three new criminal laws - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Mon, 01 Jul 2024 10:00:39 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg three new criminal laws - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 पहली FIR यहां हुई दर्ज, नहीं दिल्ली में; गृह मंत्री अमित शाह ने बताया क्या था अपराध https://chaupalkhabar.com/2024/07/01/first-fir-not-recorded-here/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/01/first-fir-not-recorded-here/#respond Mon, 01 Jul 2024 10:00:39 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3802 नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद विपक्ष उनके खिलाफ खामियां गिनाने में जुट गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इन कानूनों में पिछले कानूनों से ज्यादा अंतर नहीं है और इसमें सिर्फ कमियां ही हैं। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इसे सिर्फ ‘कॉपी पेस्ट’ करार दिया है। विपक्ष के इन आरोपों …

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नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद विपक्ष उनके खिलाफ खामियां गिनाने में जुट गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इन कानूनों में पिछले कानूनों से ज्यादा अंतर नहीं है और इसमें सिर्फ कमियां ही हैं। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इसे सिर्फ ‘कॉपी पेस्ट’ करार दिया है। विपक्ष के इन आरोपों का जवाब देने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और तीनों नए कानूनों के बारे में जानकारी दी। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत पहला मामला दिल्ली में नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर में दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि ग्वालियर के एक पुलिस स्टेशन में एक मोटरसाइकिल चोरी का मामला नए कानूनों के तहत दर्ज किया गया। यह मामला रात 12 बजकर 10 मिनट पर दर्ज हुआ था। शाह ने कहा कि दिल्ली के कमला मार्केट थाने में दर्ज मामला दिल्ली में नए कानूनों के तहत दर्ज किए गए पहले मामलों में से एक था, लेकिन वह पहला मामला नहीं था।

शाह ने यह भी बताया कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर एक ठेले वाले पर सड़क पर अवरोध पैदा करने की एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि, पुलिस ने इस मामले की समीक्षा करने के बाद इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए पहले से ही प्रावधान थे और यह कोई नया प्रावधान नहीं है। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि नए कानूनों का मकसद आपराधिक न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों के जरिए पुलिस और न्यायालय की कार्यवाही में तेजी लाई जाएगी और दोषियों को सजा मिलने में कम समय लगेगा। विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शाह ने कहा कि विपक्ष को इन कानूनों का अध्ययन करना चाहिए और उनके सकारात्मक पहलुओं को भी देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह कानून देश की जनता की सुरक्षा और न्याय के लिए बनाए हैं और विपक्ष को इन पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।

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शाह ने यह भी कहा कि सरकार इन कानूनों के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता बरतेगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन कानूनों के जरिए न्याय प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाया जाएगा ताकि लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने बताया कि सरकार ने इन कानूनों को बनाने से पहले विशेषज्ञों की राय ली और व्यापक स्तर पर सलाह-मशविरा किया। शाह ने कहा कि नए कानूनों के तहत पुलिस और न्यायालय की कार्यवाही में तेजी लाई जाएगी और दोषियों को सजा मिलने में कम समय लगेगा।

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इस प्रकार, गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए नए आपराधिक कानूनों की विशेषताओं और उनकी आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने इन कानूनों को जनता की सुरक्षा और न्याय के लिए बनाया है और विपक्ष को इन्हें राजनीति का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।

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नए कानूनों पर मंत्री सौरभ भारद्वाज की प्रतिक्रिया, दिल्ली पुलिस आयुक्त ने दिया अहम अपडेट. https://chaupalkhabar.com/2024/07/01/new-laws-on-minister-saurabh/ https://chaupalkhabar.com/2024/07/01/new-laws-on-minister-saurabh/#respond Mon, 01 Jul 2024 06:55:12 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3792 1 जुलाई 2024 से भारत में नई आपराधिक न्याय प्रणाली लागू हो गई है। ब्रिटिश काल के कानूनों की जगह अब भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली ने ले ली है, जिसे आधुनिक और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया था। इस प्रक्रिया के लिए 2022 में 3375 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था ताकि विभिन्न …

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1 जुलाई 2024 से भारत में नई आपराधिक न्याय प्रणाली लागू हो गई है। ब्रिटिश काल के कानूनों की जगह अब भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली ने ले ली है, जिसे आधुनिक और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया था। इस प्रक्रिया के लिए 2022 में 3375 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था ताकि विभिन्न प्लेटफार्मों को जोड़कर नई प्रणाली बनाई जा सके। दो साल के अंदर यह कार्य काफी हद तक पूरा हो गया है और अब इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने नए कानूनों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों के लागू होने से लोगों को फिर से इन्हें समझना पड़ेगा, जिससे उन्हें काफी परेशानी होगी। उनका मानना है कि कानूनों में कोई खामी नहीं है, बल्कि उनकी क्रियान्वयन और जांच एजेंसियों में खामियां हैं। उन्होंने कहा, “पुलिस उन कानूनों पर ठीक से कार्रवाई नहीं करती। मुझे लगता है कि नए कानूनों के कारण आने वाले कई सालों तक बहुत भ्रम की स्थिति बनी रहेगी।”

भारद्वाज ने आगे कहा कि एक आम नागरिक, जिसने बड़ी मुश्किल से कुछ पुराने कानूनों को समझा था, उन्हें अब फिर से एक बार अपने केस दर्ज करवाने में कठिनाइयों को सामना करना पड़ेगा । उन्होंने आगे यह भी कहा, “मुझे लगता है कि इससे पुलिस की मनमानी को और बढ़ावा मिलेगा ।”दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने नए आपराधिक कानूनों के बारे में सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस तीनों नए कानूनों को लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। जिसके बाद उन्होंने कहा , “हमने आज सुबह से ही नए कानूनों के तहत FIR दर्ज करना शुरू कर दिया है।”

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नई आपराधिक न्याय प्रणाली को लागू करने के लिए सरकार ने विभिन्न प्लेटफार्मों को एकीकृत किया है। इसके तहत, अपराधियों को पकड़ने और न्याय दिलाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग किया गया है। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य यह है कि न्याय प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष हो। मंत्री सौरभ भारद्वाज ने नए कानूनों के क्रियान्वयन पर अपनी चिंता व्यक्त की है, लेकिन उनका यह भी मानना है कि अगर इन कानूनों को सही तरीके से लागू किया गया तो यह देश के आपराधिक न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार ला सकता है। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली के तहत सभी संबंधित पक्षों को अपने कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा करना होगा।

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संजय अरोड़ा ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने नए कानूनों के तहत काम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है और वे नए सिस्टम को पूरी तरह से अपनाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नए कानूनों के तहत काम करने से पुलिस की क्षमता और दक्षता में वृद्धि होगी। नए कानूनों के लागू होने से एक आम नागरिक को शुरूआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में यह देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाएगा। इन सुधारों का उद्देश्य यह है कि न्याय प्रणाली में सुधार हो और अपराधियों को तेजी से सजा मिल सके। नए आपराधिक कानूनों के तहत न्याय प्रणाली को अधिक तकनीकी और वैज्ञानिक बनाया गया है ताकि अपराधियों को आसानी से पकड़ा जा सके और उन्हें न्याय के दायरे में लाया जा सके। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये कानून जमीनी स्तर पर किस तरह से प्रभावी होते हैं और देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में कितना सुधार लाते हैं।

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संसद से पास हुए तीन नए आपराधिक कानून में सुप्रीम कोर्ट ने सुझाए कुछ बदलाव 1 जुलाई से क़ानून होंगे लागू https://chaupalkhabar.com/2024/05/04/three-new-laws-passed-by-parliament/ https://chaupalkhabar.com/2024/05/04/three-new-laws-passed-by-parliament/#respond Sat, 04 May 2024 10:22:59 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=3100 भारतीय न्याय प्रणाली में महिलाओं के खिलाफ झूठे आरोपों के खिलाफ एक सामर्थ्यपूर्ण तंत्र को स्थापित करने की बात को लेकर, सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय दिया है। यह निर्णय न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक प्रासंगिक सामाजिक मुद्दा भी है। इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने …

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भारतीय न्याय प्रणाली में महिलाओं के खिलाफ झूठे आरोपों के खिलाफ एक सामर्थ्यपूर्ण तंत्र को स्थापित करने की बात को लेकर, सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय दिया है। यह निर्णय न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक प्रासंगिक सामाजिक मुद्दा भी है। इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता में सुधार की जरूरत को उजागर किया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्तियों ने इस विषय पर अपनी राय रखते हुए कहा कि झूठी शिकायतों के साथ खिलाफ़ी निवारण के लिए भारतीय न्याय संहिता में महत्वपूर्ण बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने इसे विधायिका के सम्मुख प्रस्तुत किया है ताकि सामान्य लोगों को न्याय और सुरक्षा की अधिक गारंटी मिल सके।

यह निर्णय न केवल सुप्रीम कोर्ट की उच्चतम अदालत के रूप में बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। महिलाओं के खिलाफ झूठे आरोपों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है जो उन्हें संरक्षित और सुरक्षित महसूस कराएगी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने अपने फैसले में उजागर किया कि भारतीय न्याय संहिता में सुधार की आवश्यकता है, खासकर धारा 85 और 86 में। इन धाराओं में संशोधन करने से पहले इसे ध्यान से विचार करना चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि न्याय प्रणाली में स्थिरता और न्याय की शानदारता बनी रहे।

बेंच ने कहा कि FIR और चार्जशीट यह इशारा करती है कि महिला के आरोप काफी अस्पष्ट, सामान्य और व्यापक हैं

फैसले के अनुसार, ये धाराएं अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं, खासकर धारा 498 (ए) के समान। उन्होंने यह भी कहा कि विधायिका को नये कानून को प्रारंभ होने से पहले समय पर इस पर विचार करना चाहिए, ताकि समाज को विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा और समानता की ओर एक प्रासंगिक कदम मिल सके। धारा 85 में यह बताया गया है कि अगर कोई किसी महिला के साथ क्रूरता करता है, तो उसे दंडित किया जाएगा। इसके साथ ही उसे नकद जुर्माना भी देना होगा। धारा 86 में ‘क्रूरता’ की परिभाषा विस्तार से बताई गई है। इसमें महिला के मानसिक और शारीरिक नुकसान को समाहित किया गया है।

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इस निर्णय के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा के प्रति अपनी संवेदनशीलता को दिखाया है। यह भारतीय समाज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है जो महिलाओं को उनके अधिकारों की गारंटी प्रदान करेगा। इस निर्णय के बाद, सामाजिक संरक्षा और सुरक्षा के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का महत्व बढ़ जाएगा। इससे महिलाओं को न्याय और सुरक्षा की अधिक गारंटी मिलेगी। यह निर्णय सामाजिक संवेदना और न्याय के प्रति भारतीय न्याय प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है। इससे महिलाओं को उनके अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम मिलेगा।

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