तेज हो रही हैं।

इसे देखते हुए, राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मनोज झा ने व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचते हुए कहा कि गठबंधन पार्टियों के साथ साझेदारी राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है, और इस पर किसी भी प्रकार की अनजाने में टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। इसके साथ ही, कांग्रेस के नेता पप्पू यादव से जुड़े सवालों के जवाब भी अभी तक स्पष्ट नहीं हैं, जो कि राजनीतिक विश्लेषकों के बीच कई प्रश्नों को उठाते हैं।चुनावी दंगल के मध्य में, महागठबंधन ने अपनी दक्षिण बिहार में भी मजबूती को बढ़ावा दिया है, जिससे बिहार की राजनीति में नई दिशा मिल सकती है।

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इससे पहले, चुनावी दंगल के दौरान, बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जनता दल (यूनाइटेड) और भाजपा का संयोग दिखाई दे रहा था, जिससे राज्य में राजनीतिक परिवर्तन की संभावना थी। यहां तक कि, विपक्षी दलों ने भी इस संयोग का सामना करने के लिए मिलकर काम किया और एक सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक उतार-चढ़ाव को उत्कृष्ट तरीके से समझने की कोशिश की। इस प्रकार, बिहार की राजनीति में नए ट्यूर्न के इस बड़े कदम के साथ, चुनावी मैदान में हलचल बढ़ गई है, जिससे आम जनता को एक नई राजनीतिक दिशा की उम्मीद है।

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