SIT - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Fri, 04 Oct 2024 08:10:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg SIT - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 तिरुपति लड्डू मामले में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, एसआईटी जांच का आदेश https://chaupalkhabar.com/2024/10/04/tirupati-laddu-case-in-s/ https://chaupalkhabar.com/2024/10/04/tirupati-laddu-case-in-s/#respond Fri, 04 Oct 2024 08:10:00 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5215 सुप्रीम कोर्ट में तिरुपति लड्डू में कथित रूप से पशु चर्बी की मिलावट के मामले की सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति बीआर गवई के नेतृत्व वाली पीठ ने इस मामले में एक नई स्वतंत्र विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया है। अदालत का यह कदम करोड़ों भक्तों की आस्था और भावनाओं को ध्यान में …

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सुप्रीम कोर्ट में तिरुपति लड्डू में कथित रूप से पशु चर्बी की मिलावट के मामले की सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति बीआर गवई के नेतृत्व वाली पीठ ने इस मामले में एक नई स्वतंत्र विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया है। अदालत का यह कदम करोड़ों भक्तों की आस्था और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, क्योंकि आरोपों के बाद लोगों की धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुंची है।

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एसआईटी की जांच के माध्यम से इस विवाद को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से सुलझाया जाएगा। न्यायमूर्ति गवई ने कहा, “हम यह आदेश इसलिए दे रहे हैं क्योंकि इस मामले में लाखों भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है। उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।” अदालत ने एसआईटी में 5 सदस्यों की टीम गठित करने का निर्देश दिया है, जिसमें दो सदस्य केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से, दो सदस्य आंध्र प्रदेश राज्य पुलिस से और एक सदस्य खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) का विशेषज्ञ होगा। यह टीम मामले की गहन जांच करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि लड्डू में मिलावट के आरोपों की सच्चाई का पता चले।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि तिरुपति लड्डू, जिसे तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाया जाता है, से जुड़े मिलावट के आरोप न केवल कानूनी बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी गंभीर हैं। आरोपों से देश और विदेश में भगवान वेंकटेश्वर के लाखों भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे राजनीतिक दायरे से भी दूर रखना आवश्यक है। जस्टिस गवई ने टिप्पणी की थी कि “भगवान को राजनीति से दूर रखें,” जो पिछले सुनवाई के दौरान की गई थी।

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अदालत ने यह भी देखा कि इस मामले में प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट स्पष्ट नहीं है। यह आशंका व्यक्त की गई कि जिस घी का परीक्षण किया गया था, वह अस्वीकार्य घी हो सकता है, जिससे रिपोर्ट पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि आस्था और धार्मिक मान्यताओं का सवाल है, इसलिए जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक नई और स्वतंत्र एसआईटी का गठन किया गया है। अदालत ने इस मामले को राजनीतिक रंग देने के प्रयासों को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला किसी राजनीतिक ड्रामा में तब्दील नहीं होना चाहिए। न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि यदि जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष होगी, तो जनता में विश्वास उत्पन्न होगा और यह सुनिश्चित होगा कि तिरुपति लड्डू के प्रसाद में कोई भी अनियमितता नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू विवाद पर सुनवाई की, कहा – भगवान को राजनीति से दूर रखा जाए https://chaupalkhabar.com/2024/09/30/supreme-court-in-tirupati/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/30/supreme-court-in-tirupati/#respond Mon, 30 Sep 2024 09:56:16 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5160 सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तिरुपति लड्डू प्रसादम से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। इस विवाद में आरोप लगाया गया था कि तिरुमाला मंदिर में दिए जाने वाले प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू प्रसादम में मिलावट की गई थी। कोर्ट ने कहा कि भगवान के प्रसाद से जुड़ा यह मामला संवेदनशील है, और इस पर राजनीति नहीं …

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तिरुपति लड्डू प्रसादम से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। इस विवाद में आरोप लगाया गया था कि तिरुमाला मंदिर में दिए जाने वाले प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू प्रसादम में मिलावट की गई थी। कोर्ट ने कहा कि भगवान के प्रसाद से जुड़ा यह मामला संवेदनशील है, और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार के वकील से भी कुछ अहम सवाल किए, जिनमें प्रेस में दिए गए बयान और एसआईटी जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की तरफ से दी गई रिपोर्टों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि लैब टेस्ट रिपोर्ट से यह पता चलता है कि घी का जो सैंपल जांच के लिए भेजा गया था, वह पहले ही रिजेक्ट किया हुआ घी था। इसके अलावा, कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि एसआईटी (विशेष जांच दल) जांच के आदेश के बावजूद प्रेस में बयान देने की जरूरत क्या थी? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “जब एसआईटी जांच जारी है, तो जांच के नतीजे आने से पहले प्रेस में जाने की क्या आवश्यकता थी?” इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव, जो सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर याचिका का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने अदालत में कहा कि वे एक भक्त के रूप में अदालत में आए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लड्डू प्रसादम में संदूषण के आरोप बेहद गंभीर हैं और इसके चलते प्रेस में दिए गए बयान के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

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राजशेखर राव ने कहा कि तिरुपति लड्डू से जुड़े विवाद में धार्मिक और सांप्रदायिक सौहार्द्र पर खतरा मंडरा सकता है, क्योंकि प्रसाद पर लगाए गए आरोप न सिर्फ भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं बल्कि इस विवाद के चलते सांप्रदायिक तनाव भी पैदा हो सकता है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि भगवान के प्रसाद पर लगाए गए आरोप चिंता का विषय हैं। कोर्ट ने यह सुझाव दिया कि सॉलिसिटर जनरल इस बात पर कोर्ट की मदद करें कि पहले से गठित एसआईटी जांच को जारी रखा जाए या किसी स्वतंत्र एजेंसी से इस मामले की जांच कराई जाए।

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कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को तय की और कहा कि इस दौरान सभी पक्ष संयम बरतें और जांच प्रक्रिया पूरी होने तक कोई बयानबाजी न करें। जस्टिस ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयानबाजी से मामला और उलझ सकता है, इसलिए सभी संबंधित पक्षों को बयान देने में सतर्क रहना चाहिए। तिरुपति लड्डू विवाद की जड़ में यह आरोप है कि आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल के दौरान तिरुमाला मंदिर के लड्डू प्रसादम में पशु उत्पादों की मिलावट की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, लड्डू में इस्तेमाल किए गए घी के सैंपल की जांच में पाया गया कि उसमें लार्ड (सुअर की चर्बी), टैलो (गाय की चर्बी), और मछली के तेल की मिलावट थी। इन आरोपों ने भक्तों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि तिरुपति लड्डू भगवान वेंकटेश्वर का प्रसाद है और इसकी पवित्रता पर सवाल खड़े करना आस्था से खिलवाड़ माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और इस पर कोई भी अंतिम निर्णय जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।

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तिरुपति लड्डू विवाद, घी में मिलावट की जांच के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की https://chaupalkhabar.com/2024/09/27/tirupati-laddu-controversy-in-ghee/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/27/tirupati-laddu-controversy-in-ghee/#respond Fri, 27 Sep 2024 09:59:57 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5127 तिरुपति मंदिर के प्रतिष्ठित लड्डू प्रसादम में जानवरों की चर्बी वाला घी और फिश ऑयल की मिलावट के आरोपों के बीच, आंध्र प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस विवाद के बढ़ने के साथ ही मंदिर और श्रद्धालुओं के बीच चिंता बढ़ गई …

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तिरुपति मंदिर के प्रतिष्ठित लड्डू प्रसादम में जानवरों की चर्बी वाला घी और फिश ऑयल की मिलावट के आरोपों के बीच, आंध्र प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस विवाद के बढ़ने के साथ ही मंदिर और श्रद्धालुओं के बीच चिंता बढ़ गई थी, जिससे सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी। आदेश के अनुसार, तिरुपति लड्डू में कथित तौर पर जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किए जाने की जांच के लिए यह एसआईटी बनाई गई है। गुंटूर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी को इस एसआईटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके नेतृत्व में यह टीम पूरी जांच करेगी और मामले की सच्चाई का पता लगाएगी।

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आधिकारिक बयान में बताया गया है कि एसआईटी को जांच के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार के किसी भी विभाग से संबंधित जानकारी प्राप्त करने और आवश्यक सहयोग मांगने की पूरी छूट होगी। सभी विभागों को आदेश दिया गया है कि वे एसआईटी को जांच में हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे। इसके अलावा, एसआईटी आवश्यकता अनुसार तकनीकी या विशेषज्ञ सहयोग भी प्राप्त कर सकती है। एसआईटी की मदद के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) की अनुमति से बाहरी विशेषज्ञों की सहायता भी ली जा सकती है।

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इस नौ सदस्यीय टीम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। एसआईटी में शामिल प्रमुख सदस्य निम्नलिखित हैं:

1. सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, एसआईटी अध्यक्ष (आईजीपी, गुंटूर रेंज)
2. आईपीएस गोपीनाथ जट्टी
3. आईपीएस वी हर्षवर्धन राजू
4. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वेंकट राव
5. पुलिस उपाधीक्षक जी सीताराम राव
6. पुलिस उपाधीक्षक जे शिवनारायण स्वामी
7. स्पेशल ब्रांच निरीक्षक टी सत्यनारायण
8. एनटीआर पुलिस आयुक्तालय निरीक्षक के उमामहेश्वर
9. सर्कल इंस्पेक्टर एम सूर्यनारायण

तिरुपति लड्डू प्रसादम की पवित्रता पर उठे इस विवाद ने न सिर्फ आस्थावान भक्तों को हिला दिया है, बल्कि राज्य सरकार के लिए भी एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। इस एसआईटी के गठन से उम्मीद की जा रही है कि घी में किसी भी तरह की मिलावट की सच्चाई सामने आएगी और श्रद्धालुओं के विश्वास को बहाल किया जा सकेगा।

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तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू में पशु चर्बी की रिपोर्ट पर सियासी घमासान, जांच के लिए SIT गठित. https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/tirupati-balaji-temple/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/23/tirupati-balaji-temple/#respond Mon, 23 Sep 2024 06:03:04 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=5055 आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद (लड्डू) में कथित तौर पर पशुओं की चर्बी मिलने की रिपोर्ट से राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। रिपोर्ट्स सामने आने के बाद से ही इस मामले पर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। इस विवाद के बीच, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू …

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आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद (लड्डू) में कथित तौर पर पशुओं की चर्बी मिलने की रिपोर्ट से राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। रिपोर्ट्स सामने आने के बाद से ही इस मामले पर राज्य सरकार और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। इस विवाद के बीच, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने रविवार को विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है, जो इस मामले की गहराई से जांच करेगी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने मामले को गंभीरता से लेते हुए SIT गठन का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इस विशेष टीम द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट जल्द ही सरकार को सौंपी जाएगी। इसके बाद सरकार इस मुद्दे पर उचित कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। SIT का गठन इस उद्देश्य से किया गया है ताकि प्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलाने के पीछे की असल वजहों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार लोगों को सजा दी जा सके।

इस बीच, आंध्र प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री और जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने इस मामले को लेकर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के प्रति ऐसा अपवित्र कार्य बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर इसी प्रकार का कृत्य किसी मस्जिद या चर्च में होता, तो देशभर में गुस्से की लहर फैल जाती। पवन कल्याण ने कहा कि हिंदू मंदिरों का अपमान करने पर हिंदू समाज चुप नहीं बैठेगा। पवन कल्याण ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए 11 दिन का प्रायश्चित उपवास करने का निर्णय लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “हे बालाजी भगवन, क्षमा करें। तिरुमाला लड्डू प्रसाद, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है, अब अपवित्र हो गया है। इसे पशुओं की चर्बी से दूषित किया गया है। यह अपराध केवल वही कर सकते हैं, जिनके दिल में दया और धार्मिक भावना नहीं है।”

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पवन कल्याण ने अपने संदेश में सनातन धर्म में आस्था रखने वाले सभी लोगों से अपील की कि वे इस अपवित्र कार्य का प्रायश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह प्रत्येक सनातन धर्मी की जिम्मेदारी है कि वह इस अपराध के खिलाफ आवाज उठाए। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि 22 सितंबर 2024 से वह गुंटूर जिले के नंबूर स्थित श्री दशावतार वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में उपवास शुरू करेंगे। यह उपवास 11 दिनों तक चलेगा, जिसके बाद वे तिरुमाला जाकर बालाजी के दर्शन करेंगे। पवन कल्याण ने भगवान से प्रार्थना की कि उन्हें ऐसे अपराधों का प्रायश्चित करने की शक्ति मिले। पवन कल्याण ने अपने बयान में आरोप लगाया कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के कुछ सदस्यों और कर्मचारियों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि बोर्ड के अधिकारियों ने समय पर इस अपराध का पता नहीं लगाया, जबकि यह उनकी जिम्मेदारी थी। उनका मानना है कि पूर्व के कुछ शासकों की राक्षसी प्रवृत्तियों के कारण तिरुपति के पवित्र लड्डू को अपवित्र किया गया।

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जनसेना प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के कर्मचारी और सदस्य, जो मंदिर की व्यवस्था का हिस्सा हैं, इस तरह के अपराधों को जानने के बाद भी चुप रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह डर केवल उन शासकों के कारण था, जो भगवान और धर्म को नहीं मानते थे और धार्मिक स्थलों को अपवित्र करते थे। राज्य सरकार के SIT द्वारा की गई जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री नायडू ने विश्वास दिलाया कि धार्मिक आस्थाओं से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मंदिर प्रशासन को इस तरह की घटनाओं से मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने के लिए भी सचेत किया गया है।

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर घोटाले के आरोप, सीबीआई और ईडी की जांच जारी. https://chaupalkhabar.com/2024/09/06/rg-kar-medical-college-k-pu-3/ https://chaupalkhabar.com/2024/09/06/rg-kar-medical-college-k-pu-3/#respond Fri, 06 Sep 2024 05:35:17 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4691 आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर वित्तीय कदाचार और अन्य अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों की जड़ में आरजी कर अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक डॉ. अख्तर अली की ओर से दाखिल की गई एक याचिका है, जिसे उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया। याचिका में डॉ. अली ने …

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर वित्तीय कदाचार और अन्य अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों की जड़ में आरजी कर अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक डॉ. अख्तर अली की ओर से दाखिल की गई एक याचिका है, जिसे उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया। याचिका में डॉ. अली ने संदीप घोष पर वित्तीय गड़बड़ियों के साथ-साथ टेंडरों में पक्षपात और मेडिकल कचरे की अवैध बिक्री के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही, घोष पर यह भी आरोप है कि उन्होंने पैसे लेकर मेडिकल छात्रों को परीक्षा में पास कराने का काम किया।

सीबीआई ने इस मामले में संदीप घोष के साथ सुरक्षा गार्ड अफसर अली, बिप्लब सिंह और सुमन हाजरा को भी गिरफ्तार किया है। आरोप यह भी हैं कि अस्पताल में विभिन्न टेंडरों की प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ। इसके अलावा, मेडिकल ऑर्गेनिक कचरे की अवैध बिक्री भी एक प्रमुख मुद्दा है, जिसमें भारी धनराशि का लेन-देन हुआ। ईडी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए संदीप घोष के कोलकाता स्थित आवास पर छापेमारी की, साथ ही हावड़ा में अन्य दो लोगों के आवासों पर भी तलाशी ली गई। ईडी ने जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत बरामद किए, जो इन आरोपों को पुष्ट करते हैं।

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यह मामला तब और भी गंभीर हो गया जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त को एक महिला प्रशिक्षु डॉक्टर का शव सेमिनार हॉल में पाया गया। शुरुआत में इस मामले की जांच कोलकाता पुलिस ने की, लेकिन बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर इस मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया गया। इस महिला डॉक्टर की मौत के 26 दिनों बाद, सीबीआई ने वित्तीय कदाचार के मामले में संदीप घोष और उनके तीन सहयोगियों को गिरफ्तार किया।

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16 अगस्त को कोलकाता पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया था, लेकिन अगले ही दिन हाईकोर्ट ने इस केस को भी सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने 24 अगस्त को औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया और इसके बाद कई गिरफ्तारियां कीं। संदीप घोष पर लगे इन गंभीर आरोपों के बाद आरजी कर मेडिकल कॉलेज का प्रशासन सवालों के घेरे में है। मामले की जांच अब ईडी और सीबीआई द्वारा की जा रही है, और उम्मीद है कि इस केस में न्याय जल्द ही होगा।

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बदलापुर स्कूल में दो बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न, गुस्साए अभिभावकों ने किया रेलवे ट्रैक जाम, सरकार ने गठित की एसआईटी. https://chaupalkhabar.com/2024/08/20/two-kids-in-badlapur-school/ https://chaupalkhabar.com/2024/08/20/two-kids-in-badlapur-school/#respond Tue, 20 Aug 2024 11:39:22 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=4383 महाराष्ट्र के ठाणे के बदलापुर शहर में स्थित एक प्रसिद्ध स्कूल के टॉयलेट में दो छोटी बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का केस सामने आया है, जिससे पूरे इलाके में भारी आक्रोश उत्पन्न कर दिया है। इस जघन्य घटना के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं और बदलापुर रेलवे स्टेशन से लेकर विभिन्न सड़कों …

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महाराष्ट्र के ठाणे के बदलापुर शहर में स्थित एक प्रसिद्ध स्कूल के टॉयलेट में दो छोटी बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का केस सामने आया है, जिससे पूरे इलाके में भारी आक्रोश उत्पन्न कर दिया है। इस जघन्य घटना के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं और बदलापुर रेलवे स्टेशन से लेकर विभिन्न सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। अभिभावकों ने प्रशासन से माफी और बच्चों की सुरक्षा की गारंटी की मांग की है। विरोध-प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने ट्रेनों की आवाजाही रोक दी है, जिससे रेलवे सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। मामला तब सामने आया जब स्कूल में पढ़ने वाली दो बच्चियों ने अपने माता-पिता को बताया कि एक सफाईकर्मी ने उनके साथ अश्लील हरकतें की हैं। घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की, लेकिन जब संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो उन्होंने सड़कों पर उतर कर विरोध शुरू कर दिया। बदलापुर रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ ने ट्रेनों की आवाजाही रोक दी, जिसके कारण अंबरनाथ और कर्जत के बीच अप और डाउन दोनों लाइनों पर लोकल सेवाएं प्रभावित हुईं।

घटना की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने तत्काल जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जांच में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्कूलों में सुरक्षा उपायों को और कड़ा करने का निर्देश भी दिया है।

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मामले में आरोपी सफाईकर्मी को पुलिस ने तत्काल गिरफ्तार कर लिया है। स्कूल प्रशासन ने आरोपी को निलंबित कर दिया है और स्कूल को पांच दिनों के लिए बंद कर दिया गया है ताकि जांच बिना किसी बाधा के पूरी की जा सके। सेंट्रल रेलवे डीआरएम मुंबई के अनुसार, बदलापुर में प्रदर्शन के कारण ट्रेनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। रेलवे ने यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए खेद जताया है और इस समस्या के समाधान के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया है, जिसके चलते अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेन सेवाएं ठप हो गई हैं।

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अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूल प्रशासन इस घटना की पूरी जिम्मेदारी ले और बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने सरकार से यह भी मांग की है कि इस मामले में न्याय तेजी से दिलाया जाए। बदलापुर की इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। मामले की जांच और दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से जुटा हुआ है। इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे हल करने के लिए सरकार और प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।

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“हाथरस दुर्घटना: एसआईटी की जांच में कार्यक्रम आयोजक और प्रशासनिक लापरवाही उजागर, कई अधिकारी निलंबित” https://chaupalkhabar.com/2024/07/09/hathras-accident-sit-ki/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/09/hathras-accident-sit-ki/#respond Tue, 09 Jul 2024 08:19:54 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3880 हाथरस जिले के सिकंदराराऊ में दो जुलाई को हुई दुर्घटना में 121 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने एडीजी जोन आगरा और मंडलायुक्त अलीगढ़ के नेतृत्व में घटनास्थल का निरीक्षण किया और अपनी जांच में कार्यक्रम …

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हाथरस जिले के सिकंदराराऊ में दो जुलाई को हुई दुर्घटना में 121 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने एडीजी जोन आगरा और मंडलायुक्त अलीगढ़ के नेतृत्व में घटनास्थल का निरीक्षण किया और अपनी जांच में कार्यक्रम आयोजक, तहसील स्तरीय पुलिस और प्रशासन को दोषी पाया। जांच के दौरान एसआईटी ने दो, तीन, और पांच जुलाई को घटनास्थल का निरीक्षण किया। कुल 125 लोगों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ आम जनता और प्रत्यक्षदर्शी भी शामिल थे। एसआईटी ने समाचार पत्रों, स्थलीय वीडियोग्राफी, छायाचित्रों, और वीडियो क्लिपिंग्स का भी अध्ययन किया।

प्रारंभिक जांच में, एसआईटी ने चश्मदीद गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्यक्रम आयोजकों को मुख्य रूप से दोषी ठहराया। जांच समिति ने दुर्घटना के पीछे किसी बड़ी साजिश से इनकार नहीं किया है और गहन जांच की जरूरत बताई है। एसआईटी ने कार्यक्रम आयोजक और तहसील स्तरीय पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को भी जिम्मेदार माना। उप जिला मजिस्ट्रेट सिकंदराराऊ ने बिना स्थल का मुआयना किए कार्यक्रम की अनुमति प्रदान की और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित नहीं किया।

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एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर, राज्य सरकार ने एसडीएम, सीओ, तहसीलदार, इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज कचौरा, और चौकी इंचार्ज पोरा को सस्पेंड कर दिया है। आयोजकों ने तथ्यों को छिपाकर कार्यक्रम की अनुमति ली और अनुमति के शर्तों का अनुपालन नहीं किया। अप्रत्याशित भीड़ को आमंत्रित कर पर्याप्त और सुचारू व्यवस्था नहीं की गई।आयोजक मंडल से जुड़े लोग अव्यवस्था फैलाने के दोषी पाए गए। उन्होंने पुलिस वेरिफिकेशन के बिना लोगों को जोड़ा, जिससे अव्यवस्था फैली। आयोजक मंडल ने पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया और स्थानीय पुलिस को कार्यक्रम स्थल पर निरीक्षण से रोका। सत्संगकर्ता और भीड़ को बिना सुरक्षा प्रबंध के आपस में मिलने की छूट दी गई। भारी भीड़ के बावजूद यहां किसी प्रकार की बैरिकेडिंग या पैसेज की व्यवस्था नहीं बनाई गई थी।

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दुर्घटना के बाद, आयोजक मंडल के सदस्य घटनास्थल से भाग गए, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इस घटना ने प्रशासनिक और पुलिस प्रणाली की खामियों को उजागर किया। राज्य सरकार ने एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर कठोर कार्रवाई की है और दोषी अधिकारियों और आयोजकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। इस घटना ने हाथरस जिले में सुरक्षा और व्यवस्था के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कार्यक्रम आयोजकों की लापरवाही और प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी ने इस त्रासदी को जन्म दिया। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और प्रशासनिक तंत्र में सुधार हो।

एसआईटी की जांच रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों का पालन न करने और कार्यक्रम की अनुमति देने में लापरवाही बरतने के कारण यह दुर्घटना हुई। इस मामले ने दिखाया कि कैसे स्थानीय प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की लापरवाही ने इतनी बड़ी त्रासदी को जन्म दिया। यह घटना एक चेतावनी है कि सुरक्षा और व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है। एसआईटी की सिफारिशों के आधार पर, राज्य सरकार ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। यह कदम प्रशासनिक तंत्र को सुधारने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उठाया गया है। इस घटना से सबक लेते हुए, भविष्य में कार्यक्रमों की अनुमति देने में सतर्कता बरतने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता है।

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हाथरस में त्रासदी: धार्मिक सभा में मची भगदड़ से 121 लोगों की मौत, अधिकतर महिलाएं; एसआईटी करेगी जांच. https://chaupalkhabar.com/2024/07/03/tragedy-in-hathras-religious/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/03/tragedy-in-hathras-religious/#respond Wed, 03 Jul 2024 11:41:02 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3832 हाथरस, उत्तर प्रदेश में हुए दुखद हादसे में मरने वालों की संख्या अब 121 हो गई है। मृतकों में से अधिकांश महिलाएं हैं। कुल मृतकों में से 102 शवों की पहचान हो चुकी है, जबकि 19 शव अज्ञात हैं। पहचाने गए शवों का वितरण इस प्रकार है: 38 शव अलीगढ़ भेजे गए, 34 हाथरस, 21 …

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हाथरस, उत्तर प्रदेश में हुए दुखद हादसे में मरने वालों की संख्या अब 121 हो गई है। मृतकों में से अधिकांश महिलाएं हैं। कुल मृतकों में से 102 शवों की पहचान हो चुकी है, जबकि 19 शव अज्ञात हैं। पहचाने गए शवों का वितरण इस प्रकार है: 38 शव अलीगढ़ भेजे गए, 34 हाथरस, 21 आगरा और 28 एटा भेजे गए। मृतकों में एक व्यक्ति फिरोजाबाद से, 16 आगरा से, 12 अलीगढ़ से, 19 हाथरस से, नौ एटा से और नौ कासगंज से हैं। इसके अतिरिक्त एक व्यक्ति गौतम बुद्ध नगर और ललितपुर से, आठ मथुरा से, एक संभल से, एक अनुपशहर से, छह बदायूं से, एक पीलीभीत से, चार शाहजहांपुर से, दो औरैया से और चार बुलंदशहर से अपनी जान गंवा चुके हैं।

अन्य राज्यों से भी लोग सत्संग में शामिल हुए थे, जिसमें तीन फरीदाबाद से, एक पलवल से, एक राजस्थान से और एक ग्वालियर से हैं। यह भयानक घटना, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, तब हुई जब भक्त नारायण सकार विश्व हरि (भोले बाबा) के सत्संग के बाद उनके आशीर्वाद लेने और उनके चरण स्पर्श करने के लिए दौड़े। मृतकों में अधिकांश महिलाएं हैं। यह त्रासदी राज्य में प्रयागराज महाकुंभ में 1954 में हुई भगदड़ के बाद दूसरी सबसे बड़ी है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस भगदड़ के कारणों का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की घोषणा की, जिसमें 121 भक्तों की मौत हो गई। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह एक दुर्घटना थी या जानबूझकर की गई साजिश। जांच में हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। घटना के बचे हुए लोगों के प्रत्यक्षदर्शी बयानों को भी जांच के लिए एकत्र किया गया है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी जांच की जाएगी। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत उपायों की भी घोषणा की और वादा किया कि घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बड़े आयोजनों में सुरक्षा उपायों की राज्यव्यापी समीक्षा की है।

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यह दुखद घटना बड़े आयोजनों, विशेष रूप से धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है, जो बड़ी भीड़ को आकर्षित करते हैं। राज्य सरकार अब सख्त नियमों को लागू करने और यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि ऐसे आयोजनों में भाग लेने वाले भक्तों और लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाएं। हाथरस की घटना के बाद का असर परिवारों को शोक में और समुदायों को सदमे में छोड़ गया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, जवाबदेही और भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचने के लिए रोकथाम के उपायों की मांग बढ़ रही है। सरकार की प्रतिक्रिया और जांच के परिणाम सार्वजनिक विश्वास बहाल करने और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने में महत्वपूर्ण होंगे।

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