RJD - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Wed, 11 Sep 2024 13:12:49 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg RJD - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 पीएम पद को लेकर इंडिया गठबंधन में मतभेद, तेज प्रताप यादव ने अखिलेश यादव को बताया प्रधानमंत्री पद का दावेदार https://chaupalkhabar.com/2024/09/11/india-alliance-regarding-pm-post/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/11/india-alliance-regarding-pm-post/#respond Wed, 11 Sep 2024 13:12:49 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4827 लोकसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ ही विपक्षी इंडिया गठबंधन के भीतर प्रधानमंत्री पद को लेकर अलग-अलग सुर सुनाई देने लगे हैं। हालाँकि, इस गठबंधन ने अभी तक किसी भी नेता को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेताओं के विचारों में मतभेद …

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लोकसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ ही विपक्षी इंडिया गठबंधन के भीतर प्रधानमंत्री पद को लेकर अलग-अलग सुर सुनाई देने लगे हैं। हालाँकि, इस गठबंधन ने अभी तक किसी भी नेता को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेताओं के विचारों में मतभेद सामने आने लगे हैं। आरजेडी के वरिष्ठ नेता लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। जहां तेजस्वी यादव कांग्रेस नेता राहुल गांधी का समर्थन करते हुए देखे जाते हैं, वहीं उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव को प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बताया है।

हाल ही में तेज प्रताप यादव ने एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि वे चाहते हैं कि अखिलेश यादव देश के अगले प्रधानमंत्री बनें। जब उनसे पूछा गया कि इंडिया गठबंधन में प्रधानमंत्री पद के लिए उनका समर्थन किसके पक्ष में है, तो तेज प्रताप ने पहले राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की क्षमताओं की प्रशंसा की और कहा कि राहुल गांधी ने इसके लिए कड़ी मेहनत की है। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त करते हुए कहा कि उनका दिल चाहता है कि अखिलेश यादव ही देश के प्रधानमंत्री बनें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अखिलेश यादव के साथ उनके पारिवारिक संबंध हैं, जिससे यह संबंध और भी गहरा हो जाता है।

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इंटरव्यू के दौरान तेज प्रताप यादव ने यह दावा भी किया कि आने वाले कुछ महीनों में नरेंद्र मोदी सरकार गिर जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के गिरने के बाद देश में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की सरकार बनेगी। उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि विपक्षी दलों को लगता है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में उन्हें मजबूत समर्थन मिलेगा।

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दूसरी तरफ, तेज प्रताप यादव के भाई और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बारे में माना जाता है कि वे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार मानते हैं। तेजस्वी का मानना है कि राहुल गांधी का अनुभव और देशभर में उनकी छवि उन्हें इस पद के लिए सबसे बेहतर दावेदार बनाती है। राहुल गांधी ने पिछले कुछ वर्षों में विपक्ष की तरफ से एक मजबूत नेता के रूप में उभरते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मोदी सरकार की नीतियों का विरोध किया है। इंडिया गठबंधन के भीतर प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार का नाम तय करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी समेत कई अन्य दल शामिल हैं, जिनके अपने-अपने दावेदार हो सकते हैं।

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बिहार की राजनीतिक धारा, नीतीश और तेजस्वी की बैठक से अगले विधानसभा चुनावों की संभावनाएं. https://chaupalkhabar.com/2024/09/09/political-stream-of-bihar/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/09/political-stream-of-bihar/#respond Mon, 09 Sep 2024 10:14:53 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4758 बिहार की राजनीति ने हमेशा राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस राज्य में लंबे समय से प्रमुख भूमिका में रहे हैं। उन्होंने बार-बार गठबंधनों और राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में कुशलता दिखाई है। हाल ही में, नीतीश कुमार की तेजस्वी यादव के साथ …

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बिहार की राजनीति ने हमेशा राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस राज्य में लंबे समय से प्रमुख भूमिका में रहे हैं। उन्होंने बार-बार गठबंधनों और राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने में कुशलता दिखाई है। हाल ही में, नीतीश कुमार की तेजस्वी यादव के साथ बैठक ने बिहार के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर नई अटकलें शुरू कर दी हैं। नीतीश कुमार ने 2023 में जाति सर्वेक्षण के आधार पर दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के लिए आरक्षण को 65 प्रतिशत कर दिया था। हालांकि, पटना उच्च न्यायालय ने इस फैसले को रद्द कर दिया, और मामला सुप्रीम कोर्ट में है। तेजस्वी यादव ने इस फैसले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने का आग्रह किया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

नीतीश की तेजस्वी के साथ हालिया बैठक का औपचारिक बहाना नए सूचना आयुक्त के चयन पर चर्चा था। लेकिन नीतीश ने भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के शहर में होने के दौरान कहा कि उन्होंने पहले गलती की थी, जो अब नहीं होगी। यह बयान नीतीश के दोहरी रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने भाजपा से संबंध सुधारने की कोशिश की है।

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भाजपा ने नीतीश को खुश रखने के लिए केंद्रीय बजट में बिहार के लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया और 2025 के राज्य चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ने की घोषणा की। इसके बावजूद, नीतीश की पार्टी जेडी(यू) के भीतर भाजपा के प्रति सही संतुलन बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। जेडी(यू) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि तेजस्वी से मुलाकात को अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।

इस बीच, चिराग पासवान और उनकी पार्टी ने दलित वोटों को मजबूत करने के लिए आक्रामक रुख अपनाया है। चिराग ने सुप्रीम कोर्ट के उप-कोटा आदेश का विरोध किया और दलितों के अधिकारों के मुद्दे को उठाया। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि चिराग पासवान की महत्त्वाकांक्षाओं और नीतीश कुमार की चतुर राजनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिशें लगातार चल रही हैं।

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नए राजनीतिक समीकरणों के बीच, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की बैठक ने यह संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में आगामी समय में और भी हलचल देखने को मिल सकती है। यह स्पष्ट है कि सभी प्रमुख दल अपने-अपने चुनावी हितों को ध्यान में रखते हुए रणनीतियों में बदलाव कर रहे हैं।

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जद(यू) में अंदरूनी कलह, भाजपा के साथ गठबंधन और विचारधारा के बीच फंसी नीतीश कुमार की पार्टी. https://chaupalkhabar.com/2024/09/07/internal-strife-in-jdu-bjp/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/07/internal-strife-in-jdu-bjp/#respond Sat, 07 Sep 2024 07:27:50 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4721 जनता दल (यूनाइटेड) [जद(यू)] के भीतर इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में दो धड़ों के बीच सत्ता संघर्ष उभर कर सामने आया है। एक ओर वे नेता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन को बनाए रखने के पक्षधर हैं, जबकि दूसरी …

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जनता दल (यूनाइटेड) [जद(यू)] के भीतर इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में दो धड़ों के बीच सत्ता संघर्ष उभर कर सामने आया है। एक ओर वे नेता हैं, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन को बनाए रखने के पक्षधर हैं, जबकि दूसरी ओर वे नेता हैं जो पार्टी की मूल विचारधारा पर समझौता करने के खिलाफ हैं। यह विवाद तब खुलकर सामने आया जब जद(यू) के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता केसी त्यागी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। केसी त्यागी ने मोदी सरकार के कुछ फैसलों, जैसे सिविल सेवाओं में लेटरल एंट्री, समान नागरिक संहिता, और सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण पर दिए गए फैसले का खुलकर विरोध किया। इसके अलावा, इजरायल और फिलिस्तीन पर भारत की विदेश नीति को लेकर भी उन्होंने तीखे सवाल उठाए। हालांकि, त्यागी के ये बयान जद(यू) की विचारधारा के अनुरूप ही थे, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के साथ पार्टी के समीकरण को बिगड़ने से रोकने के लिए उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया।

भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर जद(यू) के भीतर विवाद और भी गहरा हो गया है, खासकर तब जब पार्टी ने संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन किया। वक्फ संपत्ति पर कानून में संशोधन को लेकर पार्टी के अंदर मतभेद उभरकर सामने आए। कुछ नेताओं ने इस विधेयक का विरोध यह कहकर किया कि यह जद(यू) की मूल विचारधारा के खिलाफ है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने संसद में विधेयक का समर्थन किया, जबकि जद(यू) के अन्य नेता, जैसे विजय कुमार चौधरी, इससे असहमत थे। चौधरी ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को दूर किए बिना इस विधेयक को पारित नहीं किया जाना चाहिए। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले विजय कुमार चौधरी के इस बयान को पार्टी की आधिकारिक स्थिति के रूप में देखा गया। दूसरी ओर, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ज़मा खान ने मुस्लिम बच्चों के लिए नए स्कूल और वक्फ भूमि पर 21 मदरसों के निर्माण की योजना की घोषणा करके ललन सिंह के बयान का असर कम करने की कोशिश की।

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जद(यू) के अंदर यह सत्ता संघर्ष इस बात का संकेत है कि पार्टी के नेता अगले साल के विधानसभा चुनाव और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के एक नेता ने बताया कि एक धड़ा भाजपा के साथ गठबंधन बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि दूसरा धड़ा मानता है कि भाजपा की मजबूरी है, इसलिए जद(यू) को अपनी पहचान और विचारधारा पर कायम रहना चाहिए। इस विभाजन के बीच पार्टी के कुछ नेता अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भाजपा के साथ मधुर संबंध बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, नीतीश कुमार एक अनुभवी और चतुर राजनेता हैं। वे पहले भी पार्टी के भीतर असहमति रखने वाले नेताओं, जैसे जॉर्ज फर्नांडिस और शरद यादव, को दरकिनार कर चुके हैं। पिछले साल ललन सिंह ने नीतीश कुमार के साथ मतभेदों की अफवाहों के चलते पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, पार्टी ने इन अफवाहों का खंडन किया था। नीतीश कुमार ने अपने करीबी सहयोगी संजय झा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है, ताकि विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को मजबूत किया जा सके।

विधानसभा चुनाव से पहले जद(यू) के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। वक्फ विधेयक पर मतभेद, त्यागी का इस्तीफा, और पार्टी के भीतर के असंतोष ने जद(यू) को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है। पार्टी के अंदर की एक और घटना, जिसने असंतोष को और बढ़ा दिया, वह थी 22 अगस्त को राज्य कार्यकारिणी सदस्यों की सूची का अचानक बदलाव। पहली सूची में 251 सदस्यों के नाम थे, लेकिन कुछ ही घंटों में इसे वापस लेकर नई सूची जारी की गई, जिसमें सदस्यों की संख्या घटाकर 115 कर दी गई। इस बदलाव ने पार्टी के अंदर और भी असंतोष पैदा कर दिया, क्योंकि ललन सिंह और अशोक चौधरी के कई समर्थकों को नई सूची से हटा दिया गया था। पार्टी ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह बदलाव उन नेताओं को हटाने के लिए किया गया, जो लोकसभा चुनावों के दौरान सक्रिय नहीं थे या जिनका प्रदर्शन असंतोषजनक था। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम सत्ता संतुलन बनाने के लिए उठाया गया था। अशोक चौधरी ने जहानाबाद संसदीय सीट पर हार के लिए भूमिहारों को जिम्मेदार ठहराते हुए विवाद खड़ा कर दिया। उनका बयान जद(यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार को पसंद नहीं आया, जिन्होंने उनकी आलोचना की और कहा कि नीतीश कुमार कभी जाति आधारित राजनीति नहीं करते हैं।

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बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। वे कुर्मी-कुशवाहा और अत्यंत पिछड़ी जातियों के गठबंधन के कारण राज्य की राजनीति में एक मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर चल रहे इस सत्ता संघर्ष को देखते हुए, नीतीश कुमार को जल्द से जल्द पार्टी के भीतर की दरारों को दूर करना होगा। नीतीश कुमार के नेतृत्व पर चर्चा करते हुए, पूर्व भाजपा उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक बार कहा था, “नीतीश कुमार हमेशा अपने मौजूदा साथी को मात देने के लिए दो खिड़कियां खुली रखते हैं।” इस बात को ध्यान में रखते हुए, विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश कुमार इस समय की चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं और उन्होंने पहले भी ऐसे कई राजनीतिक संकटों का सामना किया है।

पार्टी के सांसद रामप्रीत मंडल ने कहा, “त्यागी ने अवांछित रुख अपनाया, लेकिन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की संवेदनशीलता को देखते हुए पार्टी में आखिरकार नीतीश जी के विचार ही चलेंगे। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे नेता क्या सोचते हैं।”

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बिहार की राजनीति में नई हलचल: नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की मुलाकात से उठी अटकलें, पुराना वीडियो बना चर्चा का केंद्र. https://chaupalkhabar.com/2024/09/06/new-solution-in-bihar-politics/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/06/new-solution-in-bihar-politics/#respond Fri, 06 Sep 2024 09:38:59 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4707 बिहार की राजनीति में हाल के दिनों में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। 4 सितंबर 2024 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से यह चर्चा शुरू हो …

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बिहार की राजनीति में हाल के दिनों में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। 4 सितंबर 2024 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से यह चर्चा शुरू हो गई है कि नीतीश कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं, जिससे भाजपा और नीतीश कुमार की दोस्ती में दरार आने की संभावना जताई जा रही है।

तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच यह मुलाकात अचानक और अप्रत्याशित थी, जिससे अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। इस मुलाकात के बाद राजद समर्थक सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार महागठबंधन में लौट सकते हैं, और इस तरह से बिहार की सियासत में नया मोड़ आ सकता है। हालांकि, इस मुलाकात का वास्तविक कारण क्या था, इसे लेकर तेजस्वी यादव ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात महज एक सामाजिक बातचीत थी और इसमें कोई बड़ा राजनीतिक इशारा नहीं था।

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हालांकि, इस मुलाकात के बाद भी राजनीतिक अटकलें कम नहीं हुई हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें नीतीश कुमार और लालू यादव की मुलाकात को हाल की बताया जा रहा है। इस वीडियो को कई लोगों ने शेयर किया और इसे बिहार की सियासी स्थिति पर बड़ा असर डालने वाला बताया। लेकिन जांच में पता चला कि यह वीडियो दो साल पुराना है। यह वीडियो 5 सितंबर 2022 का है, जब नीतीश कुमार लालू यादव से मिलने राबड़ी आवास पर गए थे, और तब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी। इसलिए, इस वीडियो की ताजगी के दावे पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही बिहार की सियासत में कई बदलाव हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल नीतीश कुमार और भाजपा के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। वर्तमान में बिहार में भाजपा और जेडीयू की डबल इंजन की सरकार है, जो अपने विकास कार्यों के लिए जानी जाती है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में कहा कि भाजपा की विचारधारा पर लोगों का भरोसा पूरी तरह से है। उन्होंने यह भी कहा कि 2005 के बाद बिहार में जो विकास हुआ है, वह नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के नेतृत्व में संभव हुआ है। उनके अनुसार, भाजपा ने जो भी वादे किए हैं, उन्हें पूरा भी किया है।

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वहीं, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने राजद पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लालू प्रसाद का कुशवाहा समाज के प्रति प्रेम ढकोसला है। उन्होंने दावा किया कि राजद के लुभावने भाषणों से जनता को भ्रमित किया जाता है, और कुशवाहा समाज को परिवारवादी राजनीति से बाहर रखना चाहिए। इस तरह से, बिहार की राजनीति में चल रही हलचल और सोशल मीडिया पर फैली अटकलों के बावजूद, फिलहाल कोई ठोस प्रमाण या आधिकारिक बयान नहीं आया है जो यह साबित कर सके कि नीतीश कुमार और भाजपा के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव होने वाला है। वर्तमान में, यह कह पाना मुश्किल है कि भविष्य में बिहार की सियासत में क्या मोड़ आएगा, लेकिन फिलहाल की स्थिति में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि नीतीश कुमार एक बार फिर महागठबंधन में शामिल होंगे।

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भाजपा की आलोचना और जन सुराज की चुनौती,प्रशांत किशोर की राजनीति पर चर्चा. https://chaupalkhabar.com/2024/09/05/criticism-of-bjp-and-public-surra/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/05/criticism-of-bjp-and-public-surra/#respond Thu, 05 Sep 2024 10:42:15 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4684 प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जो अभी तक आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं हुई है, ने बिहार में प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच ‘बी टीम’ का तमगा प्राप्त किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किशोर पर हमला करते हुए उनकी पार्टी को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ‘बी टीम’ करार दिया है। यह आरोप …

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प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जो अभी तक आधिकारिक रूप से लॉन्च नहीं हुई है, ने बिहार में प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच ‘बी टीम’ का तमगा प्राप्त किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किशोर पर हमला करते हुए उनकी पार्टी को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ‘बी टीम’ करार दिया है। यह आरोप भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने ट्विटर अकाउंट पर किया। मालवीय ने अपने ट्वीट में लिखा, “हिंदुस्तान की राजनीति में एक और मुस्लिम परस्त पार्टी का उदय हो चुका है। इस बार बिहार में! जैसे ही कोई हिंदू नेता कैफी या जालीदार टोपी पहन लेता है, तो समझ लेना चाहिए कि उसे मुसलमानों की भलाई नहीं, सिर्फ उनका वोट चाहिए। बिहार में जन सुराज और राजद, एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। भाजपा और एनडीए ही एकमात्र राष्ट्रवादी विकल्प है।” यह बयान भाजपा की ओर से किशोर को निशाना बनाने का नवीनतम प्रयास है, जो आगामी बिहार चुनाव के मद्देनजर हो रहा है।

भाजपा को किशोर के मुसलमानों को प्राथमिकता देने के आरोप से अधिक चिंता ऊंची जातियों के उनकी ओर आकर्षित होने की संभावनाओं को लेकर है। किशोर ने बिहार में कम से कम 40 मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारने का वादा किया है। इसके अलावा, किशोर ने जुलाई में 40 महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारने की घोषणा की है, जो भाजपा और उसके सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है। भाजपा के नेतृत्व को किशोर की संगठनात्मक तैयारी और 1 करोड़ सदस्यों के साथ जन सुराज को लॉन्च करने की घोषणा ने ‘घबराहट’ में डाल दिया है। यह घटना उस समय हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के बावजूद भाजपा ने बिहार की पांच लोकसभा सीटें — पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, औरंगाबाद और सासाराम — खो दी थीं।

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किशोर की घोषणा को राजद के मुस्लिम-यादव वोट बैंक को लक्षित करने की योजना के रूप में देखा गया है। बिहार की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत है और वह सब बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय जनता दल को वोट देते हैं, केवल नीतीश कुमार की जेडी(यू) के समर्थकों के। इसके अलावा किशोर के भाषण का दूसरा हिस्सा यह रहा जिसमें उन्होंने कहा, की “भाजपा को हराने के लिए मुसलमानों को गांधी, आंबेडकर, लोहिया और जेपी (जयप्रकाश नारायण) की विचारधारा को अपनाना होगा” जिसे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को गंभीरता से लिया है। किशोर ने 2014 में नरेंद्र मोदी की जीत में योगदान दिया था, लेकिन 2015 से 2021 तक उन्होंने भाजपा के खिलाफ लड़ने वाली पार्टियों और नेताओं की जीत में योगदान किया। किशोर का कहना है कि भाजपा ने केवल 37 प्रतिशत वोटों के साथ दिल्ली में सरकार बनाई, जबकि हिंदू आबादी 80 प्रतिशत है, इसका मतलब है कि 40 प्रतिशत हिंदुओं ने भाजपा के खिलाफ और नफरत की राजनीति के खिलाफ वोट दिया।

किशोर का उद्देश्य विपक्ष की जगह लेने का है, जैसा कि राजद के तेजस्वी यादव पर उनके लगातार हमलों से स्पष्ट है। साथ ही, उनकी नजर भाजपा के ऊंची जातियों के वोट बैंक पर भी है। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने किशोर पर आरोप लगाया है कि वह भाजपा की ‘बी टीम’ हैं। “यह लोकसभा चुनावों से स्पष्ट है जब उन्होंने भाजपा और मोदी की प्रशंसा की, लेकिन उन्हें हमारे आधार का कोई वोट नहीं मिलेगा।” जन सुराज के एक पदाधिकारी द्वारा कहा गया की नीतीश कुमार एक घटती हुई ताकत हैं।और नीतीश के जाने के बाद बिहार में दो पार्टियां ही बची रहेंगी जिनमें से एक है राजद और दूसरी है भाजपा। और देखा जाए तो भाजपा अपनी विचारधारा और लोकप्रिय नेतृत्व वाले विशाल संगठन के सहारे ही वहाँ अपनी मज़बूती को बनाये हुए है। तेजस्वी के स्थान पर (जन सुराज के लिए) अधिक गुंजाइश है।”

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जुलाई में, राजद के दिग्गज नेता जगदानंद सिंह ने एक पत्र लिखकर जन सुराज को भाजपा की ‘टीम बी’ करार दिया था और राजद के सदस्यों के किशोर के प्रति निष्ठा बदलने की चिंता जताई थी। पिछले पांच महीनों में कई प्रमुख राजद नेता जैसे देवेंद्र प्रसाद यादव, रामबली चंद्रवंशी, अब्दुल मजीद और रिवाज अंसारी जन सुराज में शामिल हो चुके हैं। किशोर के साथ जुड़ने वालों में से है कर्पूरी ठाकुर की पोती डॉ. जागृति और पूर्व आईपीएस अधिकारी रही आनंद मिश्रा एव अभिनेत्री अक्षरा सिंह शामिल हैं। बीजेपी के उपाध्यक्ष ने एक मीडिया रिपोर्ट में बताया की “प्रशांत किशोर के पास पैसा और जगह है। और हर पार्टी के नेता जो नाराज़ हैं या जिन्हें टिकट नहीं मिल रहा है, वह यह सब देखकर उनके साथ आ जाएंगे। लालू के समर्थक प्रतिबद्ध हैं; यादव भाजपा को वोट नहीं देंगे। और यहां तक कि मुसलमान वोटर भी उन्हें वोट नहीं देंगे क्योंकि उन्हें मालूम है कि वह भी भाजपा को नहीं हरा सकते।”

उन्होंने कहा कि किशोर उच्च जाति के मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए वे गांधी और आंबेडकर की प्रशंसा कर रहे हैं। भाजपा के एक महासचिव ने कहा कि किशोर की यात्रा चंपारण, सारण और मिथिला जैसे भाजपा के गढ़ों में भी घूमी है। उन्होंने कहा, “वो पहले आरजेडी के गढ़ मगध और सीमांचल क्यों नहीं गए? वो जानते हैं कि ऊंची जातियों के पास राजनीति के लिए संसाधन हैं और उन्हें जीता जा सकता है।”

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भाजपा प्रदेश इकाई के एक नेता ने कहा कि किशोर बिहार में बदलाव की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अरविंद केजरीवाल की राह पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा, “किशोर बदलाव की कहानी का इस्तेमाल कर रहे हैं और कह रहे हैं कि बिहारियों ने पिछले 40 सालों में सभी पार्टियों को आजमाया है — चाहे वो आरजेडी हो, जेडी(यू) हो या भाजपा। वो बदलाव, रोजगार, युवाओं के पलायन, शिक्षा की कमी और एनडीए के 25 साल के शासन के बावजूद उद्योग की कमी के बारे में अपनी बात रख रहे हैं और यह गति पकड़ रहा है।”

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बिहारवासियों से अनुरोध है…’, तेजस्वी ने अचानक की भावुक अपील; NDA नेता अब क्या प्रतिक्रिया देंगे? https://chaupalkhabar.com/2024/06/17/request-to-the-people-of-bihar/ https://chaupalkhabar.com/2024/06/17/request-to-the-people-of-bihar/#respond Mon, 17 Jun 2024 06:06:50 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3599 बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव लगातार राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर नीतीश सरकार पर हमलावर हैं। उन्होंने कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए फिर बिहार सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ उन्होंने बिहार की जनता से एक भावुक अपील भी की है। तेजस्वी यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में …

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बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव लगातार राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर नीतीश सरकार पर हमलावर हैं। उन्होंने कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए फिर बिहार सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ उन्होंने बिहार की जनता से एक भावुक अपील भी की है। तेजस्वी यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि मधुबनी में निर्ममता एवं क्रूरता की पराकाष्ठा पार कर सरकारी अपराधियों ने शिक्षक डॉ. आलोक यादव की चाकू से गोद-गोदकर हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि इस कुशासन के राज में छात्र-छात्राएं और शिक्षक भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना सरकार की विफलता का स्पष्ट प्रमाण है, जहां अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

तेजस्वी ने आगे लिखा कि सिवान में कोचिंग जा रहे एक छात्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई, और औरंगाबाद में कोचिंग गई एक छात्रा का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई। अब मधुबनी में शिक्षक की हत्या ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने बिहार के लोगों के दिलों में डर और असुरक्षा की भावना को गहरा कर दिया है। तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी से इन घटनाओं पर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया या कार्रवाई की अपेक्षा करना व्यर्थ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दुशासन की सरकार के प्रवक्ता वही पुराने और रटे-रटाए बयान देंगे, जो जनता को संतुष्ट करने में असफल रहेंगे।

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तेजस्वी ने बिहारवासियों से आग्रह किया कि वे अपने जान-माल की सुरक्षा स्वयं करें। उन्होंने कहा कि इस निकम्मी सरकार के भरोसे रहने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि यह सरकार अपराधियों को रोकने और जनता की सुरक्षा करने में पूरी तरह से विफल रही है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और आत्मरक्षा के उपाय अपनाने की अपील की। तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास ना तो अपराध रोकने की इच्छा है और ना ही कोई ठोस रणनीति। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने पहले ही सख्त कदम उठाए होते, तो इन घटनाओं को रोका जा सकता था।

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उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को अब यह सोचने की जरूरत है कि वह किस प्रकार की सरकार चाहती है – एक ऐसी सरकार जो केवल वादे करती है और अपराधियों को खुली छूट देती है, या एक ऐसी सरकार जो जनता की सुरक्षा और समृद्धि के लिए समर्पित है। तेजस्वी ने कहा कि समय आ गया है कि बिहार के लोग इस निकम्मी सरकार के खिलाफ आवाज उठाएं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें। तेजस्वी यादव ने अंत में कहा कि वह हमेशा बिहार की जनता के साथ खड़े रहेंगे और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने जनता से एकजुट होकर इस कुशासन के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया और विश्वास जताया कि बिहार की जनता अपनी सुरक्षा और सम्मान के लिए सही निर्णय लेगी।

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खरगे के बयान पर मचा सियासी हंगामा कहा कभी भी गिर सकती है NDA की सरकार,JDU नेता ने किया करारा पलटवार https://chaupalkhabar.com/2024/06/15/political-uproar-over-kharges-statement/ https://chaupalkhabar.com/2024/06/15/political-uproar-over-kharges-statement/#respond Sat, 15 Jun 2024 07:56:17 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3591 लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस के हौसले एक बार फिर बुलंद हो गए हैं। भले ही एनडीए गठबंधन ने सरकार बनाने में सफलता प्राप्त कर ली हो, मगर आई.एन.डी.आई. गठबंधन ने 234 सीटें जीतकर अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को नीतीश कुमार की जनता दल …

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लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस के हौसले एक बार फिर बुलंद हो गए हैं। भले ही एनडीए गठबंधन ने सरकार बनाने में सफलता प्राप्त कर ली हो, मगर आई.एन.डी.आई. गठबंधन ने 234 सीटें जीतकर अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के सहारे सरकार चलानी पड़ रही है। इसी बीच, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान में मोदी सरकार और भाजपा पर जमकर निशाना साधा। खरगे ने कहा कि भाजपा अब नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की पार्टियों के सहारे सरकार चला रही है, जो खुद अपने राज्यों में संघर्ष कर रही हैं। खरगे का कहना है कि यह स्पष्ट है कि जनादेश मोदी सरकार के खिलाफ था और जनता ने भाजपा को स्पष्ट रूप से नकार दिया है। फिर भी, गठबंधन की राजनीति और छोटे दलों के समर्थन के कारण भाजपा सत्ता में आई है।

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रवक्ता एजाज अहमद ने मल्लिकार्जुन खरगे के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि खरगे सही कह रहे हैं। जनादेश स्पष्ट रूप से मोदी सरकार के खिलाफ था और मतदाताओं ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। फिर भी, भाजपा ने छोटे दलों और गठबंधन की मदद से सत्ता में आना सुनिश्चित किया है। बिहार के पूर्व सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री और जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने खरगे के बयान पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के स्कोरकार्ड की चर्चा की। नीरज ने पूछा कि क्या खरगे कांग्रेस की विरासत से अनभिज्ञ हैं? उन्होंने कहा, “कांग्रेस अब 99 के चक्कर में फंस गई है।” नीरज का इशारा कांग्रेस की इस बार की 99 सीटों पर जीत की ओर था, जो पार्टी के लिए चिंता का विषय है।

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इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 240 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस 99 सीटों पर सिमट गई। हालांकि, रिजल्ट सामने आने के दो दिन बाद ही एक निर्दलीय सांसद ने कांग्रेस में शामिल होकर पार्टी की संख्या 100 तक पहुंचा दी। आई.एन.डी.आई. गठबंधन की 234 सीटों की जीत ने यह साफ कर दिया कि विपक्षी दलों की स्थिति मजबूत है और वे सत्ता पक्ष को कड़ी चुनौती देने में सक्षम हैं। इस चुनाव परिणाम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय राजनीति में गठबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। भाजपा को सरकार बनाने के लिए जेडीयू और टीडीपी जैसे सहयोगियों की जरूरत पड़ रही है, वहीं आई.एन.डी.आई. गठबंधन ने भी अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय राजनीति में अब एकल पार्टी की बजाय गठबंधन की राजनीति अधिक प्रभावी होती जा रही है।

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कांग्रेस के लिए यह समय आत्ममंथन और अपनी रणनीति पर पुनर्विचार का है। मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पार्टी को अब आगे की राह पर ध्यान केंद्रित करना होगा और उन कमजोरियों को दूर करना होगा जो इस चुनाव में उजागर हुईं। कांग्रेस को अब अपनी संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने के साथ ही युवाओं और नए वोटर्स को आकर्षित करने की दिशा में काम करना होगा। लोकसभा चुनाव के इस परिणाम ने भारतीय राजनीति में नए समीकरण और नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दिया है। भाजपा ने अपनी सरकार तो बना ली है, लेकिन उसे सहयोगी दलों की आवश्यकता ने उसकी स्थिति को कुछ हद तक कमजोर कर दिया है। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए यह समय एक नई शुरुआत और अपने लक्ष्यों को पुनः परिभाषित करने का है। मल्लिकार्जुन खरगे का तीखा बयान और आरजेडी का समर्थन इस बात का संकेत है कि विपक्ष अब और अधिक संगठित और आक्रामक रूप से अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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राज्यसभा उपचुनाव: 10 सीटों पर होगा खेल, I.N.D.I.A. को लगेगा तगड़ा झटका. https://chaupalkhabar.com/2024/06/13/rajya-sabha-by-election-10-seats-p/ https://chaupalkhabar.com/2024/06/13/rajya-sabha-by-election-10-seats-p/#respond Thu, 13 Jun 2024 10:48:28 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3581 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्यसभा के 10 सदस्य निचली में सदन पहुंच चुके हैं, जिससे उच्च सदन की 10 सीटें खाली हो गई हैं। राज्यसभा सचिवालय ने इन सीटों पर उपचुनाव का ऐलान कर दिया है। इस चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए …

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2024 के लोकसभा चुनाव में राज्यसभा के 10 सदस्य निचली में सदन पहुंच चुके हैं, जिससे उच्च सदन की 10 सीटें खाली हो गई हैं। राज्यसभा सचिवालय ने इन सीटों पर उपचुनाव का ऐलान कर दिया है। इस चुनाव के नतीजे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आ सकते हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की ताकत राज्यसभा में बढ़ने की उम्मीद है। जिन राज्यों में उपचुनाव होने वाले हैं, वहां फिलहाल बीजेपी-एनडीए की सरकार है। इस स्थिति में बीजेपी को अतिरिक्त सीटें हासिल करने का मौका मिल सकता है।

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कांग्रेस को इन उपचुनावों में दो सीटों का नुकसान हो सकता है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल और दीपेंद्र हुड्डा के लोकसभा चुनाव में जीतने की संभावना है। केसी वेणुगोपाल वर्तमान में राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं, जबकि दीपेंद्र हुड्डा हरियाणा से राज्यसभा सदस्य हैं। हरियाणा और राजस्थान दोनों राज्यों में बीजेपी के पास बहुमत है, जिससे इन सीटों पर बीजेपी की जीत की संभावना अधिक है। राज्यसभा की खाली हुई 10 सीटों में से सात सीटें बीजेपी के पास थीं। दो सीटें कांग्रेस के पास थीं, जबकि एक सीट राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पास थी। उपचुनाव के परिणामस्वरूप, कांग्रेस की दो सीटें भी बीजेपी के खाते में जा सकती हैं। ये दोनों सीटें हरियाणा और राजस्थान से हैं।

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बिहार, महाराष्ट्र और असम से दो-दो सीटें खाली हुई हैं। बिहार में एनडीए की सरकार है, महाराष्ट्र और असम में बीजेपी सहयोगी दलों के साथ सरकार चला रही है। मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत है, जबकि त्रिपुरा में भी बीजेपी की सरकार है। बिहार की दो सीटों में से एक सीट एनडीए को मिल सकती है और दूसरी सीट आई.एन.डी.आई. गठबंधन को मिल सकती है। हालांकि, बिहार में यदि एक सीट आई.एन.डी.आई. गठबंधन को मिल भी जाती है, तब भी बीजेपी कुल 10 में से 9 सीटें अपने खाते में जोड़ सकती है।

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बिहार के सारण में चुनावी हिंसा, गोली लगने से एक की मौत, दो घायल, 48 घंटे के लिए किया गया इंटरनेट बंद https://chaupalkhabar.com/2024/05/21/elections-are-in-saran-of-bihar/ https://chaupalkhabar.com/2024/05/21/elections-are-in-saran-of-bihar/#respond Tue, 21 May 2024 06:06:55 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3340 बिहार के सारण में लोकसभा सीट पर सोमवार को हुए पांचवें चरण की वोटिंग के बाद जमकर हिंसा हुई। इस लोकसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से रोहिणी आचार्य उम्मीदवार हैं। मतदान खत्म होने के बाद जब वह छपरा शहर के एक बूथ पर पहुंचीं, तो वहां जमकर हंगामा हुआ। सारण में …

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बिहार के सारण में लोकसभा सीट पर सोमवार को हुए पांचवें चरण की वोटिंग के बाद जमकर हिंसा हुई। इस लोकसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की ओर से रोहिणी आचार्य उम्मीदवार हैं। मतदान खत्म होने के बाद जब वह छपरा शहर के एक बूथ पर पहुंचीं, तो वहां जमकर हंगामा हुआ। सारण में मंगलवार को विवाद बढ़ने पर दो पक्षों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें तीन लोगों को गोली लगी। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है और क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है।

घटना के बाद छपरा के भिखारी ठाकुर चौक पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। मौके पर जिले के एसपी और डीएम भी मौजूद हैं। सोमवार शाम को आरजेडी उम्मीदवार रोहिणी आचार्य इसी इलाके के बूथ संख्या 118 पर पहुंची थीं। एक चश्मदीद स्थानीय नागरिक ने बताया कि दोनों पक्षों के लोग भारी संख्या में मौजूद थे और उनके पास लाठी-डंडे थे। दोनों तरफ से गोलियां भी चलीं। तीन लोगों को गोली लगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रोहिणी आचार्य ने बूथ पर पहुंचकर मतदाताओं के साथ गलत बर्ताव किया था और उनके समर्थक भी साथ थे। आक्रोशित भीड़ को देखकर रोहिणी आचार्य को वहां से निकलना पड़ा, लेकिन मंगलवार सुबह फिर से विवाद बढ़ गया और गोलीबारी की घटना हो गई।

दो पक्षों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें तीन लोगों को गोली लगी। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई.

सारण के एसपी गौरव मंगला ने बताया कि सोमवार को आरजेडी और बीजेपी के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ था। इसी के प्रतिक्रम में मंगलवार को कुछ लोगों ने गोलीबारी की। तीन लोगों को गोली लगी है, जिसमें एक की मौत हो गई है और दो लोग अस्पताल में भर्ती हैं। जिन लोगों ने यह घटना भड़काई थी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया है। सोमवार को लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण के तहत आठ राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की 49 सीटों पर मतदान हुआ था। इस चरण के तहत बिहार की पांच सीटों पर वोटिंग हुई थी, जिनमें सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण और हाजीपुर शामिल हैं। बिहार में पांचवे चरण में 52.93% वोटिंग हुई थी।

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घटना के बाद से सारण क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके। इस घटना ने क्षेत्र में चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। सोमवार शाम को जब रोहिणी आचार्य बूथ संख्या 118 पर पहुंचीं, तो वहां पहले से ही तनावपूर्ण माहौल था। स्थानीय लोगों का कहना है कि रोहिणी आचार्य के बूथ पर पहुंचने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। रोहिणी आचार्य के समर्थकों और विरोधी दल के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई।

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है और क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है।

घटनास्थल पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि दोनों पक्षों के लोग हाथों में लाठी-डंडे लेकर आए थे। दोनों तरफ से तीखी नारेबाजी हो रही थी और फिर अचानक गोलियां चलने लगीं। तीन लोगों को गोली लगी और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां एक व्यक्ति की मौत हो गई। घटना के बाद से इलाके में भारी तनाव है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कार्रवाई की और दो लोगों को हिरासत में लिया। एसपी गौरव मंगला ने बताया कि इस घटना में शामिल सभी दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

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इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का निर्णय इसीलिए लिया गया है ताकि अफवाहों और गलत जानकारी फैलाने से रोका जा सके। बिहार में चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार की घटना ने सभी को चौंका दिया है। मतदाताओं में भी इस घटना के बाद से डर और असुरक्षा की भावना है। प्रशासन को उम्मीद है कि वे जल्द ही स्थिति को नियंत्रण में ला पाएंगे और इलाके में शांति स्थापित कर पाएंगे। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक क्षेत्र में पुलिस का भारी बंदोबस्त रहेगा। डीएम ने कहा कि मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए प्रशासन ने हर संभव कदम उठाए हैं और जो भी इस तरह की घटनाओं में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने चुनावी राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच तनाव बढ़ गया है और यह चुनावी माहौल को और भी गरमा सकता है। ऐसे समय में प्रशासन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कुल मिलाकर, सारण में चुनाव के दौरान हुई हिंसा ने पूरे बिहार में हलचल मचा दी है। यह देखना बाकी है कि प्रशासन कैसे इस स्थिति को संभालता है और दोषियों को सजा दिलाने में कितनी सफल होती है। मतदाताओं को सुरक्षित और निष्पक्ष मतदान का माहौल देने की जिम्मेदारी अब प्रशासन पर है। सारण की इस घटना ने एक बार फिर चुनावी हिंसा और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और चुनाव आयोग को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और सभी मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

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लालू यादव ने अपने जिगरी दोस्त को आरजेडी में फिर दी जगह, अपने दफ्तर में दिलाई सदस्यता साथ में मनोज झा रहे मौजूद. https://chaupalkhabar.com/2024/05/09/lalu-yadav-gave-his-best-friend/ https://chaupalkhabar.com/2024/05/09/lalu-yadav-gave-his-best-friend/#respond Thu, 09 May 2024 10:22:26 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3160 रंजन यादव, जो पूर्व में लालू यादव को हराने वाले और बाद में उनके खास दोस्त बन गए, ने एक बार फिर से आरजेडी का दामन थाम लिया है। पूर्व सांसद रंजन यादव को मनोज झा ने एक बार फिर से पार्टी की सदस्यता दिलाई है। रंजन यादव ने 2009 में लालू यादव को पाटलीपुत्र …

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रंजन यादव, जो पूर्व में लालू यादव को हराने वाले और बाद में उनके खास दोस्त बन गए, ने एक बार फिर से आरजेडी का दामन थाम लिया है। पूर्व सांसद रंजन यादव को मनोज झा ने एक बार फिर से पार्टी की सदस्यता दिलाई है। रंजन यादव ने 2009 में लालू यादव को पाटलीपुत्र संसदीय क्षेत्र से हराया था।

पाटलिपुत्र संसदीय सीट से कभी लालू प्रसाद को पटखनी देने वाले जदयू नेता रंजन यादव एक बार फिर राजद में शामिल हो गए। वे आज राजद कार्यालय में आयोजित एक मिलन समारोह में रंजन यादव राजद के साथ जुड़ गए। रंजन यादव किसी दौर में लालू प्रसाद के मित्रों की श्रेणी में शामिल थे। लालू प्रसाद के अधिकांश फैसलों में रंजन यादव उनके साथ रहे। रंजन यादव दो बार राज्यसभा सदस्य भी रहे। दोनों बार जनता दल ने उन्हें यह मौका दिया। पहली बार 1990 से 1996 और इसके बाद 1996 से 2002 तक, लेकिन इसके बाद वे राजद छोड़ जदयू में शामिल हो गए।

इससे पहले रंजन यादव बुधवार को लालू प्रसाद से राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर मुलाकात कर राजद में शामिल होने वाले थे। लेकिन, आदर्श आचार संहिता को देखते हुए कल यह कार्य हो नहीं पाया। मनोज झा ने कहा कि रंजन यादव पुराने समाजवादी हैं। उनके वापस पार्टी में शामिल होने से राजद और मजबूत होगा। जदयू ने उन्हें 2009 के लोकसभा चुनाव में पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। उनका मुकाबला राजद नेता और पुराने मित्र लालू प्रसाद से होना था। इस चुनाव में लालू प्रसाद अपने मित्र रंजन यादव से पराजित रहे। बाद में उनका जदयू से भी मोहभंग हुआ और वे कुछ दिनों के लिए भाजपा में आए।

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इसके पूर्व उन्होंने अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राष्ट्रवादी) भी बनाई, लेकिन समय के साथ वे राजनीति के हाशिये पर चले गए। अब रंजन यादव एक बार फिर राजनीति में वापसी कर ली है। रंजन यादव ने राजनीति में अपना कदम बड़े ही साहसिकी से रखा और लालू यादव के साथ एक बड़ा संघर्ष किया। उनका योगदान राजनीतिक वातावरण में महत्वपूर्ण रहा है और उन्होंने अपने संघर्षों के माध्यम से अपने आत्मविश्वास को साबित किया। रंजन यादव की राजनीतिक यात्रा में कई मोड़ आए और उन्होंने हमेशा नए उतार-चढ़ाव का सामना किया। उन्होंने लालू यादव के साथ मित्रता की शुरुआत की, लेकिन फिर उनके बीच अलगाव हो गया। रंजन यादव का पुनरागमन राजनीति में एक महत्वपूर्ण पल बन सकता है। उनकी वापसी से राजद को नई ऊर्जा मिलेगी और पार्टी को मजबूती मिलेगी।

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रंजन यादव के भविष्य के बारे में कुछ कहना अभी नहीं सम्भव है, लेकिन उनका पुनरागमन राजनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्हें अपने करियर के नए चरण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है और उनका योगदान राजनीतिक व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

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