varanasi - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com Wed, 31 Jan 2024 11:47:22 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chaupalkhabar.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-Screenshot_2024-08-04-18-50-20-831_com.whatsapp-edit-32x32.jpg varanasi - chaupalkhabar.com https://chaupalkhabar.com 32 32 Gyanvyapi Case: ह‍िंदू पक्ष की बड़ी जीत, कोर्ट ने ह‍िंदू पक्ष को व्यास जी के तहखाने में द‍िया पूजा करने का अधि‍कार https://chaupalkhabar.com/2024/01/31/big-victory-for-the-hindu-side-the-court-gave-the-hindu-side-the-right-to-worship-in-the-basement-of-vyas-ji/ https://chaupalkhabar.com/2024/01/31/big-victory-for-the-hindu-side-the-court-gave-the-hindu-side-the-right-to-worship-in-the-basement-of-vyas-ji/#respond Wed, 31 Jan 2024 11:47:22 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=2268 ज्ञानवापी केस में बुधवार को ह‍िंदू पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ह‍िंदू पक्ष को व्यास जी के तहखाने में पूजा करने का अधि‍कार दे द‍िया है। ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा यह पूजा सात दिनों के भीतर शुरू होगी और सभी को पूजा …

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ज्ञानवापी केस में बुधवार को ह‍िंदू पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ह‍िंदू पक्ष को व्यास जी के तहखाने में पूजा करने का अधि‍कार दे द‍िया है। ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा यह पूजा सात दिनों के भीतर शुरू होगी और सभी को पूजा करने का अधिकार होगा।

Gyanvapi case: Varanasi court allows Hindu side to pray in mosque basement

 

ज्ञानवापी स्थित व्यास जी ने तहखाना को जिलाधिकारी को सौंपने व उसमें पूजा-पाठ का अधिकारी देने की मांग को लेकर पं. सोमनाथ व्यास के नाती शैलेंद्र पाठक की ओर से दाखिल मुकदमे में जिला जज डा. अजय कृष्ण विश्वेश ने मंगलवार को आदेश सुरक्षित रख लिया था।

 

पहली बार  1991 में वाराणसी कोर्ट में यह मुकदमा दाखिल हुआ था, जहां याचिका में ज्ञानवापी परिसर में पूजा की अनुमति मांगी गई थी, इसके पीछे हिंदू पक्ष का मानना था कि ज्ञानवापी में मंदिर का स्ट्रक्चर है और यहां विश्वेश्वर का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग स्थानीय है। केंद्र सरकार ने सितंबर 1991 में पूजा स्थल को कानूनी बना दिया, जिसमें कहा गया कि 15 अगस्त 1947 से पहले के पूजा स्थल को दूसरे धर्म के स्थल में नहीं बदला जा सकता। 1993 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टे लगाकर यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया।

 

 

जिसके बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि स्टे ऑर्डर की वैधता छह महीने तक ही होगी। उसके बाद ऑर्डर प्रभावी नहीं रहेगा। इस आदेश के उपरांत 2019 में वाराणसी कोर्ट में फिर से इस मामले में सुनवाई शुरू हुई। और 2021 में वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट से ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दे दी।

 

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आदेश के मुताबिक एक कमीशन नियुक्त किया गया जिसके बाद आदेशनुसार कमीशन को 6 और 7 मई को दोनों पक्षों की मौजूदगी में श्रृंगार गौरी की वीडियोग्राफी के आदेश दिए गए थे। 10 मई तक शीर्ष अदालत ने इसे लेकर पूरी जानकारी मांगी थी। लेकिन छह मई को पहले दिन का ही सर्वे हो पाया था, और सात मई को मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। और मामला कोर्ट पहुंचा।

 

12 मई को मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने कमिश्नर को बदलने की मांग खारिज कर दी और 17 मई तक सर्वे का काम पूरा करवाकर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जिस-जिस जगह ताले लगे हैं, वहां पर लगे सभी ताले तुड़वाये जाये । अगर इसमें कोई बाधा उत्पन्न करने की कोशिश करता है तो उसपर कानूनी कार्रवाई की जायगी, लेकिन सर्वे का काम हर हालत में पूरा होना चाहिए।

Gyanvapi dispute | Now, masjid panel too seeks removal of Vishnu Shankar  Jain over 'conflict' - The Hindu

 

14 मई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। मुस्लिम पक्ष द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे पर रोक लगाने की मांग की गई थी।  जिसपर कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने से इनकार करते हुए कहा कि हम बिना कागजात देखे आदेश जारी नहीं कर सकते हैं। अब मामले की सुनवाई 17 मई को  होगी।

 

14 मई के बाद से ही ही ज्ञानवापी के सर्वे का काम दोबारा शुरू हुआ। सभी बंद कमरों से लेकर कुएं तक की जांच हुई। इस पूरे प्रक्रिया की वीडियो और फोटोग्राफी की गयी। 16 मई को सर्वे का काम पूरा हुआ। हिंदू पक्ष ने दावा किया कि कुएं से बाबा मिल गए हैं। इसके अलावा हिंदू स्थल होने के कई साक्ष्य मिले। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने दावा किया की सर्वे के दौरान कुछ नहीं मिला। जिसके जवाब में  हिंदू पक्ष ने इसके वैज्ञानिक सर्वे की मांग की। मुस्लिम पक्ष ने इसका विरोध किया।

 

The Statesman

 

21 जुलाई 2023 को जिला अदालत ने हिंदू पक्ष की मांग को मंजूरी दे दी और ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दे दिया। 24 जनवरी 2024 को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाया।जिसके बाद  जिला जज ने वादी पक्ष को सर्वें रिपोर्ट दिए जाने का आदेश दिया।

 

25 जनवरी 2024 को रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानवापी में मंदिर का स्ट्रक्चर मिला , इस पर हिंदू पक्ष ने खुशी जताई। जिसके बाद आज  31 जनवरी 2024 को जिला अदालत ने हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा करने की इजाजत दे दी, इस फैसले को  हिन्दू पक्ष के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

 

By Neelam Singh.

 

 

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मामले मे मुस्लिम पक्ष को दिया बड़ा झटका https://chaupalkhabar.com/2023/12/19/allahabad-high-court-gave-a-big-blow-to-the-muslim-side-in-the-gyanvapi-case/ https://chaupalkhabar.com/2023/12/19/allahabad-high-court-gave-a-big-blow-to-the-muslim-side-in-the-gyanvapi-case/#respond Tue, 19 Dec 2023 07:07:54 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=2028 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मामले मे मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी के 1991 के मुकदमे की ट्रायल की मंजूरी दे दी है। साथ ही हाईकोर्ट ने पांच याचिकाएं भी खारिज कर दी हैं। काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जिसने 1991 के मुकदमे में ट्रायल की मंजूरी …

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मामले मे मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी के 1991 के मुकदमे की ट्रायल की मंजूरी दे दी है। साथ ही हाईकोर्ट ने पांच याचिकाएं भी खारिज कर दी हैं।

काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जिसने 1991 के मुकदमे में ट्रायल की मंजूरी दी है, जो समाज में गहरी चर्चाओं का केंद्र बन गया है। यह फैसला न केवल भूमि स्वामित्व के विवाद को बढ़ा देगा, बल्कि समाज के सामाजिक-राजनीतिक रूपांतरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस निर्णय के परिणामस्वरूप, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। इस मामले में जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने मालिकाना हक विवाद के मुकदमों को चुनौती देने का साहस दिखाया है।

काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी मामले की शुरुआत 1991 में हुई थी, जब पूजा स्थल के भूमि स्वामित्व पर विवाद शुरू हुआ था। इस विवाद में सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय जैसे वादी शामिल थे। तब से लेकर इस समय तक कई मोड़ आए, कई निर्णय लिए गए, लेकिन विवाद अभी भी जारी है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में विवादित मामलों में स्टे आदेश की वैधता की सीमा को निर्धारित किया था, जिससे इस मामले को अधिकारिक और निष्पक्ष तरीके से हल करने का मार्ग मिला। हालांकि, इस मामले में सर्वे का महत्त्वपूर्ण योगदान हो सकता है। विवादित स्थल पर हिंदू और मुस्लिम पक्ष की मांग है कि वैज्ञानिक सर्वे द्वारा सत्यता का पता चले। इसके बाद ही विवाद का समाधान संभव होगा।

 

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इसमें उल्लेखनीय बात यह है कि इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया में समर्थन और विरोध दोनों ही पक्षों ने अपनी पक्षधरता को अच्छी तरीके से प्रस्तुत किया है। न्यायिक संस्था ने दोनों पक्षों की बात सुनी और समर्थन की दृष्टि से निर्णय देने का प्रयास किया है।

इस कठिनाई और विवाद से भरे मामले को ध्यान में रखते हुए, न्यायिक संस्थाओं को उच्चतम सतर्कता और निष्पक्षता से काम करना होगा। इसके साथ ही, समाज को भी शांति और सामंजस्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए संवेदनशीलता और समझदारी का होना जरूरी है।

विवादों के समाधान में न्यायिक संस्थाओं का योगदान महत्वपूर्ण होता है, परंतु समाज के भीतर सहयोग और समझौता बनाना भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अगली सुनवाई में जो भी निर्णय हो, उससे समाज को सामंजस्य, विश्वास और अधिक सहमति की दिशा में बढ़ने की उम्मीद है। इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से संचालन होना चाहिए।

सर्वे के परिणाम का इंतजार है, जो इस मामले को नए मोड़ पर ले जा सकता है। निष्कर्ष यह है कि न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में बढ़ते हुए, समाज में भी सद्भावना और समझौता बढ़ाना आवश्यक है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की आधारशिला रखी https://chaupalkhabar.com/2023/09/23/pm-modi-lays-foundation-stone-of-international-cricket-stadium-today-in-varanasi-uttar-pradesh/ https://chaupalkhabar.com/2023/09/23/pm-modi-lays-foundation-stone-of-international-cricket-stadium-today-in-varanasi-uttar-pradesh/#respond Sat, 23 Sep 2023 12:00:28 +0000 https://chaupalkhabar.com/?p=1713 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की आधारशिला रखी। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम वाराणसी के गंजारी, राजातालाब में लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा और 30 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला होगा।   सभा को संबोधित करते हुए, प्रधान मंत्री ने एक बार फिर वाराणसी …

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की आधारशिला रखी। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम वाराणसी के गंजारी, राजातालाब में लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा और 30 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला होगा।

 

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधान मंत्री ने एक बार फिर वाराणसी आने का अवसर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इस शहर की खुशी शब्दों से परे है। प्रधान मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वह भारत के चंद्रमा पर शिव शक्ति बिंदु पर पहुंचने के ठीक एक महीने बाद काशी का दौरा कर रहे हैं, जहां पिछले महीने की 23 तारीख को चंद्रयान चंद्रमा पर उतरा था। प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए सभी को बधाई देते हुए कहा, “शिव शक्ति का एक स्थान चंद्रमा पर है, जबकि दूसरा यहां काशी में है।”

प्रधान मंत्री ने उस स्थल के महत्व पर भी ध्यान दिया जो माता विंध्यवासिनी के मार्ग के चौराहे पर है और इसकी मोतीकोट गांव से निकटता है, जहां से राज नारायण जी रहते थे।

 

प्रधान मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भगवान महादेव को समर्पित अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम के डिजाइन ने काशी के नागरिकों में गर्व की भावना पैदा की है। उन्होंने कहा कि स्टेडियम में शानदार क्रिकेट मैच देखने को मिलेंगे, जबकि युवा एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले स्टेडियम में प्रशिक्षण लेने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा, “इससे काशी के नागरिकों को बहुत लाभ होगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि क्रिकेट के माध्यम से दुनिया भारत से जुड़ रही है और कई नए देश क्रिकेट खेल रहे हैं जिससे बड़ी संख्या में मैच हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम आने वाले वर्षों में स्टेडियमों की बढ़ती मांग को पूरा करेगा। प्रधानमंत्री ने बीसीसीआई को भी उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

 

प्रधान मंत्री ने रेखांकित किया कि इस तरह के पैमाने के खेल बुनियादी ढांचे के विकास से न केवल खेलों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस तरह के विकास अधिक आगंतुकों को आकर्षित करते हैं जिससे क्षेत्र में होटल, भोजनालयों, रिक्शा और ऑटो चालकों के साथ-साथ नाविकों जैसे क्षेत्रों को बहुत लाभ होता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इसका खेल कोचिंग और प्रबंधन संस्थानों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे युवाओं के लिए खेल स्टार्टअप में उद्यम करने का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रमों पर भी चर्चा की और कहा कि आने वाले दिनों में वाराणसी में एक नया खेल उद्योग विकसित होने की उम्मीद है।

 

प्रधानमंत्री ने अभिभावकों के बीच खेल के प्रति बदलते नजरिए पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा, “अब देश का मूड है- जो खेलेगा वो ही खिलेगा।” प्रधानमंत्री ने शहडोल की अपनी हालिया यात्रा और वहां के एक आदिवासी गांव में युवाओं के साथ अपनी बातचीत का जिक्र किया और वहां के ‘मिनी ब्राजील’ के लिए स्थानीय गौरव और वहां फुटबॉल के प्रति उनके गहरे प्रेम को याद किया।

प्रधानमंत्री ने खेलों के प्रति काशी में आये बदलाव का भी वर्णन किया. उन्होंने कहा कि वह प्रयास काशी के युवाओं को विश्व स्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने का है। इसीलिए इस स्टेडियम के साथ-साथ सिगरा स्टेडियम पर भी 400 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं, जहां 50 से ज्यादा खेलों के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. यह पहला मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स होगा जो दिव्यांगों के अनुकूल होगा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नये निर्माण के साथ-साथ पुरानी व्यवस्थाओं में भी सुधार किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की हालिया खेल सफलता बदले हुए दृष्टिकोण के कारण है क्योंकि अब खेल युवाओं की फिटनेस, रोजगार और करियर से जुड़ गया है। 9 साल पहले की तुलना में इस साल का खेल बजट तीन गुना बढ़ाया गया है. खेलो इंडिया के बजट में पिछले साल की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सरकार स्कूल से ओलंपिक पोडियम तक एक टीम के सदस्य की तरह एथलीटों के साथ चलती है”, उन्होंने कहा। उन्होंने लड़कियों की बढ़ती भागीदारी और TOPS योजना का जिक्र किया.

 

प्रधान मंत्री ने विश्व विश्वविद्यालय खेलों पर प्रकाश डाला जहां भारत ने इस वर्ष के संस्करण में अपनी भागीदारी के दौरान अर्जित सभी पदकों की कुल राशि की तुलना में अधिक पदक जीतकर इतिहास रचा है। प्रधानमंत्री ने आगामी एशियाई खेलों में भाग लेने वाले एथलीटों को भी शुभकामनाएं दीं।

श्री मोदी ने देश के हर गांव, शहर के कोने-कोने में खेल संभावनाओं की मौजूदगी को स्वीकार किया और उन्हें खोजने और उनके कौशल को विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री मोदी ने कहा, “छोटे शहरों और गांवों से आने वाले युवा आज देश का गौरव बन गए हैं”, उन्होंने उनके लिए अधिक से अधिक अवसर पैदा करने पर जोर दिया। उन्होंने खेलो इंडिया का उदाहरण दिया जहां स्थानीय प्रतिभाओं की पहचान की जाती है और सरकार उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट बनाने का प्रयास करती है। इस अवसर पर खेल जगत के दिग्गजों की उपस्थिति को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने काशी के प्रति उनके स्नेह के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

प्रधान मंत्री ने जोर देकर कहा, “नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और निखारने के लिए अच्छे कोच और अच्छी कोचिंग समान रूप से महत्वपूर्ण हैं”, उन्होंने बताया कि जिन एथलीटों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं, उन्हें कोच की भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में युवा विभिन्न खेलों से जुड़े हैं

 

उन्होंने कहा कि नए बुनियादी ढांचे से छोटे शहरों और गांवों के एथलीटों को नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि खेलो इंडिया के तहत बनाए गए बुनियादी ढांचे से लड़कियों को फायदा हो रहा है।

उन्होंने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत खेल को पाठ्येतर गतिविधि के बजाय एक उचित विषय के रूप में माना गया है। पहला राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय मणिपुर में स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी खेल के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने गोरखपुर में स्पोर्ट्स कॉलेज के विस्तार और मेरठ में मेजर ध्यानचंद विश्वविद्यालय की स्थापना का जिक्र किया.

प्रधान मंत्री ने देश की प्रतिष्ठा के लिए इसके महत्व पर जोर देते हुए कहा, “किसी राष्ट्र के विकास के लिए खेल के बुनियादी ढांचे का विस्तार आवश्यक है”। उन्होंने उल्लेख किया कि दुनिया के कई शहर वैश्विक खेल आयोजनों के आयोजन के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने देश में ऐसे वैश्विक आयोजनों की मेजबानी करने में सक्षम खेल बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, यह स्टेडियम विकास के इस संकल्प का साक्षी बनेगा, जो सिर्फ ईंटों और कंक्रीट का ढांचा नहीं होगा बल्कि भारत के भविष्य का प्रतीक भी बनेगा।

 

प्रधानमंत्री ने शहर में चल रहे सभी विकास प्रयासों के लिए काशी के लोगों को श्रेय दिया। “तुम्हारे बिना काशी में कुछ भी साकार नहीं हो सकता। आपके समर्थन और आशीर्वाद से हम काशी के विकास के नए अध्याय लिखते रहेंगे”, प्रधान मंत्री ने निष्कर्ष निकाला।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, श्री योगी आदित्यनाथ, बीसीसीआई के अध्यक्ष, श्री रोजर बिन्नी, बीसीसीआई के सचिव, बीसीसीआई के उपाध्यक्ष, श्री राजीव शुक्ला, श्री जय शाह, सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर, रवि शास्त्री, कपिल देव सहित पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी , दिलीप वेंगसरकर, मदन लाल, गुंडप्पा विश्वनाथ, और गोपाल शर्मा और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अन्य लोगों के अलावा इस अवसर पर उपस्थित थे।

Brajesh Kumar

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